प्रत्येक जातक कथा की त्रि-आयामी शास्त्रीय संरचना
पालि तिपिटक की जातक कथाएँ 'जातकट्ठवण्णना' के अनुसार एक निश्चित तीन-स्तरीय शास्त्रीय प्रारूप में संरचित हैं:
१. पच्चुप्पन्नवत्थु (वर्तमान कथा): जेतवन अनाथपिंडिक आराम (श्रावस्ती) अथवा राजगृह की वह वास्तविक घटना, जहाँ भिक्षुओं के प्रश्न या परिस्थिति को देखकर बुद्ध कथा का आरंभ करते हैं। २. अतीतवत्थु (अतीत कथा): मूल जन्मकथा, जो प्रायः 'अतीत में जब वाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त राज्य करते थे...' से प्रारंभ होकर बोधिसत्व द्वारा पारमिताओं की साधना को उजागर करती है। ३. समोधान (समवधान / संबंध संयोजन): कथा का अंतिम रहस्योद्घाटन, जहाँ बुद्ध बताते हैं कि उस प्राचीन काल के पात्र वर्तमान संघ में कौन हैं — जैसे देवदत्त विरोधी था, आनंद निष्ठावान सारथी थे, और वह बोधिसत्व स्वयं बुद्ध थे।