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Embroidered artwork for णमोकार मंत्र (पंच परमेष्ठी नमस्कार): Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

णमोकार मंत्र (पंच परमेष्ठी नमस्कार)

णमोकार मंत्र (पंच परमेष्ठी नमस्कार)

यह जैन धर्म का सबसे पवित्र और प्रमुख मंत्र है, जिसमें पाँच सर्वोच्च आत्माओं — अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु — को नमन किया जाता है।

श्लोक

णमो अरिहंताणं
Namo Arihantanam

श्लोक 1

णमो सिद्धाणं
Namo Siddhanam

श्लोक 2

णमो आइरियाणं
Namo Aayariyanam

श्लोक 3

णमो उवज्झायाणं
Namo Uvajjhayanam

श्लोक 4

णमो लोए सव्व साहूणं
Namo Loye Savva Sahunam

श्लोक 5

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

पृष्ठभूमि

यह मंत्र जैन परंपरा में प्रतिदिन सुबह, ध्यान और पूजा के आरंभ में पढ़ा जाता है। इसे 'णमोकार मंत्र' या 'नवकार मंत्र' भी कहा जाता है और यह किसी एक देवता की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक श्रेष्ठता की सात्विक अभिव्यक्ति है। जैन अनुयायी इसे सबसे शक्तिशाली एवं मंगलकारी मंत्र मानते हैं। इसका सबसे प्राचीन उल्लेख भगवती सूत्र (व्याख्याप्रज्ञप्ति सूत्र, जैन आगमों का पाँचवाँ अंग) में मिलता है।

क्या आप जानते हैं?

महत्व

यह जैन धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र मंत्र है, जिसे नवकार मंत्र या परमेष्ठी मंत्र भी कहा जाता है। इसे दिन में कम से कम एक बार जपना अनिवार्य माना जाता है और यह सभी जैन मंत्रों का सार है।

पाँच स्तुतियाँ

इस मंत्र में पाँच परमेष्ठियों (उच्चतम आत्माओं) को नमन किया गया है: अरिहंत (जिन्होंने आंतरिक शत्रुओं पर विजय पाई), सिद्ध (मुक्त आत्माएँ), आचार्य (संघ के प्रमुख), उपाध्याय (धर्मगुरु) और साधु (मुनि)। ये पाँचों जैन धर्म में पूजनीय हैं।

भाषा

मंत्र की भाषा अर्धमागधी प्राकृत है, जो पाली और संस्कृत से संबंधित एक प्राचीन भाषा है। यह जैन आगम ग्रंथों की मूल भाषा है और इसका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अर्थ

इस मंत्र में किसी देवता या व्यक्ति विशेष से कोई प्रार्थना नहीं की गई, बल्कि गुणों और उपलब्धियों को नमन किया गया है। यह वैराग्य, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि हमें केवल गुणों की पूजा करनी चाहिए।

उपयोग

यह मंत्र ध्यान, पूजा और दैनिक जप में प्रयोग किया जाता है। इसे 'मंत्रों का राजा' भी कहा जाता है क्योंकि यह सभी मंत्रों का सार माना जाता है। इसे बिना किसी नियम या अवसर के कभी भी जपा जा सकता है।

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