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Embroidered artwork for कायकावे कैलास — बसवेश्वर वचन: Embroidered silver ishtalinga, a seated Nandi bull and bilva leaves beside a stone shrine

कायकावे कैलास — बसवेश्वर वचन

कायकावे कैलास — बसवेश्वर वचन

जगद्गुरु बसवेश्वर का यह प्रसिद्ध कन्नड़ वचन 'कायकावे कैलास' (कर्म ही पूजा है / काम ही मोक्ष है) का अमर संदेश देता है। बसवण्णा सिखाते हैं कि पूरी निष्ठा और पवित्र मन से किया गया सत्कर्म ही ईश्वर का साक्षात्कार है।

श्लोक

कायकवे कैलास गुरुपथवे मुक्ति सत्यशुद्ध कायकवे देवलोक कूडलसंगमदेवा
Kayakave Kailasa Gurupathave Mukti Satya Shuddha Kayakave Devaloka Koodalasangamadeva

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

जगद्गुरु बसवेश्वर (12वीं शताब्दी) कर्नाटक के महान दार्शनिक, समाज सुधारक और लिंगायत धर्म के संस्थापक थे। उन्होंने 'अनुभव मंटप' की स्थापना की, जहाँ सभी वर्गों के संतों ने कन्नड़ भाषा में वचनों की रचना की। यह वचन श्रम की प्रतिष्ठा और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Basavanna · मध्यकालीन लिंगायत दार्शनिक-संत · 12वीं शताब्दी, कर्नाटक

12वीं शताब्दी के कन्नड़ दार्शनिक, कवि, एवं समाज सुधारक, जिन्होंने जातिगत पदानुक्रम एवं कर्मकांड को नकारते हुए इष्टलिंग भक्ति एवं श्रम को पूजा (कायकावे कैलास) मानने वाले लिंगायत (वीरशैव) आंदोलन की स्थापना की। उन्होंने आध्यात्मिक एवं सामाजिक चर्चा हेतु एक प्रारंभिक सार्वजनिक मंच, अनुभव मंटप, की भी स्थापना की।

क्या आप जानते हैं?

सामाजिक समानता के अग्रदूत

बसवण्ण ने जातिगत बाधाओं को समाप्त किया और श्रम को सभी के लिए एक सार्वभौमिक आध्यात्मिक मार्ग के रूप में स्थापित किया।

अनुभव मंटप

दुनिया की सबसे पहली प्रलेखित आध्यात्मिक संसद, जहाँ जीवन के सभी क्षेत्रों के पुरुषों और महिलाओं ने वचनों की रचना की।

कुडालसंगम

बसवण्ण ने अपने प्रत्येक वचन का समापन 'कुडालसंगमदेव' (नदियों के संगम के भगवान शिव) को समर्पित अपनी मुद्रा (हस्ताक्षर) के साथ किया।

Basavanna की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Basavanna

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