यह संस्कृत स्तोत्र है जिसमें हनुमान जी के नामों से सिर से पैर तक शरीर के हर अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है। भक्त इसे सुरक्षा, दीर्घायु और सुख-शांति के लिए पढ़ते हैं।
यह एक पवित्र प्रार्थना है, जिसे कवच कहा जाता है। इसमें भगवान शिव के अघोर रूप से सभी दिशाओं और परिस्थितियों में अपनी रक्षा करने और आशीर्वाद देने की प्रार्थना की जाती है।
यह देवी के कवच (रक्षा-कवच) का पाठ है, जो देवी महात्म्य (सप्तशती) के पाठ से पहले किया जाता है। इसमें नवदुर्गाओं और विभिन्न देवियों का आह्वान कर शरीर के प्रत्येक अंग और दिशाओं की रक्षा की प्रार्थना की गई है।