यह एक प्राचीन बौद्ध सूत्र है जिसमें भगवान बुद्ध ने एक देवता के प्रश्न पर जीवन के सबसे उत्तम मंगल (शुभ) कार्यों और गुणों को सरल शब्दों में समझाया है।
रतन सुत्त (खु.पा. ६, सु.नि. २.१): वैशाली में महामारी और भय के समय बुद्ध द्वारा त्रिरत्नों पर दिया गया रक्षा-सूत्र।
मज्झिम निकाय 86 का बौद्ध रक्षा-पाठ, जिसमें अर्हत अंगुलिमाल प्रसव-पीड़ा से जूझती माता और उसके शिशु की कुशलता की कामना करते हैं।
आठ पालि गाथाएँ जो मार, आळवक, नाळागिरि हाथी, अंगुलिमाल आदि पर बुद्ध की विजयों का स्मरण कराती हैं और रक्षा-परित्त के रूप में पढ़ी जाती हैं।