बुधकौशिक का ३८ श्लोकों का रक्षा-स्तोत्र, जो सम्पूर्ण शरीर को राम की रक्षा में सौंपता है और राम नाम को सहस्रनाम के तुल्य बताकर समाप्त होता है।
यह संस्कृत स्तोत्र है जिसमें हनुमान जी के नामों से सिर से पैर तक शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। भक्त इसे सुरक्षा, दीर्घायु और सुख-शांति के लिए पढ़ते हैं।