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Embroidered artwork for सिद्धाचल शिखरे दीवो रे – आदेश्वर अलबेलो: Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

सिद्धाचल शिखरे दीवो रे – आदेश्वर अलबेलो

सिद्धाचल शिखरे दीवो रे – आदेश्वर अलबेलो

सिद्धाचल पर विराजमान आदेश्वर (ऋषभदेव) की स्तुति में गुजराती जैन स्तवन, जो पंडित वीरविजयजी की नवाणुं प्रकारी पूजा से है।

श्लोक

सिद्धाचल शिखरे दीवो रे, आदेश्वर अलबेलो रे, जाणे दर्शन अमृत पीवोरे, आदेश्वर अलबेलो रे. अलबेलो अलबेलो अलबेलो रे, आदेश्वर अलबेलो रे.
Siddhachal Shikhare Deevo Re, Adeshwar Albelo Re, Jaane Darshan Amrit Peevo Re, Adeshwar Albelo Re. Albelo Albelo Albelo Re, Adeshwar Albelo Re.

श्लोक 1

रवि सोमयशा नी लारे रे.. आदेश्वर.. तेर कोडी मुनि परिवारे रे.. आदेश्वर..
Ravi Somayasha Ni Laare Re.. Adeshwar.. Ter Kodi Muni Parivaare Re.. Adeshwar..

श्लोक 2

करे शिवसुंदरीनुं आणुं रे.. आदेश्वर.. नारदजी लाख एकाणुं रे.. आदेश्वर..
Kare Shivsundareenun Aaniun Re.. Adeshwar.. Naaradji Laakh Ekaanun Re.. Adeshwar..

श्लोक 3

वसुदेवनी नारी प्रसिद्धि रे.. आदेश्वर.. पांत्रीस हजार ते सिद्धि रे.. आदेश्वर..
Vasudevni Naari Prasiddhi Re.. Adeshwar.. Paantrees Hajaar Te Siddhi Re.. Adeshwar..

श्लोक 4

लाख बावनने एक कोडी रे.. आदेश्वर.. पंचावन साहसने जोडी रे.. आदेश्वर..
Laakh Baavanne Ek Kodi Re.. Adeshwar.. Panchaavan Saahasne Jodi Re.. Adeshwar..

श्लोक 5

सातमें सत्योतेर साधु रे.. आदेश्वर.. चौद सहसमुनि दमितारी रे.. आदेश्वर..
Saatmen Satyoter Saadhu Re.. Adeshwar.. Chaud Sahasmuni Damitaari Re.. Adeshwar..

श्लोक 6

तव ए वरिया शिवनारी रे.. आदेश्वर.. चौद सहसमुनि दमितारी रे.. आदेश्वर..
Tav E Variya Shivnaari Re.. Adeshwar.. Chaud Sahasmuni Damitaari Re.. Adeshwar..

श्लोक 7

प्रद्युम्नप्रिया अचंभी रे.. आदेश्वर.. चौआलीसमें वैदर्भी रे.. आदेश्वर..
Pradyumnapriya Achambhi Re.. Adeshwar.. Chauaalismen Vaidarbhi Re.. Adeshwar..

श्लोक 8

थावच्चा पुत्र हजारे रे.. आदेश्वर.. शुक्र परिव्राजक ए धारे रे.. आदेश्वर..
Thaavachcha Putra Hajaare Re.. Adeshwar.. Shukra Parivraajak E Dhaare Re.. Adeshwar..

श्लोक 9

सेलग पणसय विख्यात रे.. आदेश्वर.. सुभद्र मुनि सम साते रे.. आदेश्वर..
Selag Pansay Vikhyaat Re.. Adeshwar.. Subhadra Muni Sam Saate Re.. Adeshwar..

श्लोक 10

भवतरीया तेणे भवतारण रे.. आदेश्वर.. गजचंद्रमहोदय कारण रे.. आदेश्वर..
Bhavtariya Tene Bhavtaaran Re.. Adeshwar.. Gajchandramahoday Kaaran Re.. Adeshwar..

श्लोक 11

सुरकांत अचल अभिनंदो रे.. आदेश्वर.. सुमति श्रेष्ठा भय कंदोरे.. आदेश्वर..
Surkaant Achal Abhinando Re.. Adeshwar.. Sumati Shreshtha Bhay Kando Re.. Adeshwar..

श्लोक 12

ईहां मोक्ष गयाकेई कोटी रे.. आदेश्वर.. अमने पण आशा मोटी रे.. आदेश्वर..
Ihaan Moksh Gaya Kei Koti Re.. Adeshwar.. Amane Pan Aasha Moti Re.. Adeshwar..

श्लोक 13

श्रद्धा संवेगे भरियो रे.. आदेश्वर.. में मोटो दरीयोतरियो रे.. आदेश्वर..
Shraddha Samvege Bhariyo Re.. Adeshwar.. Main Moto Dariyo Tariyo Re.. Adeshwar..

श्लोक 14

श्रध्धा विणकुण ईहांआवे रे.. आदेश्वर.. लघु जळमां केम तेनारे.. आदेश्वर..
Shraddha Vin Kun Ihaan Aave Re.. Adeshwar.. Laghu Jalmaan Kem Tenaare.. Adeshwar..

श्लोक 15

तिणे हाथ हवे प्रभु झालो रे.. आदेश्वर.. शुभवीरने हईडे वहालो रे.. आदेश्वर..
Tine Haath Have Prabhu Zalo Re.. Adeshwar.. Shubhveerne Haide Vahaalo Re.. Adeshwar..

श्लोक 16

सिद्धाचल.. विमलाचल.. शेत्रुंजय.. शिखरे दीवो रे, आदेश्वर अलबेलो रे जाणे दर्शन अमृत पीवोरे.. आदेश्वर.. अलबेलो अलबेलो अलबेलो रे, आदेश्वर अलबेलो रे…
Siddhachal.. Vimlachal.. Shetrunjay.. Shikhare Deevo Re, Adeshwar Albelo Re Jaane Darshan Amrit Peevo Re.. Adeshwar.. Albelo Albelo Albelo Re, Adeshwar Albelo Re…

श्लोक 17

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

यह स्तवन प्रथम तीर्थंकर आदेश्वर, यानी आदिनाथ या ऋषभदेव, की स्तुति में गाया जाता है; उनका जीवन-वृत्त कल्पसूत्र और आदिपुराण में मिलता है। यह शत्रुंजय तीर्थ की निन्यानवे प्रकारी पूजा, 'नवाणुं प्रकारी पूजा', की नौवीं पूजा की ढाल है, जिसकी रचना पंडित वीरविजयजी (काव्य-नाम शुभवीर) ने की और जो उदाहरणार्थ 'श्री विविध पूजा संग्रह' भाग 1 (1903) में छपी है। सिद्धाचल, विमलाचल और शत्रुंजय गुजरात के पालिताणा में स्थित एक ही पवित्र पर्वत के नाम हैं, और यात्री चढ़ाई करते समय इसे गाते हैं। टेक में प्रभु के दर्शन को अमृत-पान के समान बताया गया है।

इस पाठ के विषय में

रचयिता: Pandit Veervijayji

क्या आप जानते हैं?

आदेश्वर, प्रथम तीर्थंकर

'आदेश्वर' आदिनाथ यानी ऋषभदेव का आदरपूर्ण नाम है, जो जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में प्रथम हैं। गुजराती 'अलबेलो' का अर्थ है सुंदर, मनमोहक और निराला, जो प्रभु को प्रिय और सहज पहुँच वाले रूप में दिखाता है।

एक पर्वत, अनेक नाम

अंतिम पंक्ति (पद 17) में सिद्धाचल, विमलाचल और शत्रुंजय का नाम आता है। ये पालिताणा के एक ही पर्वत के तीन नाम हैं, जहाँ असंख्य आत्माओं के मोक्ष पाने की मान्यता है और सैकड़ों मंदिर हैं।

गीत की संख्याएँ

पदों में इस पर्वत पर मोक्ष पाने वाले साधुओं की संख्याएँ गिनाई गई हैं, जैसे तेर कोड़ी (13 करोड़) मुनि (पद 2), नारद के साथ इक्यानवे लाख (पद 3), पैंतीस हजार (पद 4), एक करोड़ बावन लाख और पचपन हजार (पद 5)। ये भक्ति की परंपरागत गणनाएँ हैं, कोई जनगणना नहीं।

परिचित नाम, जैन संदर्भ

पद 3 से 10 में नारद, वसुदेव की पत्नियाँ, प्रद्युम्न की पत्नी, थावच्चापुत्र, शुक और शैलक का उल्लेख है। ज्ञाताधर्मकथा और अंतकृद्दशा जैसे जैन ग्रंथों में इन्हें मोक्षगामी साधक बताया गया है; स्तवन इन्हें पर्वत की महिमा के साक्षी के रूप में रखता है।

हस्ताक्षर और उद्देश्य

पद 16 में कवि का नाम 'शुभवीर' आता है, जो प्रभु से हाथ थामने की प्रार्थना करता है। पद 13 से 15 में श्रद्धा और संवेग से संसार-सागर तरने की कामना है।

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