पालि त्रिपिटक से भगवान बुद्ध के उपदेश — धम्मपद, रत्न सूत्र सहित — मूल पालि पाठ और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
हृदय सूत्र: अवलोकितेश्वर शारिपुत्र से कहते हैं कि रूप शून्यता है और शून्यता रूप है, और सूत्र 'गते गते पारगते' मन्त्र पर समाप्त होता है।
करणीय मैत्री सूत्र (सुत्तनिपात 1.8): सभी प्राणियों के प्रति असीम मैत्री का बुद्ध-उपदेश, जो रक्षा के लिए पढ़ा जाता है।
यह एक बौद्ध सूत्र है जिसमें भगवान बुद्ध सात बोध्यंगों (जागृति के सात अंगों) का उपदेश देते हैं, जो ध्यान और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं। यह बीमारी और कष्ट से मुक्ति के लिए इन अंगों के अभ्यास की शक्ति को दर्शाता है।
यह एक प्राचीन बौद्ध सूत्र है जिसमें भगवान बुद्ध ने एक देवता के प्रश्न पर जीवन के सबसे उत्तम मंगल (शुभ) कार्यों और गुणों को सरल शब्दों में समझाया है।
रतन सुत्त (खु.पा. ६, सु.नि. २.१): वैशाली में महामारी और भय के समय बुद्ध द्वारा त्रिरत्नों पर दिया गया रक्षा-सूत्र।