Bharat Devotion
Embroidered artwork for श्री महावीर आरती: Embroidered Jain ahimsa palm with a gold wheel, white marble temples and lotuses at dawn

श्री महावीर आरती

श्री महावीर आरती

जैन परंपरा की यह आरती भगवान महावीर के कुण्डलपुर में जन्म, उनकी दया-अहिंसा और नाम-स्मरण से कष्ट-मुक्ति का गुणगान करती है।

श्लोक

श्री महावीर आरती जय महावीर प्रभो!, स्वामी जय महावीर प्रभो! जगनायक सुखदायक, अति गम्भीर प्रभो ॐ जय महावीर प्रभु
|| Shree Mahavir Aarti || Jai Mahavir Prabho!, Swami Jai Mahavir Prabho! Jagnayak Sukhdayak, Ati Gambhir Prabho Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 1

कुण्डलपुर में जन्में, त्रिशला के जाये पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए ॐ जय महावीर प्रभु
Kundalpur Mein Janme, Trishala Ke Jaaye Pita Siddharth Raja, Sur Nar Harshaaye Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 2

दीनानाथ दयानिधि, हैं मंगलकारी जगहित संयम धारा, प्रभु परउपकारी ॐ जय महावीर प्रभु
Deenanath Dayanidhi, Hain Mangalkari Jaghit Sanyam Dhara, Prabhu Parupkari Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 3

पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया दयाधर्म का झण्डा, जग में लहराया ॐ जय महावीर प्रभु
Papachar Mitaya, Satpath Dikhlaya Dayadharm Ka Jhanda, Jag Mein Lahraya Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 4

अर्जुनमाली गौतम, श्री चन्दनबाला पार जगत से बेड़ा, इनका कर डाला ॐ जय महावीर प्रभु
Arjunmali Gautam, Shree Chandanbala Paar Jagat Se Beda, Inka Kar Dala Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 5

पावन नाम तुम्हारा, जगतारणहारा निसिदिन जो नर ध्यावे, कष्ट मिटे सारा ॐ जय महावीर प्रभु
Paawan Naam Tumhara, Jagtaranhara Nisdin Jo Nar Dhyave, Kasht Mite Sara Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 6

करुणासागर! तेरी, महिमा है न्यारी ज्ञानमुनि गुण गावे, चरणन बलिहारी ॐ जय महावीर प्रभु
Karunasagar! Teri, Mahima Hai Nyari Gyanmuni Gun Gave, Charanan Balihari Om Jai Mahavir Prabhu

श्लोक 7

पूजन विधि एवं फलश्रुति (महत्व व लाभ)

शुभ दिन व तिथि

नित्य प्रतिदिन अथवा शुभ तिथियों (एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष) पर

उत्तम मुहूर्त / समय

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) अथवा संध्या काल

पूजन सामग्री व अर्पण

शुद्ध घी का दीपक, धूप, ताजे पुष्प एवं नैवेद्य/जल

फलश्रुति एवं आध्यात्मिक लाभ
  • मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
पाठ विधि सुझाव:संध्याकालीन पूजा के अंत में सपरिवार मिलकर दीपक घुमाते हुए आरती गाएं।

पृष्ठभूमि

यह जैन भक्ति परंपरा की आरती है, जो चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर को समर्पित है। इसे मंदिरों और घरों में संध्या के समय तथा महावीर जयंती पर गाया जाता है। दूसरे पद में कल्पसूत्र में वर्णित महावीर के जन्म का स्मरण है, जो रानी त्रिशला और राजा सिद्धार्थ के पुत्र थे। अंतिम पद में रचनाकार ने अपना नाम 'ज्ञानमुनि' बताया है; वे कौन थे, यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं, इसलिए इसे अज्ञात काल की परंपरागत भक्ति रचना ही कहना उचित है।

क्या आप जानते हैं?

रचनाकार का नाम

आरती के अंतिम पद में 'ज्ञानमुनि गुण गावे' आता है, जिससे गायक-कवि का नाम ज्ञानमुनि प्रतीत होता है। वे किस परंपरा या काल के थे, यह निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है, इसलिए रचयिता के विषय में इससे अधिक नहीं कहा जा सकता।

जन्म स्थान और माता-पिता

दूसरे पद के अनुसार भगवान महावीर का जन्म कुण्डलपुर (जैन परंपरा का कुण्डग्राम, वर्तमान बिहार) में हुआ। उनकी माता का नाम त्रिशला और पिता का नाम राजा सिद्धार्थ था, और उनके जन्म पर देवता और मनुष्य दोनों आनंदित हुए।

तीन नामित शिष्य

पाँचवें पद में अर्जुनमाली, गौतम और चन्दनबाला का नाम आता है। गौतम (इन्द्रभूति गौतम) महावीर के प्रमुख गणधर थे, अर्जुनमाली हिंसा छोड़कर साधु-पथ पर आए, और चन्दनबाला आगे चलकर साध्वी-संघ की प्रमुख बनीं।

महावीर का संदेश

चौथे पद में कहा गया है कि भगवान महावीर ने पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया और दयाधर्म का झण्डा जग में लहराया। यह जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा और करुणा का संकेत है।

करुणा और महिमा

अंतिम पद में भगवान महावीर को करुणासागर कहा गया है, और छठे पद में उनके पावन नाम का दिन-रात ध्यान करने से सब कष्ट मिटने का आश्वासन है।

Mahavira की संपूर्ण स्तुति एवं पाठ

Mahavira

Mahavira के सभी पाठ देखें →

जैन धर्म से और

सभी देखें