Bharat Devotion
Embroidered artwork for ॐ जय जगदीश हरे: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे

यह एक प्रसिद्ध हिंदू भजन है जिसमें भक्त भगवान विष्णु (जगदीश) की स्तुति करते हैं और उनसे अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। यह भजन प्रार्थना और आरती के समय गाया जाता है।

श्लोक

ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट , दास जनों के संकट , क्षण में दूर करे ॐ जय जगदीश हरे
Om Jai Jagdish Hare, Swami Jai Jagdish Hare Bhakt Janon Ke Sankat, Das Janon Ke Sankat, Kshan Mein Door Kare Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 1

जो ध्यावे फल पावे , दुःखबिन से मन का , स्वामी दुःखबिन से मन का सुख सम्पति घर आवे , सुख सम्पति घर आवे , कष्ट मिटे तन का ॐ जय जगदीश हरे
Jo Dhyave Phal Pave, Dukh Bin Se Man Ka, Swami Dukh Bin Se Man Ka Sukh Sampati Ghar Aave, Sukh Sampati Ghar Aave, Kasht Mite Tan Ka Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 2

मात पिता तुम मेरे , शरण गहूं किसकी , स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा , तुम बिन और न दूजा , आस करूं मैं जिसकी ॐ जय जगदीश हरे
Maat Pita Tum Mere, Sharan Gahoon Kiski, Swami Sharan Gahoon Main Kiski Tum Bin Aur Na Dooja, Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karoon Main Jiski Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 3

तुम पूरण परमात्मा , तुम अन्तर्यामी , स्वामी तुम अन्तर्यामी पारब्रह्म परमेश्वर , पारब्रह्म परमेश्वर , तुम सब के स्वामी ॐ जय जगदीश हरे
Tum Pooran Parmatma, Tum Antaryami, Swami Tum Antaryami Paarbrahm Parameshwar, Paarbrahm Parameshwar, Tum Sab Ke Swami Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 4

तुम करुणा के सागर , तुम पालनकर्ता , स्वामी तुम पालनकर्ता मैं मूरख फलकामी मैं सेवक तुम स्वामी , कृपा करो भर्ता ॐ जय जगदीश हरे
Tum Karuna Ke Sagar, Tum Palankarta, Swami Tum Palankarta Main Moorakh Phalkami Main Sevak Tum Swami, Kripa Karo Bharta Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 5

तुम हो एक अगोचर , सबके प्राणपति , स्वामी सबके प्राणपति किस विधि मिलूं दयामय , किस विधि मिलूं दयामय , तुमको मैं कुमति ॐ जय जगदीश हरे
Tum Ho Ek Agochar, Sabke Pranpati, Swami Sabke Pranpati Kis Vidhi Miloon Dayamay, Kis Vidhi Miloon Dayamay, Tumko Main Kumati Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 6

दीन - बन्धु दुःख - हर्ता , ठाकुर तुम मेरे , स्वामी रक्षक तुम मेरे अपने हाथ उठाओ , अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे ॐ जय जगदीश हरे
Deen-Bandhu Dukh-Harta, Thakur Tum Mere, Swami Rakshak Tum Mere Apne Hath Uthao, Apne Sharan Lagao Dwaar Pada Tere Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 7

विषय - विकार मिटाओ , पाप हरो देवा , स्वमी पाप हरो देवा श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ , श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ , सन्तन की सेवा ॐ जय जगदीश हरे
Vishay-Vikar Mitao, Paap Haro Deva, Swami Paap Haro Deva Shraddha Bhakti Badhao, Shraddha Bhakti Badhao, Santan Ki Seva Om Jai Jagdish Hare

श्लोक 8

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला

पूजन सामग्री व अर्पण

तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

यह भजन वैष्णव भक्ति परंपरा का एक प्रसिद्ध भजन है, जिसे प्रायः संध्या आरती और घरेलू पूजा में गाया जाता है। इसकी रचना सन् 1870 के आसपास पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी ने की थी, जो आर्य समाज से संबद्ध पंजाबी विद्वान और समाज-सुधारक थे। भजन के सरल और भावपूर्ण बोल भक्तों को भगवान विष्णु (जगदीश) के प्रति समर्पण और विश्वास का भाव सिखाते हैं। यह भारत के अधिकांश हिंदू घरों और मंदिरों में बहुत लोकप्रिय है। यह भजन ईश्वर को जगदीश, विश्वम्भर तथा अंतर्यामी कहकर पुकारता है — ये सभी विष्णु पुराण में वर्णित सर्वव्यापी परमतत्त्व के नाम हैं, जिसकी प्रतिध्वनि भगवद्गीता के दशम अध्याय, श्लोक 20 में भी मिलती है, जहाँ भगवान स्वयं को सबके हृदय में स्थित बताते हैं।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Pandit Shraddha Ram Phillauri

क्या आप जानते हैं?

रचना और रचयिता

यह भजन 'ॐ जय जगदीश हरे' पंडित श्रद्धा राम फिल्लौरी द्वारा सन् 1870 के आसपास रचित है। यह आरती के रूप में प्रसिद्ध है और प्रायः मंदिरों व घरों में संध्या आरती के समय गाया जाता है।

संरचना और विशेषता

प्रत्येक पद के अंत में 'ॐ जय जगदीश हरे' की पंक्ति दोहराई जाती है, जो इसे सामूहिक गान के लिए उपयुक्त बनाती है। कुल आठ पद हैं, जिनमें भक्त अपनी दीनता, ईश्वर की सर्वशक्तिमानता और करुणा का वर्णन करता है।

आध्यात्मिक संदेश

इस भजन में भक्त ईश्वर को 'पूरण परमात्मा', 'अन्तर्यामी', 'करुणा के सागर' आदि संबोधनों से पुकारता है। यह भक्ति की भावना को सरल शब्दों में व्यक्त करता है कि ईश्वर ही एकमात्र शरण हैं और वे सबके संकट हरने वाले हैं।

प्रचलन और महत्व

यह भजन हिंदू धर्म में सबसे अधिक गाए जाने वाले आरती भजनों में से एक है। इसे 'आरती' के रूप में जाना जाता है और यह प्रायः दीपक या अगरबत्ती के साथ गाया जाता है। इसकी लोकप्रियता का कारण इसकी सरलता और भावपूर्ण शब्द हैं।

भाषा और शैली

यह भजन ब्रजभाषा और खड़ी बोली के मिश्रण में लिखा गया है, जो इसे उत्तर भारत में सहज ग्राह्य बनाता है। इसमें 'स्वामी' और 'भर्ता' जैसे शब्द ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।

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