Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री श्याम बाबा की आरती: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

श्री श्याम बाबा की आरती

श्री श्याम बाबा की आरती

यह श्री श्याम बाबा की आरती है, जो भगवान की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। इसमें उनके स्वरूप, उनकी पूजा और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन है।

श्लोक

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे
Om Jai Shri Shyam Hare, Baba Jai Shri Shyam Hare. Khatu Dhaam Virajat, Anupam Roop Dhare.

श्लोक 1

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े
Ratan Jadit Singhasan, Sir Par Chanwar Dhure. Tan Kesariya Baago, Kundal Shravan Pade.

श्लोक 2

गल पुष्पों की माला, सिर पर मुकुट धरे खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले
Gal Pushpon Ki Maala, Sir Par Mukut Dhare. Khewat Dhoop Agni Par, Deepak Jyoti Jale.

श्लोक 3

मोदक खीर चूरमा, सुवरण थाल भरे सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे
Modak Kheer Choorma, Suvaran Thaal Bhare. Sevak Bhog Lagaawat, Seva Nitya Kare.

श्लोक 4

झांझ कटोरा और घडियावल, शंख मृदंग घुरे भक्त आरती गावे, जय-जयकार करे
Jhanjh Katora Aur Ghadiyawal, Shankh Mridang Ghure. Bhakt Aarti Gaave, Jai-Jaikaar Kare.

श्लोक 5

जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख से उबरे सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे
Jo Dhyaave Phal Paave, Sab Dukh Se Ubare. Sevak Jan Nij Mukh Se, Shri Shyam-Shyam Uchare.

श्लोक 6

श्री श्याम बिहारी जी की आरती, जो कोई नर गावे कहत भक्त जन, मनवांछित फल पावे
Shri Shyam Bihari Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaave. Kahat Bhakt Jan, Manwaanchhit Phal Paave.

श्लोक 7

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे निज भक्तों के तुमने, पूरण काज करे
Jai Shri Shyam Hare, Baba Ji Shri Shyam Hare. Nij Bhakton Ke Tumne, Pooran Kaaj Kare.

श्लोक 8

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे
Om Jai Shri Shyam Hare, Baba Jai Shri Shyam Hare. Khatu Dhaam Virajat, Anupam Roop Dhare.

श्लोक 9

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

बुधवार, गुरुवार एवं एकादशी तिथि

उत्तम मुहूर्त / समय

प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) अथवा संध्या वेला

पूजन सामग्री व अर्पण

तुलसी दल, माखन-मिश्री का भोग, पीले पुष्प एवं चंदन

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • परम भक्ति, मानसिक आनंद, भय-चिंता से मुक्ति एवं आत्मिक शांति
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

यह आरती श्री श्याम बाबा (खाटू श्याम जी) की है, जिन्हें भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है। यह राजस्थान के खाटू धाम मंदिर से जुड़ी है और वहाँ तथा अन्य श्याम मंदिरों में संध्या आरती के समय गाई जाती है। इसकी पहली पंक्ति के बाद पहला पद रत्नजड़ित सिंहासन और केसरिया वस्त्रों का, तीसरा पद मोदक, खीर और चूरमा के भोग का और चौथा पद आरती में बजने वाले वाद्यों का वर्णन करता है। यह भक्ति परंपरा का हिस्सा है, जिसमें भगवान की मूर्ति के सामने दीपक, धूप और भोग अर्पित करते हुए यह गीत गाया जाता है। भक्त श्री श्याम बाबा को बर्बरीक के रूप में मानते हैं, जो महाभारत में भीम के पराक्रमी पौत्र थे और जिन्होंने कुरुक्षेत्र का संपूर्ण युद्ध देखने की इच्छा से भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। इस परम बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में 'श्याम' नाम से पूजित होने का वरदान दिया। यह कथा महाभारत के मूल संस्कृत ग्रंथ में नहीं, बल्कि इसकी मौखिक एवं क्षेत्रीय परंपराओं में प्रचलित है, और यही खाटू श्याम की उपासना को इतिहास परंपरा से जोड़ने वाला सूत्र है।

क्या आप जानते हैं?

रचना का स्वरूप

यह आरती श्री श्याम बाबा की है, जिन्हें भगवान कृष्ण का स्वरूप माना जाता है और जो राजस्थान के खाटू धाम में विराजमान हैं। इसे 'श्री श्याम बिहारी जी की आरती' के नाम से जाना जाता है और यह भक्तों द्वारा विशेष रूप से संध्या के समय गाई जाती है।

खाटू धाम का महत्व

खाटू धाम राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। भक्तों की मान्यता है कि यहाँ बर्बरीक का शीश विराजमान है और मूर्ति श्याम कुंड के निकट भूमि से प्रकट हुई थी। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते हैं।

आरती का क्रम

इस आरती में बाबा के दिव्य स्वरूप का वर्णन है — रत्नजड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर, केसरिया वस्त्र, कुंडल, पुष्पों की माला और मुकुट। यह वर्णन भक्तों को बाबा के राजसी और दिव्य रूप का ध्यान कराता है, जिससे मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत होता है।

भोग और सेवा

आरती में मोदक, खीर और चूरमा जैसे प्रिय भोगों का उल्लेख है, जो बाबा को चढ़ाए जाते हैं। खाटू धाम में विशेष अवसरों पर ये भोग विधिपूर्वक अर्पित किए जाते हैं, और यह परंपरा आज भी निरंतर जारी है।

संगीत और वाद्य

आरती में झांझ, कटोरा, घड़ियावल, शंख और मृदंग जैसे पारंपरिक वाद्यों का उल्लेख है। ये वाद्य आरती के दौरान बजाए जाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन जाता है।

फल और आशीर्वाद

अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि जो भी भक्त इस आरती को श्रद्धा से गाता है, उसके सभी दुख दूर होते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह विश्वास खाटू धाम के भक्तों में गहराई से व्याप्त है, और इसीलिए यह आरती हर घर में प्रेम से गाई जाती है।

Krishna की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Krishna

Krishna के सभी पाठ देखें →

हिन्दू धर्म से और

सभी देखें

संबंधित शिक्षाएं

एक ही शिक्षा, विभिन्न परंपराओं में प्रतिध्वनित