Bharat Devotion
बौद्ध धर्म
पालि तिपिटक · खुद्दक निकाय

जातक कथाएँ

भगवान बुद्ध के पूर्वजन्मों की जातक कथाएँ — कर्म और करुणा के सिद्धांत को दर्शाती कथाएँ — मूल पालि संदर्भ और अर्थ सहित।

शब्द-व्युत्पत्ति व अर्थ
पालि व संस्कृत: जातक (नपुंसकलिंग: जातकं)

शाब्दिक अर्थ: 'जन्मा हुआ', 'उत्पन्न', अथवा 'जन्म-संबंधी कथा' / 'पूर्वजन्म का पावन आख्यान' (जातम् अधिकृत्य कृतः ग्रन्थः)। — धातु 'जन्' (उत्पन्न होना, जन्म लेना) + कृदंत 'क्त' (जात = उत्पन्न/जन्मा हुआ) + स्वार्थे/संज्ञा प्रत्यय 'क' से निष्पन्न।

बौद्ध धर्मशास्त्र में 'जातक' का विशिष्ट तात्पर्य तथागत बुद्ध के उन पूर्वजन्मों की गाथाओं से है, जब वे बोधिसत्व रूप में समस्त योनियों (पशु, पक्षी, मानव, देव) में जन्म लेकर बुद्धत्व की प्राप्ति हेतु १० पारमिताओं की साधना कर रहे थे।
🪔ऐतिहासिक उद्भव व आध्यात्मिक महत्त्व

बोधिसत्व की महायात्रा: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पालि परंपरा व आध्यात्मिक महत्त्व

५४७ पूर्वजन्मों की ये पावन कथाएँ बुद्धत्व की साधना, कर्मफल के अकाट्य नियम और समस्त प्राणियों के प्रति असीम करुणा का प्रत्यक्ष साक्ष्य हैं।

शास्त्रीय परंपरा

खुद्दकनिकाय का १०वाँ ग्रंथ

पालि सुत्तपिटक के अंतर्गत ५४७ श्लोक-संग्रहों (गाथाओं) में संरक्षित, जो श्लोक संख्या के आधार पर २२ निपातों में सुव्यवस्थित हैं।

बोधिसत्व साधना

दश पारमिताओं की महासाधना

चार असंख्य और एक लाख कल्पों तक दान, शील, त्याग, प्रज्ञा, वीर्य और अचल संकल्प की निरंतर साधना का प्रत्यक्ष स्वरूप।

विश्व धरोहर

साँची-अजंता से वैश्विक साहित्य तक

भरहुत (दूसरी सदी ई.पू.) और साँची में पाषाण पर उत्कीर्ण, अजंता के भित्तिचित्रों में जीवंत, तथा पंचतंत्र, हितोपदेश व ईसप की कथाओं के मूल प्रेरणा-स्रोत।

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ऐतिहासिक उद्भव व पालि त्रिपिटक में संरक्षण

जातक कथाओं का मूल उद्भव ईसा पूर्व ५वीं-६ठी शताब्दी में मगध और कोसल के जनपदों में तथागत बुद्ध द्वारा दिए गए मौखिक उपदेशों में है। जब कभी श्रावस्ती के जेतवन अथवा राजगृह के वेणुवन में भिक्षु संघ के समक्ष कोई विवाद, नैतिक संशय या आध्यात्मिक प्रश्न उपस्थित होता था, तब बुद्ध अपने पूर्वजन्मों के प्रत्यक्ष ज्ञान (पुब्बेनिवासनुस्सति-ञाण) द्वारा यह उजागर करते थे कि वर्तमान स्थिति के बीज सैकड़ों जन्म पूर्व किए गए कर्मों में कैसे निहित हैं।

महापरिनिर्वाण (लगभग ४८३ ई.पू.) के उपरांत राजगृह की प्रथम बौद्ध संगीति में महाकश्यप और आनंद के नेतृत्व में इन पावन गाथाओं का संगायन हुआ और उन्हें मौखिक कंठस्थ परंपरा (भाणक) को सौंपा गया। ईसा पूर्व २९ के लगभग श्रीलंका के आलुविहार (मातले) में चतुर्थ बौद्ध संगीति के दौरान भीषण अकाल व युद्ध के संकट से बचाने हेतु संपूर्ण पालि त्रिपिटक को ताड़पत्रों पर पहली बार लिपिबद्ध किया गया। कालांतर में ५वीं शताब्दी ईस्वी में आचार्य बुद्धघोष और महाविहार के आचार्यों ने 'जातकट्ठवण्णना' के रूप में गद्य कथाओं का संकलन कर इसे वह पूर्ण रूप दिया जो आज विश्वभर में वंदनीय है।

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आध्यात्मिक व दार्शनिक महत्त्व: बोधिसत्व साधना व कर्म-सिद्धांत

थेरवाद और समग्र बौद्ध परंपरा में जातक कथाएँ केवल लोक-कथाएँ या नैतिक उपदेश नहीं हैं; वे 'बोधिसत्व-चर्या' का जीवंत शास्त्रीय आलेख हैं। बुद्धत्व कोई एकाएक मिलने वाली उपलब्धि नहीं है, अपितु दीपंकर बुद्ध के समक्ष सुमेध तापस द्वारा लिए गए महासंकल्प से प्रारंभ होकर चार असंख्यात और एक लाख कल्पों तक किए गए असाधारण त्याग और पारमिताओं की परिपक्वता का फल है।

प्रत्येक जातक कथा कर्मफल (कम्म-विपाक) के सार्वभौमिक नियम को यथार्थ जीवन में प्रत्यक्ष सिद्ध करती है। बोधिसत्व द्वारा हंस, वानर, गज अथवा राजा के रूप में किए गए आत्म-बलिदान और सत्यनिष्ठा से पाठक यह अनुभव करते हैं कि कुशल चेतना (सद्कर्म) मुक्ति और आध्यात्मिक तेज प्रदान करती है, जबकि लोभ, द्वेष और अविद्या अंधकारमय पतन की ओर ले जाते हैं।

महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जातक कथाएँ मनुष्य-केंद्रित अहंकार को तोड़कर समस्त प्राणियों की आत्मिक एकता (अहिंसा व मैत्री) का जयघोष करती हैं। छद्दंत गज, निग्रोधमृग, महाकपि और शश जातक में बोधिसत्व के पशु अवतार यह सिद्ध करते हैं कि प्रज्ञा, त्याग और करुणा केवल मनुष्यों का एकाधिकार नहीं हैं; सभी प्राणी समान रूप से चेतना और आत्मिक विकास की क्षमता रखते हैं।

क्या आप जानते हैं?

चंद्रमा पर शशक का अंकन (शश जातक ३१६)

एशियाई जनमानस में चंद्रमा पर दिखने वाली आकृति को खरगोश माना जाता है। यह कथा शश जातक से उपजी है, जहाँ बोधिसत्व ने एक भूखे ब्राह्मण (छद्मवेषी इंद्र) के लिए स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। इंद्र ने इस त्याग से द्रवित होकर चंद्रमा की छाती पर शशक का स्थायी चित्र अंकित कर दिया।

भारतीय कला का सबसे प्राचीन सचित्र आख्यान

ताड़पत्रों पर लिखे जाने से सदियों पहले जातक कथाएँ भरहुत (दूसरी सदी ई.पू.) और साँची के स्तूपों पर लाल बलुआ पत्थर में उकेरी गई थीं। प्राचीन तीर्थयात्री ब्राह्मी अभिलेखों के साथ इन दृश्यों को देखकर कथा पहचानते थे, जो दक्षिण एशिया के सबसे प्राचीन जीवित चित्र-आख्यान हैं।

ईसप की कथाओं और पंचतंत्र के मूल प्रेरणा-स्रोत

संसार की सुप्रसिद्ध नीतिकथाएँ — जैसे 'बंदर और मगरमच्छ' (वानरिंद जातक ५७) तथा 'बातूनी कछुआ' (कच्छप जातक २१५) — बौद्ध जातकों से प्राचीन रेशम मार्ग के माध्यम से संस्कृत पंचतंत्र, फ़ारसी कलीला-व-दिमना और ग्रीक ईसप की कथाओं में पहुँचीं।

बुद्धत्व से पूर्व अंतिम मानवी जन्म (वेस्संतर जातक ५४७)

राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में जन्म लेने से पूर्व बोधिसत्व का अंतिम जन्म राजा वेस्संतर का था। इस जीवन में उन्होंने अहंकार व आसक्ति के अंतिम अंश को समाप्त करने हेतु अपना सर्वस्व — राज्य, प्रिय श्वेत गज और यहाँ तक कि अपनी संतान — सहर्ष दान कर दानपारमिता को पूर्ण किया।

पशु-पक्षियों का गुरु व धर्म-प्रणेता रूप

२०० से अधिक जातक कथाओं में बोधिसत्व पशु-पक्षियों (छद्दंत गज, स्वर्ण मृग, वानरराज, मयूर) के रूप में अवतरित होते हैं। वे मानव राजाओं और शिकारियों से कहीं अधिक क्षमा, सत्य और करुणा का प्रदर्शन कर यह सिद्ध करते हैं कि प्रज्ञा व आत्मिक विकास किसी योनि-विशेष तक सीमित नहीं है।

गाथाओं की संख्या पर आधारित २२ निपात

पालि तिपिटक की ५४७ जातक कथाएँ गाथाओं (श्लोकों) की संख्या के आधार पर २२ निपातों में विभाजित हैं — १ गाथा वाले 'एकनिपात' से लेकर अंतिम २२वें 'महानिपात' तक, जिसमें वेस्संतर जातक में १,००० से अधिक गाथाएँ हैं।

पारमिता (सद्गुण) अनुसार देखें

✨महानिपात: १० महान जन्म

महानिपात: १० महान जन्म

बोधिसत्व के वे अंतिम १० जन्म जिनमें उन्होंने पूर्ण पारमिताओं को सिद्ध कर बुद्धत्व की आधारशिला रखी।

515 में से 515 कथाएँ प्रदर्शित
#547Dāna✨ Mahānipāta

वेस्सन्तर जातक

दान की पूर्णता

राजकुमार वेस्संतरशिवि राज्य व वंक पर्वत
#316Dāna

बुद्धिमान खरगोश और दान की अग्नि

सस जातक

शशक (खरगोश)गंगा तट का वन
#407Viriya

महाकपि जातक क्रमांक 407

वानर राजा का बलिदान

महाकपि (वानर नरेश)गंगा तट का आम्रकुंज
#514Dāna

छद्दंत जातक

छह दांतों वाला गज

षड्दंत गजराजछद्दंत सरोवर व कंचन गुहा
#281Viriya

अभ्यंतर जातक

दिव्य आम्र और साहसी शुक

दिव्यदर्शी हिमालयी तपस्वी और मार्गदर्शक महर्षिकुबेर का स्वर्णिम पर्वत और वाराणसी का राजमहल
#27Mettā

अभिण्ह जातक

हाथी और कुत्ते की अटूट मित्रता

सहानुभूतिशील राज सलाहकारवाराणसी राजमहल व हस्तिशाला
#175Paññā

आदिच्चुपट्ठान जातक

सूर्य-पूजा का ढोंग रचता धूर्त वानर

तपस्वी गुरु जिन्होंने शिष्यों को समझाया कि सूर्य को हाथ जोड़े खड़ा बंदर तपस्वी नहीं, बल्कि धूप में पेट सेकने वाला पाखंडी हैभोर के समय एक ग्रामीण बस्ती के निकट स्थित वन-आश्रम
#424Dāna

आदित्त जातक

जलते घर का दृष्टांत और प्रत्येकबुद्धों को महादान

सौवीर देश के राजा भरत / दानवीर सम्राटसौवीर का रोरुक नगर, राजमहल की छत और गंधमादन पर्वत
#129Paññā

अग्गिक जातक

अग्नि-शिखी सियार और छिपी चोरी

विवेकशील एवं न्यायप्रिय ग्रामीण प्रधानकाशी राज्य का सीमांत ग्रामीण अंचल
#365Mettā

अहिगुण्डिक जातक

सपेरे का वानर

राज-मंत्रीवाराणसी का उत्सव मेला
#24Viriya

आजञ्ञ जातक

दो निष्ठावान रथ-अश्वों की सहनशीलता

धैर्यवान अग्रज अश्ववाराणसी प्राचीर व युद्धभूमि
#119Paññā

अकालरावि जातक

बेमौसम बाँग देने वाला मुर्गा

वाराणसी के प्रख्यात दिशाप्रमुख आचार्यवाराणसी का गुरुकुल परिसर
#90Paññā

अकृतज्ञ जातक

वह व्यापारी जो कृपा भूल गया

वाराणसी के न्यायप्रिय महाश्रेष्ठिवाराणसी और सीमांत प्रदेश
#480Dāna

अकित्ति जातक

अकित्ति और एकांत के वरदान

अस्सी करोड़ का त्याग कर कारा द्वीप पर तपस्या करने वाले महर्षि अकित्तिदक्षिणी समुद्र का निर्जन कारा द्वीप और वाराणसी नगर
#523Khanti

अलम्बुसा जातक

अप्सरा, तपस्वी और खोए हुए तीन वर्ष

महर्षि काश्यपहिमालय का दद्दर पर्वत एवं ऋष्याश्रम
#156Viriya

अलीनचित्त जातक

कृतज्ञ हाथी और निर्भीक राजकुमार

राजकुमार अलीनाचित्त: अदम्य पराक्रमी एवं धीर शासकवाराणसी का राजप्रासाद और बढ़इयों का नदीतटीय ग्राम
#112Paññā

अमरादेवी जातक

विदुषी अमरा की बुद्धिमत्ता और चार दुष्ट मंत्रियों का मानमर्दन

महाप्राज्ञ पंडित महौषधविदेह की राजधानी मिथिला
#124Sacca

अम्ब जातक

दिव्य आम्र-मंत्र और कृतघ्न ब्राह्मण का पतन

विद्यानिधान उदार चांडाल गुरुवाराणसी का बाह्य क्षेत्र और राज-आम्रवाटिका
#344Sacca

अम्बचोर जातक

शक्र और कपटी संन्यासी

देवराज शक्रवाराणसी के निकट आम्रकुंज
#65Paññā

अनभिरति जातक

अशांत पति का दृष्टांत

वाराणसी के बुद्धिमान मुख्य मंत्रीवाराणसी राजदरबार
#64Paññā

अनभिरति जातक

मटमैले जल और निर्मल चित्त का दृष्टांत

तक्षशिला के प्रज्ञावान् आचार्यतक्षशिला गुरुकुल व पर्वतीय सरोवर
#328Upekkha

अननुसोचिय जातक

शोक से मुक्ति

अनित्यता के बोध से शोक से पूर्णतः मुक्त वीतरागी मुनिवाराणसी के नगर-द्वार के पास श्मशान और उद्यान
#62Paññā

अंडभूत जातक

पुरोहित की शील पर लगाई गई शर्त

राजा ब्रह्मदत्त के ज्ञानी राजपुरोहितवाराणसी राजप्रासाद
#295Paññā

अन्त जातक

आंतें खाने वाला शृगाल और शवभक्षी कौआ

कानन के न्यायनिष्ठ वन-देवता / पाखंड के भंडाफोड़कमगध की बीहड़ भूमि और मृत बैल का कंकाल
#115Sīla

अनुसासिक जातक

दूसरों को सिखाने वाली लोभी चिड़िया का अंत

धर्मनिष्ठ पक्षी-राजवाराणसी के निकट राजमार्ग से लगा वन
#1Paññā

अपण्णक जातक

सार्थवाह और राक्षसी मरुभूमि

प्रज्ञावान सार्थवाहमरुभूमि व वाराणसी
#169Mettā

अरक जातक

असीम मैत्री के आचार्य

महर्षि अरक: सार्वभौमिक मैत्री और ब्रह्मविहार के परम उपदेशकप्राचीन हिमालयी तपोवन और आभास्वर ब्रह्मलोक
#46Paññā

आरामदूसक जातक

बगीचा उजाड़ने वाले बंदर

वाराणसी के बुद्धिमान नागरिकवाराणसी राजोद्यान
#348Nekkhamma

अरण्य जातक

तपस्वी-पुत्र और चंचल मित्र

सिद्ध तपस्वी पितागहन हिमालयी वन आश्रम
#181Nekkhamma

सिंहासन को अस्वीकार करने वाला अद्वितीय धनुर्धर

असदिस जातक

राजकुमार असदृशवाराणसी
#131Mettā

सच्चे मित्र का त्याग

असम्पदान जातक

शंख श्रेष्ठी (वाराणसी कोषाध्यक्ष)वाराणसी व राजगृह राजप्रासाद
#380Khanti

आसंक जातक

कमल में जन्मी कन्या और उसका नाम

धैर्यवान एवं सत्यव्रती महातपस्वीहिमालय का कमलिनी सरोवर आश्रम और वाराणसी प्रासाद
#76Khanti

असंकीय जातक

निर्भय तपस्वी और वन के दस्यु

चंक्रमणरत वनवासी तपस्वीकाशी और सीमावर्ती बीहड़ वन
#61Paññā

असातमंत जातक

आचार्य की तृष्णा-परीक्षा

तक्षशिला के दिशापामुख आचार्यतक्षशिला गुरुकुल व वन
#100Paññā

असातरूप जातक

माता की सलाह से जीती गई घेराबंदी

कोसल का विजयी राजकुमारवाराणसी नगर के घिरे हुए द्वार
#126Paññā

असिलक्खण जातक

दो छींकें, दो नियति

विद्वान एवं विवेकशील राज-खड्गपरीक्षकवाराणसी का राज-शस्त्रागार और राजदरबार
#234Nekkhamma

असिताभू जातक

आकाश में पाई गई मुक्ति

विश्वासघात से आहत राजकुमारी को ध्यान और आकाशगामी सिद्धियों में प्रतिष्ठित करने वाले परम पूज्य तपस्वीएक वन-आश्रम और वाराणसी का खुला आकाश
#207Paññā

अस्सक जातक

शोकाकुल राजा और गोबर का कीड़ा

दिव्य-दृष्टि संपन्न हिमालयी तपस्वी महर्षिपोतलि नगर का राजोद्यान और राजमहल
#425Nekkhamma

अट्ठान जातक

असंभव बातें

विशाल संपत्ति का स्वामी श्रेष्ठी-पुत्र / त्यागी तपस्वीवाराणसी का विलास क्षेत्र, कीचड़ से भरी नाली और वन का आश्रम
#418Paññā

अट्ठसद्द जातक

आठ भयावह ध्वनियां और भय-मुक्ति

विद्वान मंत्री / अंधविश्वास निवारकवाराणसी का राजमहल, यज्ञ-भूमि और बाहरी वनक्षेत्र
#84Paññā

अत्थस्सद्वार जातक क्रमांक 84

कल्याण के छह द्वार

सद्धर्म व नीति के उपदेशक ज्ञानी पिताश्रावस्ती का समृद्ध गृहस्थ आवास
#376Paññā

अवारिय जातक

नाविक पर व्यर्थ गई प्रज्ञा

ज्ञानी हिमालयी तपस्वीवाराणसी के समीप गंगा नदी का घाट
#19Sīla

आयाचितभत्त जातक

पशु-बलि से मुक्ति नहीं मिलती

न्यग्रोध वृक्ष के अधिष्ठाता देवताकाशी राज्य का ग्राम उपवन
#347Sīla

अयकूट जातक

राजा और लौह गदा

धर्मात्मा वाराणसी नरेशवाराणसी का राजप्रासाद
#510Nekkhamma

अयोघर जातक

लौह में पाला गया राजकुमार

राजकुमार अयोघर (लौह-प्रासाद के राजकुमार)वाराणसी का भूमिगत लौह-प्रासाद एवं हिमालय
#137Paññā

बब्बु जातक

चूहिया, पत्थर तराशने वाला और चार बिल्लियाँ

गुफा के साक्षी ज्ञानी मुनिवन की स्फटिक पाषाण गुफा
#108Viriya

बाहिय जातक

संयम से चुनाव करने वाला राजा

कर्तव्यनिष्ठ राजमंत्रीकोसल राज्य, एक आलसी राजा का शासनकाल
#236Paññā

बक-ब्रह्मा जातक

बक ब्रह्मा के अहंकार और भ्रम का निवारण

शाश्वतवाद के भ्रम को नष्ट करने के लिए ब्रह्मलोक में अवतीर्ण परम प्रज्ञावान मुनिउच्च ब्रह्मलोक का देदीप्यमान सभा-भवन
#38Paññā

बक जातक

बगुला, मछलियाँ और केकड़ा

सरोवर वृक्ष-देवतावन-सरोवर व वरण वृक्ष
#405Paññā

बकब्रह्म जातक

वह तपस्वी जो अपना अतीत भूल गया

भगवान बुद्ध (अथवा पूर्वजन्म में ब्रह्मलोक के दिव्य प्रबोधक)प्रकाशमय ब्रह्मलोक और श्रावस्ती का जेतवन विहार
#201Nekkhamma

बंधनागार जातक

लोहे से भी दृढ़ बंधन

तृष्णा के अदृश्य बंधनों को भेदने वाले महात्यागी बोधिसत्ववाराणसी के कारागार के बाहर और हिमालय का शांत तपोवन
#120Sacca

बन्धनमोक्ख जातक

सत्य से मुक्ति

सत्यनिष्ठ एवं शीलवान राजपुरोहितवाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त का राजदरबार
#339Paññā

बावेरु जातक

बावेरु का कौआ और मोर

दिव्य मयूरराज जो अपने अलौकिक रूप से ढोंगियों का मानमर्दन करते हैंबावेरु (बेबीलोन) का विदेशी बंदरगाह और मणियों से जड़ा महल
#465Dāna

भद्दसाल जातक

अधिक पीड़ा मांगने वाला वृक्ष

आश्रितों की रक्षा हेतु आत्म-बलिदान देने वाले भद्रशाल वृक्ष-देवतावाराणसी का राजोद्यान और राजा का शयनकक्ष
#291Paññā

भद्रघट जातक क्रमांक 291

इच्छापूर्ति कलश

देवराज इंद्र (सक्क) / कामकुंभ प्रदाता पितावाराणसी का उपवन, मदिरालय और तावतिंस स्वर्ग
#504Paññā

भल्लटिय जातक

वनवासी राजा और विलापरत किन्नर युगल

वाराणसी के राजा भल्लटियहिमालय का गंधमादन पर्वत
#127Khanti

भंडन जातक

सिंह, वृक्ष, तथा कुल्हाड़ी

शांत एवं ज्ञानी हिमालयी ऋषिहिमालय की आश्रम घाटी और जेतवन महाविहार
#213Sīla

भरु जातक

घूस से डूबा एक राज्य

पांच सौ तपस्वियों के गुरु और धर्मनिष्ठ आश्रम-प्रमुखभरु जनपद का राजोद्यान और राजदरबार
#59Paññā

भेरिवाद जातक

ढोलवादक की संतुलित ताल

वाराणसी के कुशल भेरी-वादकडाकुओं से घिरा अरण्य मार्ग
#496Paññā

भिक्खा-परम्परा जातक

हाथ-दर-हाथ पहुँची भेंट

वनवासी मुनिवाराणसी का शाही उद्यान
#80Paññā

भीमसेन जातक

महाकाय के पीछे का धनुर्धर

चुल्ल-धनुग्गह (बौना धनुर्धर)वाराणसी व व्याघ्र-ग्रस्त राजमार्ग
#488Sīla

भिस जातक

कमल-मूल और सक्क की परीक्षा

महाकांचन मुनिहिमालय की चन्दपुक्खरा झील
#392Sīla

भिसपुप्फ जातक

कमल की गंध और वन देवी की सीख

सूक्ष्म संयमी एवं पवित्र हिमालयी तपस्वीहिमालय का शांत कमल सरोवर और जामुन का उपवन
#23Viriya

भोजाजानीय जातक

अदम्य वीर अश्व की निष्ठा

भोजाजानीय नामक अजेय अश्ववाराणसी का रणक्षेत्र
#543Sīla✨ Mahānipāta

भूरिदत्त जातक

बंदी होकर भी अटूट प्रतिज्ञा

नागकुमार भूरिदत्तयमुना तट व वाराणसी
#452Paññā

भूरिपञ्ह जातक

प्रज्ञा का महान प्रश्न

सर्वोच्च प्रज्ञा के धनी युवा महोसध पंडितमिथिला का भव्य राजदरबार और सिंह-सिंहासन
#128Paññā

बिलार जातक

पाखंडी सियार और मूषक-राज

सतर्क एवं विवेकशील मूषकराजकाशी राज्य का वनखंड और चूहों के बिल
#450Dāna

बिळारिकोसीय जातक

कंजूस और पाँच दिव्य पूर्वज

कंजूस का उद्धार करते देवराज इंद्र (शक्र)वाराणसी का सात दरवाजों वाला सुरक्षित महल और तावतिंस स्वर्ग
#336Paññā

ब्रह्मछत्त जातक

जहाँ सोना था वहाँ घास

विद्रोह और रक्तपात को नीति और धर्म में बदलने वाले परम सचिववाराणसी से सीमा की ओर जाने वाले मार्ग पर वटवृक्ष का टीला
#323Sacca

ब्रह्मदत्त जातक

मांगने में बारह वर्ष

राजोद्यान में निष्काम भाव से रहने वाले तपस्वी मुनिवाराणसी का राज-प्रासाद और सुरम्य राजोद्यान
#451Sīla

चक्रवाक जातक

वह कौवा जिसने एक हंस से ईर्ष्या की

अहिंसा और संतोष से दीप्तिमान चक्रवाक राजहिमालय की तराई का शांत कमल-सरोवर और नगर के कसाईखाने
#434Sīla

चक्कवाक जातक

भीतरी तेज पर नौ पद

पवित्र चक्रवाक राजकमलों से आच्छादित हिमालयी सरोवर व श्मशान
#324Paññā

चम्मसाटक जातक

मेढ़े का वास्तविक आशय

वाराणसी का विवेकशील और दूरदर्शी श्रेष्ठी व्यापारीवाराणसी का व्यस्त चौराहा और मुख्य हाट
#506Sīla

चम्पेय्य जातक

नागराज और शील-व्रत की रक्षा

चम्पेय्य (नागराज)चम्पा नदी, बाम्बी एवं वाराणसी राजदरबार
#485Sacca

चन्द-किन्नर जातक

सत्य-क्रिया से सिद्ध हुई निष्ठा

चन्द किन्नरहिमालय का चन्द्रपर्वत
#542Khanti✨ Mahānipāta

चन्दकुमार जातक

सत्यवादिनी पत्नी द्वारा रक्षा

राजकुमार चन्दकुमारपुष्पवती (वाराणसी)
#135Mettā

चन्दाभ जातक

चंद्र-आभा और ब्रह्मलोक की प्राप्ति

कसिण ध्यान के परम आचार्य महर्षिहिमालय का दद्दर पर्वत शिखर
#439Nekkhamma

चतुद्द्वार जातक

चार द्वार और सिर पर घूमता उस्तरे का चक्र

कर्मफल का साक्षात्कार करते हुए मित्तविन्दकवाराणसी, हिंद महासागर, कांच और स्फटिक के महल, और लोहे का नरक
#187Paññā

चतुमत्त जातक

एक मित्रता में घुसता सियार

स्वर्ण मयूरराज जिन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर श्मशानवासी सियार के 'चौथी सुंदरी' होने के पाखंड का भंडाफोड़ कियाहिमालय के सुरम्य जंगल में स्वच्छ जलधारा के किनारे विशाल जामुन का वृक्ष
#441Sīla

चतुपोसाथिक जातक

चार राजा और चतुर्विध सदाचार

उपोसथ व्रत के उपदेशक वनवासी महामुनिशांत वनस्थली, खोखला तना, बांबी और पर्वत की गुफा
#422Sacca

चेतिय जातक

संसार का प्रथम असत्य

ऋषि कपिल / सत्यवादी राजपुरोहितचेतिय देश, राजसभा का मंडप और अवीचि नरक का गर्त
#309Paññā

छवक जातक

एक चोर जिसने राजा को सुधारा

छवक / प्रज्ञावान एवं निर्भीक चाण्डाल मुनिवाराणसी का आम्रवन और राजप्रासाद की सभा
#498Paññā

चित्त-सम्भूत जातक

जन्मों के पार भाई

तपस्वी चित्तकाम्पिल्ल एवं हिमालय
#52Viriya

चूळजनक जातक

बिना किनारे के समुद्र में तैरता राजकुमार

युवा राजकुमार जनकसुवर्णभूमि का महासागर
#430Sacca

चूळशुक जातक

नन्हा शुक और कृतज्ञता की अमर परीक्षा

निष्ठावान लघु शुकराजहिमालय का सघन अरण्य और एकाकी सूखा वृक्ष
#533Sīla

चुल्ल हंस जातक

सुवर्ण हंसराज और निष्ठावान सेनापति सुमुख

धतरट्ठ (सुवर्ण हंसराज)हिमालय का चित्तकूट पर्वत एवं वाराणसी का खेमा सरोवर
#464Paññā

चुल्ल-कुणाल जातक

कोयल और मोह-माया की भ्रांति

कुणाल सरोवर पर वास करने वाले ज्ञानी कोकिलराजहिमालय का कुणाल सरोवर और आम्रकुंज
#222Mettā

चुल्लनंदिय जातक

दो पुत्र, एक माता

अपनी अंधी माता की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले चुल्लनंदियएक विशाल वटवृक्ष और वाराणसी के भस्म हुए नगर-द्वार
#477Nekkhamma

चुल्ल-नारद जातक

एक पिता का उपदेश

पुत्र को काम-वासना से बचाने वाले परम तपस्वी महर्षिहिमालय में कमल-सरोवर के निकट एकांत पर्णकुटी
#193Khanti

चुल्ल-पद्म जातक

राजकुमार पद्म और टोकरी

राजकुमार पदुम, निःस्वार्थी और क्षमाशील बोधिसत्वकाशी का निर्जन मरुस्थल और वाराणसी का राजप्रासाद
#263Nekkhamma

चुल्ल-पलोभन जातक

अपने ही पतन से मिला ज्ञान

कामोन्माद में डूबे अपने पुत्र को ज्ञान और वैराग्य के आलोक से जगाने वाले धर्मात्मा पिता-राजावाराणसी राजप्रासाद का पूर्वी झरोखा और हिमालय की शांत तपोभूमि
#525Nekkhamma

चुल्लसुतसोम जातक

एक श्वेत केश और सिंहासन का त्याग

राजा चुल्ल सुतसोमसुदस्सन नगर एवं हिमालय का दद्दर पर्वत
#443Khanti

चुल्लबोधि जातक

तपस्वी और अपहृत पत्नी

क्षांति के प्रतिमूर्त्ति शांत मुनि चुल्ललोधिवाराणसी का राजोद्यान और राजमहल के कक्ष
#358Khanti

चुल्लधम्मपाल जातक

एक माँ का शोक, एक शिशु की शांति

शिशु राजकुमार धर्मपालवाराणसी का राजमहल
#374Paññā

चुल्लधनुग्ग्रह जातक

पत्नी द्वारा घात किया गया धनुर्धर

देवराज शक्रकाशी का सघन वन और नदी तट
#4Paññā

चुल्लकसिट्ठि जातक

मृत मूषक से महाधनी बनने की गाथा

चुल्लकसिट्ठि (राजकोषाध्यक्ष)वाराणसी नगर
#536Paññā

चुल्ल-कुणाल जातक

प्रज्ञावान कुणाल पक्षी और विश्वासघाती रानी

चुल्ल-कुणाल / वन पक्षियों के ज्ञानी राजाहिमालय की सघन वनस्थली और वाराणसी का राजप्रासाद
#400Paññā

दब्भपुप्फ जातक

सियार का निर्णय

तटवर्ती वन का साक्षी प्रज्ञावान वृक्षदेवतायमुना नदी का कछार और तटवर्ती कुंज
#322Paññā

दद्दभ जातक

वह ध्वनि जिसे किसी ने परखा नहीं

अंधविश्वास और भगदड़ को शांत करने वाला विवेकी सिंहराजपश्चिमी समुद्र के निकट ताड़ और बेल का वन
#304Khanti

दद्दर जातक

दद्दर पर्वत के क्षमाशील नागराज और क्रूर ग्रामवासी

महादद्दर / दद्दर पर्वत के धैर्यशील नागराज पुत्रवाराणसी के ग्रामीण अंचल का घूरा और दद्दर पर्वत का नागलोक
#186Paññā

दधिवाहन जातक

आम का वृक्ष और भ्रष्ट करने वाली जड़ें

हिमालय के सिद्ध महर्षि जिन्होंने राजा दधिवाहन को समझाया कि कड़वे नीम और विषैली लताओं की संगति ने उनके दिव्य आम को कड़वा बना दिया हैहिमालय का शांत तपोवन और वाराणसी का शाही आनंद-उपवन
#517Paññā

दकरक्खस जातक

जल-राक्षस की नौका का प्रश्न

राजकुमार महिन्दकमायावी सरोवर एवं सघन वन
#409Sīla

दृढ़धर्मा जातक क्रमांक 409

हथिनी तथा विष्ठा-गाड़ी

वृद्ध सेवकों और पशुओं के संरक्षक न्यायप्रिय राजमंत्रीवाराणसी का राजमहल और नगर के धूल भरे मार्ग
#378Nekkhamma

दरीमुख जातक

वह मित्र जो प्रत्येकबुद्ध बना

महाराज ब्रह्मदत्त (तपस्वी राजा)वाराणसी का नंदनवन और हिमालयी तपोवन
#495Paññā

दस ब्राह्मण जातक

दस प्रकार के ब्राह्मण

विदुर पंडितकुरु देश का इन्द्रप्रस्थ
#401Paññā

दसण्णक जातक

तलवार निगलने से भी कठिन

महाराज के प्रधान परामर्शदाता महाप्राज्ञ सेनकवाराणसी का राजप्रांगण और राजसभा
#461Upekkha

दशरथ जातक

राजकुमार राम और समता का दिव्य गुण

शोक-मुक्त समता के अमर आदर्श राजकुमार राम-पंडितवाराणसी का राजप्रासाद, हिमालय का आश्रम और नगरद्वार
#6Paññā

देवधम्म जातक

जलयक्ष का प्रश्न

राजकुमार महिंससवाराणसी व यक्ष सरोवर
#391Sacca

ध्वजविहेठ जातक

तांत्रिक का अपराध, निर्दोषों का निष्कासन

सत्यनिष्ठ धर्मरक्षक राजपुरोहितवाराणसी का नंदनवन और नगर बाह्य पाखंडी का आश्रम
#457Sīla

धम्म जातक

आकाश में धर्म और अधर्म की भेंट

सदाचार व धर्म के तेजस्वी संरक्षक धर्म देवपुत्रजम्बूद्वीप का विस्तीर्ण आकाश और पाताल की ओर जाने वाली विदारिका
#220Paññā

धम्मद्धज जातक

बच्चों को खाने वाला तपस्वी

पाखंडी तपस्या का पर्दाफाश करने वाले दूरदर्शी समुद्री पक्षीराजखुले समुद्र में स्थित एक हरा-भरा मूंगा द्वीप और सफेद चट्टान
#353Sīla

धोनसाख जातक

एक राजा द्वारा अनसुनी की गई चेतावनी

वटवृक्ष के देवतापांचाल राज्य और प्राचीन पूज्य वटवृक्ष
#413Paññā

धूमकारी जातक

अजपाल ब्राह्मण और स्वर्णमृग की कथा

कुरु साम्राज्य के महाप्राज्ञ नीतिवेत्ता विधुरपंडितकुरु राज्य की राजधानी इंद्रप्रस्थ की राजसभा
#371Khanti

दीघीतिकोसल जातक

राजा को क्षमा करने वाला राजकुमार

कोसल के राजकुमार दीघावुवाराणसी का राजप्रासाद और वन
#426Paññā

दीपि जातक

बकरी की गुहार और चीते का बहाना

वृक्ष-देवता / व्यावहारिक प्रज्ञा के साक्षी देवपर्वत की तराई का जंगल, संकीर्ण चट्टानी कंगूरा और ढलुआं खाई
#116Paññā

दुब्बच जातक

हठी गुरु और पाँचवाँ भाला

प्रवीण कलाबाज़ी गुरुकाशी राज्य का एक समृद्ध नगर, वसंतोत्सव
#174Upekkha

दूभिय-मक्कट जातक

कृतघ्न वानर और देवदत्त की पहचान

परोपकारी ब्राह्मण जिन्होंने सूखे कुएं से प्यासे बंदर को निकाला और बदले में उसका उपहास व दुष्टता सहीकाशी की निर्जन मरुभूमि का मार्ग और गहरा सूखा कुआं
#180Paññā

दद्दभ जातक

खरगोश जिसने सोचा पृथ्वी फट गई (संख्या ३२२)

स्फटिक गुहा के अभय सिंहराज जिन्होंने गर्जना कर भगदड़ रोकी और गिरे हुए बेल को दिखाकर अफ़वाह का निवारण कियापश्चिमी समुद्र तट से लेकर हिमालय की तलहटी तक फैला ताड़-वन और विशाल मैदान
#122Mettā

दुम्मेध जातक

अपने ही हाथी से ईर्ष्या करने वाला राजा

आकाशगामी तेजस्वी श्वेत मंगल-गजराजराजगृह नगर और वाराणसी राज्य
#50Sīla

दुम्मेध जातक

वह संकल्प जिसने राज्य के बलिदान समाप्त किए

काशी के करुणामय धर्मराजवाराणसी का पूजित न्यग्रोध वृक्ष
#260Paññā

दूत जातक

वासना और उदर का दूत

पेट की भूख को संसार का सबसे कठोर संदेशवाहक सिद्ध कर वासनाओं पर विजय पाने का उपदेश देने वाले ज्ञानी राजावाराणसी के राजप्रासाद की भोजनशाला
#478Paññā

दूत जातक (क्रमांक 478)

शिष्य की खोई गुरु-दक्षिणा और राजा

गुरु-ऋण चुकाने हेतु स्वयं को राजा का दूत घोषित करने वाले तक्षशिला के तेजस्वी विद्वानपवित्र गंगा नदी का रेतीला घाट और राजा का शिविर
#230Paññā

पलाश जातक

ब्राह्मण और वृक्ष-देवता का वरदान

निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होकर गुप्त खजाना प्रदान करने वाले कृपालु वृक्ष-देवतावाराणसी के नगर-द्वार के बाहर एक एकाकी पुष्पित पलाश वृक्ष
#238Paññā

एकपद जातक

संपूर्ण प्रज्ञा का एक शब्द

समस्त कल्याण के मूल 'दक्षता/अप्रमाद' का उपदेश देने वाले विद्वान गृहपतिवाराणसी के एक समृद्ध भवन का प्रांगण
#149Paññā

एकपण्ण जातक

एक पत्ते की कड़वाहट

दुष्ट राजकुमार का उद्धार करने वाले सिद्ध हिमालयी ऋषिहिमालय की तपोभूमि और वैशाली नगरी
#303Khanti

अपने बंदी को क्षमा करने वाला राजा

एकराज जातक

महाराजा एकराजवाराणसी
#111Paññā

गधा, खच्चर और बुद्धिमान पुत्र का आसन

गर्दभ-पञ्ह जातक

महाप्राज्ञ पंडित महौषधमिथिला, राजा वेदेह का राजदरबार
#155Paññā

गग्ग जातक

वह छींक जिसने दो यात्रियों को बचाया

गग्ग ब्राह्मण: ज्ञानवान और धर्मपरायण पितामार्ग का वीरान विश्रामगृह और यक्ष-अधिष्ठित कूप
#199Paññā

गृहपति जातक

गृहस्थ और छली ग्राम-मुखिया

चतुर और निर्भीक कृषक गृहपति / हास्य-प्रज्ञा के धनीकाशी जनपद के एक ग्रामीण किसान का घर और अन्न-भंडार
#345Viriya

गजकुम्भ जातक

मंत्री का कछुए से प्रश्न

बुद्धिमान राजमंत्रीवाराणसी राज्य और दावाग्नि से घिरा वन
#257Paññā

गामणि-चंड जातक

एक ईमानदार किसान के चार मुकदमे

अनेक जटिल वादों और उलझे हुए मुकदमों में परम न्यायपूर्ण और चमत्कारी समाधान देने वाले धर्मपरायण राजावाराणसी का प्रधान राज-न्यायालय
#8Paññā

सदाचारी परामर्श का बल

गामणि जातक

विद्वान अमात्यवाराणसी राजसभा
#520Paññā

गण्डतिन्दु जातक

गांववालों ने जो कहा

तिन्दुक वृक्ष के देवपुत्रपांचाल का सीमान्त ग्राम एवं राजधानी
#406Nekkhamma

गन्धार जातक

वह नमक जिसे दो राजा साझा नहीं कर सके

तक्षशिला के त्यागी राजर्षि गन्धार नरेशतक्षशिला, मिथिला और हिमालय का शांत तपोवन
#421Nekkhamma

गंगमाल जातक

नाई, आधी कौड़ी और राजा

राजा उदय / त्याग के पथिक बोधिसत्ववाराणसी नगर, पुरानी दीवार का गुप्त स्थान और राजोद्यान
#205Paññā

गंगेय्य जातक

दो मछलियां और सुंदर कछुआ

पवित्र नदीतट के वृक्ष-देवता, जलीय विवादों के साक्षीगंगा और यमुना का पावन संगम तट
#219Paññā

गरहित जातक

निंदा-शिला

मानव लोभ और 'मेरे-तेरे' के पागलपन को उजागर करने वाले ज्ञानी वानरराजवाराणसी के राजमहल की सुनहरी शाला और हिमालय की अगम्य चोटियां
#454Paññā

घट जातक

घटपण्डित का राजा कान्हा हेतु शोक-निवारण

शोक-निवारक प्रबुद्ध राजकुमार घटपण्डितसमुद्रतटीय द्वारवती की सड़कें, राजमहल और रात्रि का आकाश
#355Paññā

घटपण्डित जातक

चाँद का खरगोश

राजकुमार घट (ज्ञानी अनुज)द्वारवती राजधानी
#133Paññā

घटासन जातक

वह जल जो आग बन गया

दूरदर्शी एवं प्रज्ञावान पक्षीराजकाशी राज्य में सरोवर तट पर स्थित विशाल वटवृक्ष
#427Paññā

गिज्झ जातक

क्षितिज के पार उड़ा गिद्ध राजा

विद्वान गिद्धराजगृध्रकूट पर्वत और तूफानी बादलों के ऊपर का अशांत आकाश
#399Sīla

गिज्झ जातक

अपने अंधे माता-पिता के लिए रोने वाला गिद्ध

कृतज्ञता के आदर्श गृध्रराजगृध्रकूट पर्वत और वाराणसी के निकट श्मशान भूमि
#184Paññā

गिरिदन्त जातक

वह अश्व जिसने लंगड़ाना सीख लिया

शाही परामर्शदाता जिन्होंने जांच कर पाया कि लंगड़ाने वाला अश्व बीमार नहीं, बल्कि अपने लंगड़े साईस की नकल कर रहा हैवाराणसी के राजमहल का शाही अस्तबल और घुड़दौड़ का मैदान
#350Paññā

गिरिदंत जातक

घोड़ा और लंगड़ा प्रशिक्षक

ज्ञानी राजमंत्रीवाराणसी का राजमहल और अश्वशाला
#333Paññā

गोधा जातक

गिरगिट का प्रतिशोध

अपनी प्रजा की रक्षा करने वाले दूरदर्शी गोधराजपहाड़ी की तलहटी में बरगद के नीचे भूमिगत बिल
#325Paññā

गोध जातक क्रमांक 325

पाखंडी तपस्वी

बुद्धिमान गोहराजतपोवन आश्रम व गोह का बिल
#366Paññā

गुम्बिय जातक

वन-मार्ग पर रखा विषैला मधु

सार्थवाह (व्यापारी दलपति)मायावी विषैला वन
#157Sacca

गुण जातक

वह सिंह जिसने एक सियार को बंधु कहा

कृतज्ञता और मित्रता के पालक वनराज सिंहपर्वत का दलदल और सिंह की शैल-गुहा
#227Paññā

गूथपान जातक

योग्य उत्तर

अहंकारी कीट की दुर्गति का साक्षी प्रज्ञावान वृक्ष-देवतागोबर के ढेर के समीप एक वन-खंड
#243Paññā

संगीत गुरु और कृतघ्न शिष्य

गुत्तिल जातक

तारहीन वीणा से भी दिव्य नाद उत्पन्न कर देवकन्याओं को नचाने वाले संगीत-सम्राट गुत्तिलवाराणसी का राजकीय संगीत-मण्डप
#435Paññā

हलिद्दिराग जातक

वह रंग जो धुल जाता है

मार्गदर्शक प्रबुद्ध वनस्थ तपस्वीहिमालय का शांत आश्रम और कोलाहलपूर्ण नगर
#502Sīla

हंस जातक

सुवर्ण हंसराज और निष्ठावान सेनापति सुमुख

धतरट्ठ (सुवर्ण हंसराज)मानुसिय सरोवर एवं वाराणसी राजप्रासाद
#431Sacca

हरित जातक

वह स्वीकृति जिसने एक ऋषि को पुनर्स्थापित किया

तपस्वी महर्षि हारितवाराणसी का राजकीय उद्यान और हिमालय की गुहा
#239Paññā

हरितमाता जातक

हरे मेंढक का घायल सर्प को उत्तर

शक्ति की नश्वरता और विपत्ति में क्षमा-धैर्य का उपदेश देने वाले ज्ञानी जल-देवतावाराणसी के समीप बांस के जालों से युक्त कमलों का दलदल
#509Nekkhamma

हत्थिपाल जातक

पहले से निश्चित एक त्याग

हत्थिपालवाराणसी व गंगा आश्रम
#363Sacca

हिरि जातक

सीमांत व्यापारी और लुटा हुआ काफ़िला

श्रेष्ठि (धनी व्यापारी)वाराणसी का वाणिज्य नगर
#78Dāna

इल्लीस जातक

नाई जो दोनों में भेद न कर सका

इंद्र (शक्र)राजगृह (मगध)
#161Paññā

इन्दसमानगोत्त जातक

तपस्वी और उसका पालतू हाथी

पाँच सौ तपस्वियों के गुरु एवं मार्गदर्शक महर्षिहिमालय का सघन तपोवन और पर्णकुटी
#423Paññā

इन्द्रिय जातक

नारद और अनियंत्रित इंद्रियों का संकट

हिमालय के ऋषि-प्रमुख / तपस्वी गुरुहिमालय का आश्रम, वाराणसी का राजोद्यान और नगर की वीथियां
#414Viriya

जागर जातक

जागरूक तपस्वी और वृक्ष-देवता

अप्रमत्त एवं पराक्रमी सार्थवाह (काफिला प्रमुख)मगध और वाराणसी के मध्य स्थित निर्जल मरुभूमि और दस्यु-वन
#294Paññā

जम्बू-खादक जातक क्रमांक 294

परस्पर चापलूसी

जामुन वृक्ष के न्यायप्रिय और तत्वदर्शी वृक्ष-देवतावाराणसी के निकट सघन जामुन का वन
#335Paññā

जम्बुक जातक

वह सियार जो सियार बनकर नहीं रहा

स्वर्ण गुफा में रहने वाले उदार एवं पराक्रमी केसरी सिंहराजहिमालय की स्वर्ण गुहा और ऊंची चट्टान
#468Sīla

जनसंध जातक

वह राजा जो पूर्णिमा पर उपदेश देता था

महादान और सदाचार से प्रजा का पालन करने वाले धर्मराज जनसंधवाराणसी की छह विशाल दानशालाएं, राजप्रांगण और कारागार
#256Paññā

जरूदपान जातक

वह खज़ाना जो पर्याप्त होना चाहिए था

अतृप्त लोभ से पुराने कूप को खोदकर विषधर नागों को जाग्रत करने से रोकने वाले दूरदर्शी सार्थवाहप्राचीन परित्यक्त कूप के समीप का निर्जन मरुस्थल
#476Paññā

जवन-हंस जातक

बाण से भी तेज़

नब्बे हजार स्वर्ण हंसों के चक्रवर्ती जवन-हंसहिमालय का चित्रकूट पर्वत और वाराणसी राजप्रासाद की छत
#308Upekkha

जवसकुण जातक

वह कठफोड़वा जिसने कोई पुरस्कार नहीं चाहा

जावसकुण कठफोड़वाहिमालय वनखंड
#513Sacca

जयद्दिस जातक

राक्षस जो राजकुमार का खोया कुटुंबी था

राजकुमार अलीनसत्तुकम्पिलकोट्ट वन एवं पांचाल राजदरबार
#134Paññā

ध्यानशोधन जातक क्रमांक 134

न संज्ञा न असंज्ञा

सर्वज्ञ एवं समाधि-सिद्ध हिमालयी महर्षिहिमालय का शांत पर्वतीय आश्रम
#456Sacca

जुण्ह जातक

वह वचन जो आनंद ने जीवनभर सहेजा

सत्यवादी एवं वचन के पक्के राजा राजकुमार जुण्हतक्षशिला की अंधकारमय गली और वाराणसी का राजसिंहासन कक्ष
#417Paññā

कच्चानि जातक

मृत धर्म को अर्पण करने वाली माता

विद्वान नीतिवेत्ता व पारिवारिक परामर्शकवाराणसी का आवासीय क्षेत्र और पारिवारिक प्रांगण
#215Paññā

कच्छप जातक क्रमांक 215

वाचाल कछुआ

वाणी-संयम के महत्व का उपदेश देने वाले विद्वान राज-परामर्शदाताहिमालय का उच्च सरोवर और वाराणसी के राजमहल का प्रांगण
#273Paññā

कच्छप जातक 273

तापस की पहेली तथा उद्दंड वानर

न्यायप्रिय और नीति-निपुण राज-परामर्शदाता मंत्रीवाराणसी के राजोद्यान का सुरम्य नदी तट
#178Nekkhamma

कच्छप जातक

वह कछुआ जिसने जाना नहीं चाहा

कुम्हार जिन्होंने सूखे तालाब से न भागने वाले कीचड़ में दबे कछुए को देखकर संसार को मोह-त्याग का अमर उपदेश दियावाराणसी में भीषण सूखे के दौरान एक गाँव के जलाशय का सूखा हुआ कीचड़
#395Sīla

काक जातक

बीमारी का बहाना बनाने वाला कौआ

सात्विक और संतोषी कपोतवाराणसी का राजमहल भोजनालय और वन
#395Upekkha

काक जातक

समुद्र खाली करने की चेष्टा करते कौवे

अनित्यता के बोध से शोक हरने वाले दयालु काकराजदक्षिणी समुद्र का तूफानी तट, चट्टानी कगार और सघन अंतर्देशीय वन
#170Paññā

ककण्टक जातक

महोसध के दरबार का गिरगिट

वाराणसी के बुद्धिमान प्रधान अमात्य (मानव-स्वभाव के मर्मज्ञ)वाराणसी का मुख्य नगर-तोरण और राजपथ
#327Paññā

काकाति जातक

संगीतकार जो दूत बन गया

राजदरबार के चतुर वीणावादक एवं मुख्य गायक नटकुवेरसमुद्र पार सेरुम द्वीप में शाल्मली वृक्ष का गुप्त धाम
#326Sacca

कक्कारु जातक

वह माला जो नकली नहीं हो सकती थी

वार्षिक उत्सव में प्रकट होने वाले तेजस्वी दिव्य देवपुत्रवाराणसी का विशाल उत्सव-प्रांगण और आकाश
#267Viriya

कक्कट जातक

वह कर्कट जो चापलूसी से वश में हुआ

सरोवर के दैत्य केकड़े का संहार कर समस्त गज-यूथ को अभयदान देने वाले श्वेत गजराज बोधिसत्वहिमालय के गहन वन में स्थित रहस्यमयी कण्णमुण्ड सरोवर
#329Khanti

कालबाहु जातक

वह तोता जो प्रतीक्षा कर सकता था

धैर्यवान और नीतिज्ञ ज्येष्ठ शुकराजवाराणसी के राजमहल का अंतःपुर और स्वर्ण पिंजरा
#83Sacca

कालकण्णि जातक

'अनलकी' मित्र और सच्ची निष्ठा की विजय

दूरदर्शी श्रेष्ठी / निष्ठावान मित्र का संरक्षकवाराणसी में महाश्रेष्ठि का भव्य भवन
#176Paññā

कलायमुट्ठि जातक

वह बंदर जिसने अपनी मुट्ठी गिरा दी

राज-पुरोहित जिन्होंने एक गिरे हुए दाने के पीछे मुट्ठी भर मटर गँवाने वाले बंदर का उदाहरण देकर राजा को विनाशकारी युद्ध से रोकासीमांत विद्रोह दबाने निकली शाही सेना का पड़ाव
#479Sīla

कालिंग-बोधि जातक

आनंद ने बोधिवृक्ष क्यों रोपा

बोधिमंडल की महिमा प्रकट करने वाले ज्ञानी पुरोहित कालिंग-भारद्वाजबोधगया का महाबोधिवृक्ष प्रांगण और कालिंग राज्य
#171Nekkhamma

कल्याणधम्म जातक

भूली-सुनी बात से बना संन्यासी

वाराणसी का सदाचारी व्यापारी-पुत्र, जो एक शुभ वचन को सत्य करने हेतु वन-तपस्वी बनावाराणसी का गृहस्थ-जीवन तथा हिमालय वन की पत्ते की कुटिया
#467Nekkhamma

काम जातक

किसान की बाढ़ और लालची राजा

तृष्णा के मानसिक ज्वर का आध्यात्मिक उपचार करने वाले परम महावैद्यवाराणसी का राजमहल और राजा का रुग्ण शयनकक्ष
#297Nekkhamma

काम-विलाप जातक

शूली पर चढ़े व्यक्ति का पत्नी को संदेश

हिमालयी सिद्ध तपस्वी / आकाशगामी ऋद्धिवान महर्षिवाराणसी के दक्षिणी नगर-द्वार के बाहर स्थित वध्यभूमि
#228Nekkhamma

कामनीत जातक

लोभ की दासता से मुक्त हुआ राजा

धर्मोपदेश से आंतरिक तृष्णा-ज्वर का शमन करने वाले आध्यात्मिक वैद्य व परामर्शदातावाराणसी के एक भव्य भवन का रुग्ण-कक्ष
#318Nekkhamma

कणवेर जातक

एक प्रेम जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता था

पराक्रमी दस्यु / काम-जाल को काटकर संन्यासी बने बोधिसत्वगणिका सामा का विलास-भवन और कनेर का एकांत उपवन
#56Viriya

कंचनक्खन्ध जातक

टुकड़ों में बँटी सोने की सिल्ली

धार्मिक कृषकवाराणसी के समीप कृषि-क्षेत्र
#210Paññā

कण्डगलक जातक

कठफोड़वा और खदिर वन

खदिरवणिय, खैर के वनों में कुशल और विवेकशील काष्ठकुट्टकउत्तर भारत का खैर और शीशम का सघन वन
#341Paññā

कंडरी जातक

रानी, विकृत व्यक्ति और जामुन का पेड़

किन्नर तपस्वी / ज्ञानी ऋषिवाराणसी राज्य और हिमालयी आश्रम
#13Paññā

कण्डिन जातक

हिरण, हिरणी और शिकारियों का जाल

पर्वतीय प्रज्ञावान मृगराजमगध की पर्वतीय उपत्यकाएँ
#29Viriya

कण्ह जातक

पांच सौ गाड़ियां खींचने वाले काले बैल की कृतज्ञता

कृष्ण (कन्ह) महाबली वृषभवाराणसी महामार्ग की कीचड़ भरी धारा
#440Khanti

कण्ह जातक

वह ऋषि जिनके शील से शक्र का आसन हिला

तपोधन कृष्ण मुनि (कण्ह)हिमालय की तराई का वन आश्रम और तावतिंस देवलोक
#444Sacca

कण्हदीपायन जातक

सत्यक्रिया और साँप का विष

सत्यक्रिया के ज्ञाता कण्हदीपायन मुनिकाशी का सघन वन आश्रम, रेतीला आंगन और बांबी
#250Paññā

कपि जातक

साधु वेश धारण करने वाला वानर

बाह्य पाखंड का पर्दाफाश कर अंतःकरण की शुद्धि का उपदेश देने वाले हिमालयी महर्षितूफानी हिमालयी वन में स्थित आश्रम का गर्म ध्यान-कक्ष
#404Sīla

कपि जातक

वह बंदर जिसने एक वस्त्र उधार लिया

हिमालय के पर्णकुटीर में साधनारत परम संयमी तापसशीतकालीन ओलावृष्टि में हिमालय का तपोवन
#42Sīla

कपोत जातक

कपोत जिसने लोभी कौए को चेताया

सदाचारी पवित्र कपोतवाराणसी राजपाकशाला
#375Sīla

कपोत जातक

संयमी कबूतर और पेटू कौआ

संयमी और प्रज्ञावान कबूतरवाराणसी राजप्रासाद की पाकशाला
#105Paññā

कारण्‍डिय जातक

पृथ्वी समतल करने निकला चतुर शिष्य

करण्डिय नामक प्रबुद्ध शिष्यतक्षशिला का पर्वतीय पथ
#221Sīla

कासाव जातक

हाथियों का राजा और पीला चीवर

पीत वस्त्र के सम्मान में अपने ही हत्यारे को क्षमा करने वाले हिम-श्वेत गजराजहिमालय की सुगंधित घाटी और संकरा पथरीला मार्ग
#312Paññā

कस्सपमंडिय जातक

वह पुत्र जो पिता को घर ले आया

युवा तपस्वी कश्यप / शोक-शल्याहर्ता ज्ञानी पुत्रहिमालय की तलहटी में स्थित एकांत पर्णकुटी
#125Paññā

कटाहक जातक

वह प्रणाम जिसने एक रहस्य छिपाया

वाराणसी के उदार एवं नीतिज्ञ श्रेष्ठीवाराणसी का श्रेष्ठी-भवन और सीमांत व्यापारिक नगर
#7Sacca

कट्ठहारि जातक

लकड़हारिन का पुत्र और राजा की अँगूठी

काष्ठहारी का राजकुमार पुत्रवाराणसी राजप्रासाद व उपवन
#293Paññā

काय-विच्छिन्द जातक

रोगी जो तपस्वी बन गया

तक्षशिला-स्नातक मुख्य राजवैद्य और तत्वदर्शी परामर्शदातावाराणसी का राजमहल-चिकित्सालय और जेतवन महाविहार
#202Paññā

केळिसील जातक

वृद्धों का उपहास करने वाला राजा

देवराज शक्र, जर्जर गाड़ी हांकते कंपकंपक वृद्ध के रूप मेंवाराणसी के राजमहल का भव्य झरोखा और मुख्य राजपथ
#346Mettā

केशव जातक

मैत्री-भोज और जंगली चावल

ऋषि कप्प (निष्ठवान तपस्वी शिष्य)हिमालयी आश्रम और वाराणसी का राजमहल
#40Dāna

खदिरंगार जातक क्रमांक 40

अग्नि-गड्ढे पर कदम

वाराणसी के महासेठवाराणसी श्रेष्ठी का प्रांगण
#364Paññā

खज्जोपनक जातक

महोषध के दरबार की जुगनू-पहेली

वृक्ष-देवताकोसल का वर्षा-वन
#203Mettā

खन्धवत्त जातक

सर्पों के प्रति मैत्री

विश्व-मैत्री के खंध-परित्त का उपदेश देने वाले तपोवन-प्रमुख महर्षिहिमालय की तलहटी में स्थित गहन अरण्य और तपोवन
#225Khanti

क्षांति-वन्नना जातक

राजा की शांत भर्त्सना

क्षमा और तितिक्षा की महिमा का उपदेश देने वाले विद्वान राज-परामर्शदातावाराणसी का राज-दरबार
#313Khanti

क्षमा के तपस्वी

क्षान्तिवादी जातक

क्षान्तिवादी मुनिवाराणसी का राज उद्यान
#15Sīla

खरादिया जातक

वह भांजा जिसने अपने पाठ छोड़े

मृग-नीति सिखाने वाले मृग प्रमुखमगध का अरण्य
#386Paññā

खरपुत्त जातक

दिव्य विद्या और विवेकशील नरेश

धर्मरक्षक प्रबोधक देवराज शक्र (अथवा विवेकशील सेनक नरेश)वाराणसी का राजप्रासाद और श्मशान मार्ग
#265Viriya

खुरप्प जातक

वह जो भागने को तैयार नहीं था

पांच सौ डाकुओं को अकेले अपने अदम्य शौर्य और तीक्ष्ण खुरप्प बाणों से खदेड़ने वाले महाधनुर्धरवाराणसी के महावन में डाकुओं से आक्रांत भयानक घाटी
#511Sīla

किंछंद जातक

वह भ्रष्ट पुरोहित जिसने अपना ही मांस खाया

तपस्वी मुनितप्त अंगारों की वैतरणी एवं हिमालयी आश्रम
#85Paññā

किम्पक्क जातक

वह फल जो आम जैसा दिखता था

प्रज्ञावान् सार्थवाहप्राचीन व्यापारिक बीहड़ वन
#248Paññā

किंशुकोपम जातक

एक ही वृक्ष तक चार मार्ग

खंडित दृष्टिकोणों को समन्वय कर समग्र सत्य का बोध कराने वाले परम ज्ञानी राजावाराणसी के शाही उद्यान और सघन अरण्य
#331Khanti

कोकालिक जातक

वह कोयल जिसने बहुत जल्दी बोल दिया

समयोचित दृष्टांतों से राजा को सिखाने वाले ज्ञानी मंत्रीवाराणसी के राजोद्यान में आम्रकुंज
#299Sīla

कोमायपुत्त जातक

वह बंदर जिसने ध्यान सीखा

आचार्य कोमायपुत्त / विंध्याचल आश्रम के सिद्ध तपोनिधिविंध्याचल पर्वत की तलहटी में स्थित शांत पर्णशाला-आश्रम
#428Khanti

कोसंबि जातक

कौशाम्बी के भिक्षुओं का विवाद और दीर्घायु की क्षमा

कौशाम्बी के धर्मपरायण राजा व शांतिदूतकौशाम्बी का राजमहल और आम्रवन
#226Paññā

कोसिय जातक

वह उल्लू जो बहुत जल्दी निकला

काल और अवसर के यथार्थ ज्ञान का उपदेश देने वाले ज्ञानी राज-परामर्शदाताएक विशाल वटवृक्ष और वाराणसी का राजोद्यान
#470Paññā

कोसिय जातक

वह कंजूस जिसे शक्र ने दान सिखाया

पारिवारिक षड्यंत्र और विश्वासघात का पर्दाफाश करने वाले मुख्य धर्माधिकारीधनी ब्राह्मण का आवास, न्यायालय और वाराणसी की वीथियां
#412Paññā

कोटिसिम्बलि जातक

वृक्ष-देवता जो एक छोटे पक्षी से डरी

विशाल सेमर वृक्ष के अधिष्ठाता विवेकवान देवहिमालय के वन में ऊँचा उठा एक विशाल सेमर वृक्ष
#70Nekkhamma

कुद्दाल जातक

तापस और उसकी कुदाल

कुद्दाल पंडित (त्यागी मुनि)गंगा तट व राज शिविर
#89Paññā

कुहक जातक

तिनके के प्रति सजग, सोने के प्रति असावधान

पाखंड को उजागर करने वाले बुद्धिमान गृहपतिवाराणसी की सीमा और वनमार्ग
#396Sacca

कुक्कु जातक

एक राजा के लिए तीन दृष्टांत

न्यायनिष्ठ राजपुरोहित एवं नीतिविज्ञ प्रधान अमात्यवाराणसी का राजप्रासाद और न्याय-सभा
#22Mettā

कुक्कुर जातक

वह शिक्षा जो दस हज़ार वर्ष तक टिकी

कुक्कुरराज (न्यायप्रिय श्वानराज)वाराणसी महाश्मशान व राजसभा
#209Paññā

कुक्कुट जातक

वह मुर्गा जिसने बिल्ली की चाल पहचान ली

सजग वन्य कुक्कुटराज, कपटी मित्रता को पहचानने वालेवाराणसी के समीप एक सघन बांस का कुंज और ऊंचा वृक्ष
#448Paññā

कुक्कुट जातक

बुद्धिमान मुर्गा और कपटी बाज़

चतुर और सतर्क जंगली मुर्गा (कुक्कुट राज)मगध देश का सघन बांस का झुरमुट और घना वन
#383Paññā

कुक्कुट जातक

चतुर मुर्गा और चापलूस बिल्ली

वृक्ष की ऊंची शाखा पर रहने वाला चतुर वन कुक्कुटकौशाम्बी के निकट सघन वन और विशाल वृक्ष
#31Mettā

कुलावक जातक

मचल के युवा समाज-सुधारक और असुरों का पराभव

मघ कुमार / देवराज शक्रमचल ग्राम व त्रायस्त्रिंशा स्वर्ग
#512Paññā

कुम्भ जातक

वह घड़ा जो शक्र एक राजा के पास लाए

सक्क (देवेन्द्र शक्र)श्रावस्ती के राजप्रासाद का आकाश मण्डल
#408Nekkhamma

कुम्भकार जातक

प्रतीक्षा करने वाला कुम्हार

सदाचारी कुम्हार जो सत्य का श्रवण कर त्यागी बनावाराणसी के बाहर कुम्हारों की बस्ती और हिमालय का वन
#224Paññā

कुम्भील जातक

चार सद्गुण और शिला पर घात

चार अजेय सद्गुणों (सत्य, प्रज्ञा, धृति, त्याग) से संपन्न अनुपम वानरराजगंगा की तीव्र धारा, नदी के मध्य की शिला और गूलर के वृक्षों वाला द्वीप
#415Dāna

कुम्मासपिण्ड जातक

दान किया गया एक नाश्ता

सत्यनिष्ठ महाधर्माध्यक्ष (न्यायाधीश)प्राचीन वाराणसी का उपनगर और श्रावस्ती का राजोद्यान
#536Paññā

कुणाल जातक

कोकिलराज कुणाल और आसक्ति-मुक्ति का उपदेश

कुणाल (कोकिलराज)उत्तर हिमालय का कुणाल सरोवर एवं गंधमादन पर्वत
#254Viriya

कुण्डक-कुच्छि-सिन्धव जातक

चावल-चूर्ण पर पला बछेड़ा

कणिका-कुण्डक खाकर पले सिन्धुदेशीय अश्व के अव्यक्त सामर्थ्य को पहचानने वाले राज-अश्वपरीक्षकवाराणसी का अश्व-बाजार और राज-अश्वशाला
#109Dāna

कुण्डकपूव जातक

वह केक जिसे कोई देने योग्य नहीं मानता था

अरंड वृक्ष के दयालु देवतावाराणसी, वन-देवता उत्सव के अवसर पर
#343Paññā

कुन्तनी जातक

वह बगुला जो समाधान को स्वीकार नहीं कर सका

बुद्धिमती कुररी पक्षीवाराणसी का राजोद्यान
#276Sīla

कुरुधम्म जातक

वर्षा लाने वाले व्रत

कुरुराज धनंजयइंद्रप्रस्थ (कुरु राज्य)
#21Viriya

कुरुंग जातक

वन के तीन निष्ठावान मित्रों की कथा

कुरुंग नामक कुलीन मृगसघन वन व सरोवर
#206Viriya

कुरुंगमिग जातक

वह मित्र जो लौट गया

कुरुंग मृग, वनचर त्रयी के निष्ठावान मित्रमगध जनपद का एक सघन वन और सरोवर का तट
#531Viriya

हार न मानने वाला कुरूप राजा

कुश जातक

महाराजा कुशकुशावती व मद्र राज्य
#121Mettā

कुशनाली जातक

ध्यान से परे एक मित्र

निष्ठावान एवं बुद्धिमान कुश-गुल्म देवतावाराणसी का मनोरम राज-उद्यान
#218Paññā

कूटवाणिज्य जातक

लोहा खाने वाले चूहे

व्यंग्यात्मक न्याय से छल का पर्दाफाश करने वाले मुख्य धर्माध्यक्षवाराणसी के व्यापारिक बाजार और राज-न्यायालय
#98Sacca

कूटवाणिज जातक

वह आवाज़ जो एक खोखले वृक्ष से आई

सत्यवादी श्रेष्ठी पंडितवाराणसी के बाहर प्राचीन वट-वृक्ष
#321Khanti

कुटिदूसक जातक

घोंसला उजाड़ने वाला वानर

वर्षा से सुरक्षित घोंसले में रहने वाला ज्ञानी सिङ्गिला पक्षीमूसलाधार मानसूनी वर्षा में हिमालय का सघन वन
#287Nekkhamma

लाभ-गरह जातक

लाभ को ठुकराने वाला शिष्य

हिमालय के पाँच सौ ऋषियों के पूज्य आचार्य व कुलगुरुहिमालय का एकांत तपोवन और काशी के कोलाहलपूर्ण व्यापारिक नगर
#11Sīla

लक्खन जातक

ज्ञान तथा मूर्खता के दो मृग

लक्षण नामक बुद्धिमान मृग प्रमुखमगध के वन व सस्य क्षेत्र
#357Paññā

लटुकिका जातक

वह बटेर जिसने पराजय स्वीकार नहीं की

हाथियों के झुंड का धर्मात्मा नायकहिमालय की तलहटी का वन और पहाड़ी चट्टान
#91Paññā

लित्त जातक

विषैले पासे और धूर्त जुआरी

कपटी जुआरी का सुधार करने वाले चतुर खिलाड़ीप्राचीन वाराणसी की द्यूतशाला
#314Paññā

लोहकुम्भी जातक

नरक की चार ध्वनियां

राजगुरु बोधिसत्व / सार्वभौमिक अहिंसा के उद्गातावाराणसी का राजप्रासाद और महायज्ञ की वेदी
#274Paññā

लोल जातक

लोलुप कौआ और राजसी रसोई

संयमी और संतोषी कपोत (जंगली कबूतर)वाराणसी में एक उदार श्रेष्ठी की विशाल रसोई
#94Upekkha

लोमहंस जातक

आत्म-पीड़न को परखने वाला तापस

चतुरंग तपस्वी मुनिश्मशान और बीहड़ वन
#433Nekkhamma

लोमसकस्सप जातक

तपस्वी का मोह और पशुबलि का परित्याग

तपस्वी महर्षि लोमसकश्यपयज्ञशाला और हिमालय का शांत तपोवन
#41Sīla

लोसक जातक

वह भिक्षु जिसकी ईर्ष्या युगों तक उसका पीछा करती रही

पाँच सौ शिष्यों के महान आचार्यतटीय मछुआरा ग्राम व जेतवन
#75Sacca

अच्छ जातक

सत्य-क्रिया से वर्षा कराने वाले मत्स्य-राज

मत्स्यराज (सत्यव्रती मछली)श्रावस्ती का सूखता सरोवर
#34Nekkhamma

मच्छ जातक

कामांध मत्स्य और मछुआरे का जाल

प्राणियों के मर्म को जानने वाले ज्ञानी राजपुरोहितवाराणसी के बाहर पवित्र नदी का स्नान-घाट और रेतीला तट
#534Mettā

हंस जातक

एक उप-प्रमुख जो भागा नहीं

धृतराष्ट्र (हंसराज)चित्तकूट सरोवर व वाराणसी
#469Viriya

महा-कण्ह जातक

महा-कृष्ण श्वान और धर्म का शंखनाद

पापियों के दलन हेतु गर्जना करने वाले महाकाय कृष्ण श्वान महा-कण्हवाराणसी के नगरद्वार, मुख्य राजमार्ग और राजसभा
#453Paññā

महामंगल जातक

तपस्वी रक्खित और सच्चे शुभ संकेत

महामंगल के उपदेशक मुनि प्रवर रक्खितहिमालय का पावन वन शिखर और जम्बूद्वीप के विवादित सभागार
#491Paññā

महा-मोर जातक

स्वर्णिम मयूर और शिकारी की करुणा

स्वर्ण मयूरराजहिमालय का दण्डक पर्वत
#472Khanti

महा-पदुम जातक

राजकुमार पदुम और निष्कलंक चरित्र की विजय

कमल के समान निष्कलंक एवं क्षमा की प्रतिमूर्ति राजकुमार महापदुमचोर-प्रपात मृत्यु-शिला, पाताल नागमहल और हिमालय का आश्रम
#507Nekkhamma

महा-पलोभन जातक

काम-वासना से विरक्त राजकुमार

राजकुमार अनिट्ठिगन्धवाराणसी राजप्रासाद एवं हिमालय
#264Paññā

महा-पनाद जातक

नदी से उठाया गया प्रासाद

स्वर्ण-प्रासाद के असीम वैभव के बीच राजा को संसार की असारता और धर्म-शांति का उपदेश देने वाले महाज्ञानी सुरुचिपवित्र गंगा नदी से प्रकट हुआ सात सौ शिखरों वाला अलौकिक स्वर्ण-प्रासाद
#486Paññā

महा-उक्कुस जातक

बाज का मित्रों का संघ

महा-उक्कुस बाज़मित्तगद्धक सरोवर
#493Paññā

महा-वाणिज्य जातक

अत्यधिक देने वाला वृक्ष

सार्थवाह प्रमुखमरुस्थल का वटवृक्ष
#528Paññā

महाबोधि जातक

तपस्वी और पाँच मिथ्या मत

संन्यासी महाबोधिवाराणसी का राजोद्यान एवं राजसभा
#447Sīla

महाधर्मपाल जातक

वह कुल जहाँ अकाल मृत्यु नहीं होती

अकाल मृत्यु से मुक्त कुल के तेजस्वी धर्मपालकाशी का धर्मपाल गांव और तक्षशिला विश्वविद्यालय
#539Viriya✨ Mahānipāta

जलपोत-भंग राजकुमार जिसने धैर्य नहीं छोड़ा

महाजनक जातक

राजकुमार महाजनकमिथिला व विशाल सागर
#407Khanti

महाकपि जातक

धोखा खाकर भी मार्गदर्शन

हिमालय के महाबली एवं परम क्षमाशील वानरराजहिमालय का साठ हाथ गहरा भयानक खड्ड और वाराणसी की सीमा
#544Upekkha✨ Mahānipāta

महानारदकस्सप जातक

रुजा और ब्रह्मा नारद

महा नारद काश्यप (ब्रह्मा)मिथिला (विदेह)
#51Khanti

जीवित दफनाया गया राजा

महासीलव जातक

महाराजा महाशीलववाराणसी
#95Upekkha

महासुदस्सन जातक

एक महान राजा के अंतिम क्षण

चक्रवर्ती सम्राट महासुदर्शनदिव्य राजधानी कुशावती (कुशीनगर)
#429Sacca

महासुक जातक

वह तोता-राजा जो नहीं गया

कृतज्ञ महान शुकराजगंगा तट और सूखा हुआ वट वृक्ष
#77Paññā

महासुपिन जातक

राजा प्रसेनजित के सोलह महान स्वप्न

सुलक्षण ज्ञानी राजपुरोहित / स्वप्न व्याख्याताश्रावस्ती का कोसल राजमहल
#240Paññā

महावाणिज्य जातक

लोभी व्यापारी तथा इच्छापूर्ति वृक्ष

जीवनदाता कल्पवृक्ष के प्रति कृतज्ञता और संतोष का उपदेश देने वाले धर्मनिष्ठ सार्थवाहमरुस्थल के जलते टीलों के मध्य एक विशाल अलौकिक वटवृक्ष
#26Sīla

महिलामुख जातक

सत्संगति से सुधरा राजसी हाथी

नीति-कुशल राज अमात्यवाराणसी राज हस्तिशाला
#278Khanti

प्रतिशोध न लेने वाला भैंसा

महिष जातक

महिष (जंगली भैंसा)हिमालय की तराई
#546Paññā✨ Mahānipāta

महोसध जातक

बुद्धि से साम्राज्य को मात देने वाला बालक

पंडित महौषधमिथिला व उत्तरपांचाल
#45Paññā

मकस जातक

बढ़ई का मूर्ख पुत्र और मच्छर

वाराणसी के बुद्धिमान श्रेष्ठीवाराणसी के बाहर बढ़ई-ग्राम
#9Nekkhamma

मखादेव जातक

पहला श्वेत केश और संन्यास

राजा मखादेवमिथिला व मखादेव आम्रवन
#173Paññā

मक्कट जातक

मृत तपस्वी के वस्त्र में बंदर

ज्ञानी तपस्वी जिन्होंने मृत तापस की छाल ओढ़कर ढोंग कर रहे ठिठुरते बंदर का भंडाफोड़ कियाकड़ाके की शीतकालीन वर्षा में हिमालय का तपोवन
#17Paññā

मालुत जातक

ठंड, वायु और चंद्रमा का विवाद

हिमालय का ज्ञानी तपस्वीहिमालय की तलहटी में गुहा
#315Sacca

मांस जातक

वाणी का माधुर्य और चार मित्रों का उपहार

सुजात / वाराणसी के मधुरभाषी श्रेष्ठी पुत्रवाराणसी के उपवन के बाहर धूल-धूसरित राजमार्ग
#258Nekkhamma

मान्धातु जातक

वह राजा जो कभी संतुष्ट न हुआ

चारों द्वीपों और देवलोक के ऐश्वर्य से भी अतृप्त रहकर अंततः वासना के अंत की शिक्षा देने वाले चक्रवर्ती सम्राट मान्धातासंसार के चारों द्वीप और तावतिंस स्वर्ग की सुधर्मा सभा
#87Paññā

मंगल जातक

चूहों का कुतरा हुआ वस्त्र

दिशाप्रमोक्ष तक्षशिला के आचार्यतक्षशिला महाविश्वविद्यालय
#194Sacca

मणिचोर जातक

कलंकित पति और राजा

सुजात (सदाचारी गृहस्थ)वाराणसी राजोद्यान व दक्षिण द्वार
#253Paññā

मणिकंठ जातक

नागराज मणिकंठ और गले की जादुई मणि

नागराज के अत्यधिक स्नेह से उत्पन्न संकट से छोटे भाई की रक्षा करने वाले विवेकशील ज्येष्ठ तपस्वीपवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित पर्णकुटी
#351Khanti

मणिकुण्डल जातक

रत्नजड़ित कुण्डल और क्षमाशील राजा

मिथिला के धर्मात्मा राजामिथिला राज्य और भूमिगत कालकोठरी
#285Paññā

मणिसूकर जातक

वह स्फटिक जिसे दाग नहीं लग सका

स्फटिक गुफा में ध्यानमग्न परम वीतराग महर्षिहिमालय की तलहटी में स्फटिक शिला और कीचड़ का दलदल
#397Paññā

मनोज जातक

पराक्रमी सिंह और धूर्त गीदड़

पर्वतशिखर का मर्यादापालक वृद्ध सिंहराजपर्वत की स्फटिक गुफा और वाराणसी की सीमा
#18Paññā

मतकभत्त जातक

हँसता और रोता बकरा

वृक्ष-देवतावाराणसी व वन खंड
#497Sīla

मातङ्ग जातक

अस्पृश्य मुनि और अभिमानी कन्या

मातङ्ग (चाण्डाल मुनि)वाराणसी एवं वन-आश्रम
#317Paññā

मतरोदन जातक

मृतकों और जीवितों के लिए रोना

शोकार्त जनों को सचेत करने वाले ज्ञानी गृहस्थवाराणसी का सार्वजनिक श्मशान और दाह-स्थल
#449Paññā

मट्ठकुण्डली जातक

शोकाकुल पिता और चंद्र-सूर्य

दिव्य देवपुत्र के रूप में मट्ठकुण्डलीश्रावस्ती का भवन-बरामदा, श्मशान भूमि और मार्ग
#455Sīla

मातुपोसक जातक

गज और उसकी अंधी माता

अंधी माता की सेवा में समर्पित शीलवान श्वेत गजराजहिमालय का चन्दोरण पर्वत और वाराणसी की राज गजशाला
#390Dāna

मय्हक जातक

लोभी पक्षी और निरर्थक संचय

राजा ब्रह्मदत्त के प्रबुद्ध महाअमात्यवाराणसी का राजकोष प्रांगण और हिमालय का अंजीर वृक्ष (दृष्टांत)
#471Paññā

मेंडक जातक

मेढ़े की पहेली और प्रज्ञा की परीक्षा

आक्रमणकारी मेढ़े की कूटनीतिक पहेली को सुलझाने वाले युवा प्रज्ञावानवाराणसी की राजसभा और राजनयिक वार्ता कक्ष
#381Paññā

मिगालोप जातक

अवज्ञाकारी गिद्ध और वेरंभ वायु

ज्ञानी एवं दूरदर्शी गीधराजगृद्ध्रकूट पर्वत और ऊपरी वायुमंडल का प्रलयंकारी चक्रवात
#372Paññā

मृगपोतक जातक

तपस्वी और लाड़ला मृगछौना

देवराज शक्रहिमालय की तलहटी का आश्रम
#114Paññā

मितचिन्ती जातक

तीन मछलियां—दूरदर्शी, अति-विचारक और अज्ञानी

मितचिन्ती, दूरदर्शी नदी-मत्स्यवाराणसी के समीप विशाल नदी, ग्रीष्म काल
#197Paññā

मित्तामित्त जातक

मित्र और शत्रु के सोलह लक्षण

मित्र-अमित्र के सोलह लक्षणों का निरूपण करने वाले प्रधान अमात्यवाराणसी के राजप्रासाद का गुप्त मंत्रणा कक्ष
#104Sīla

मित्तविन्द जातक

चार विमान, एक उस्तरा चक्र

समुद्रनरक का परिदर्शन करते देवपुत्रमहासागरीय विमन और उस्सद नरक
#82Sīla

मित्तविंद जातक

तृष्णा का क्षुर-चक्र और नरक-यातना

महासागर के नरकों का परिदर्शन करते देवराजमहासागर और उस्तरे के चक्र वाला नरक
#369Nekkhamma

मित्तविन्द जातक

क्षुरधार चक्र की यातना

देवपुत्रउस्सदा नरक
#159Sīla

मोर जातक

मोर का एक असुरक्षित क्षण

सूर्य-परित्त रक्षक सुवर्ण मयूरराजहिमालय का सुवर्णमय दण्डक पर्वत शिखर
#262Paññā

मुदु-पाणि जातक

कोमल हाथ जो राजा की पकड़ से निकल गया

काम-राग की अदम्य गति को समझाकर बाह्य पहरों की व्यर्थता का बोध कराने वाले महाज्ञानी राज-परामर्शदातावाराणसी के राजमहल का सात मंजिला अभेद्य दुर्ग-प्रासाद
#66Nekkhamma

मुदुलक्खणा जातक

तपस्वी तथा रानी का मंत्र

पाँच अभिज्ञाओं से युक्त आकाशगामी तपस्वीवाराणसी राजमहल की छत व हिमालयी आश्रम
#245Paññā

मूलपरियाय जातक

काल को निगलने वाली पहेली

वाराणसी के जगत्प्रसिद्ध दिशाप्रमुख ब्राह्मण आचार्यवाराणसी का महान वैदिक गुरुकुल
#30Paññā

मुणिक जातक

दावत के लिए पाला गया सुअर और संतुष्ट बैल

महालोहित नामक धैर्यवान बैलवाराणसी ग्रामीण कृषक गृह
#373Paññā

मूसिक जातक

राजा को बचाने वाले तीन श्लोक

विश्वविख्यात दिशाप्रमुख आचार्यगांधार में तक्षशिला का गुरुकुल
#32Sīla

नच्च जातक

निर्लज्ज मयूर का नृत्य और खोई हुई दुल्हन

सुवर्ण हंसराजहिमालय का पक्षी महासम्मेलन
#49Paññā

नक्खत्त जातक

क्रमांक 49, नक्षत्र की प्रतीक्षा की मूढ़ता

वाराणसी के विवेकशील ज्ञानी सज्जनवाराणसी नगर द्वार
#165Mettā

नकुल जातक

नेवले और सर्प की संदिग्ध मित्रता

नेवले और सर्प का वैर शांत कराने वाले परम कारुणिक वनमुनिहिमालयी जामुन का विशाल वृक्ष और प्राचीन सर्प-बांबी
#20Paññā

नलपान जातक

जल-राक्षस और खोखले सरकंडे

अस्सी सहस्र वानरों के प्रमुखराक्षस-जलाशय एवं सरकंडों का वन
#526Paññā

नळिनिका जातक

राजकुमारी और भोला तपस्वी

महर्षि काश्यपकाशी राज्य एवं हिमालयी दद्दर पर्वत का आश्रम
#97Paññā

नामसिद्धि जातक

नाम नहीं, कर्म प्रधान है

तक्षशिला के दिशाप्रमोक्ष आचार्यतक्षशिला महाविश्वविद्यालय
#289Paññā

नाना-छंद जातक

राजा और विविध कामनाएं

प्रजावत्सल धर्मराज (वेश बदलकर प्रजा का हाल जानने वाले राजा)वाराणसी की सुनसान रात की गलियां और राजमहल का भव्य दरबार
#39Paññā

नंद जातक

गुप्त धन और सेवक के व्यवहार का रहस्य

कुशल बुद्धिमान गृहपतिग्रामीण खेत व गुप्त गड़ा धन
#28Sīla

बैल तथा कठोर शब्द

नंदिविसाल जातक

नंदिविशाल बैलगांधार (तक्षशिला)
#385Mettā

नन्दियमृग जातक

मातृ-पितृभक्त मृग और कोसल नरेश

मातृ-पितृ भक्त परम दयालु मृगराज नन्दियकोसल का वन और राजा का आखेट वन
#144Paññā

नंगुल जातक

पुराना हल और साधना का संकल्प

हिमालय का सिद्ध तपस्वी गुरुहिमालय का शांत आश्रम और कृषक ग्राम
#123Paññā

नङ्गुट्ठ जातक

अग्निहोत्री तपस्वी और बैल की पूंछ

विवेकशील एवं सम्यकदृष्टि वानप्रस्थ ऋषिकाशी की सीमांत वनस्थली में अग्निहोत्र कुटी
#379Upekkha

नेरु जातक

क्रमांक 379, अविवेकी सोने का पर्वत

विवेकशील सुवर्ण हंसराजहिमालय का सुवर्णमय नेरु पर्वत और चित्तकूट
#79Paññā

नेरु जातक

स्वर्णिम पर्वत और विवेकहीन समानता

सुवर्ण राजहंस प्रमुखनेरु पर्वत (स्वर्ण शिखर)
#445Mettā

निग्रोध जातक

दर्जी-पुत्र की उदारता और क्षमा

कृतज्ञ और धर्मपरायण राजा निग्रोधतक्षशिला विश्वविद्यालय, मार्ग का वटवृक्ष और वाराणसी का राजमहल
#12Mettā

निग्रोधमृग जातक

वट वृक्ष मृग राजा

न्यग्रोधमृग (स्वर्ण मृग नरेश)वाराणसी का मृगदाव
#541Adhiṭṭhāna✨ Mahānipāta

निमि जातक

स्वर्ग और नरक का भ्रमण करने वाला राजा

महाराजा निमिमिथिला, स्वर्ग व नरक
#195Paññā

पब्बत-उपत्थर जातक

राजा, रानी और पहाड़ी जलप्रपात का रहस्य

विद्वान राज-परामर्शदाता और नीतिज्ञ अमात्यगंगा तट पर स्थित वाराणसी का राज-दरबार
#432Paññā

पदकुसलमाणव जातक

क्रमांक 432, अश्वमुखी यक्षिणी का पुत्र

पदचिह्न-विशारद प्रज्ञावान बालकवाराणसी का शाही खजाना, खाई और राजप्रांगण
#247Paññā

पादंजलि जातक

मूर्ख राजकुमार पादंजलि

बुद्धि और सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेने वाले धर्मात्मा महामात्यवाराणसी का भव्य राजदरबार और मन्त्रणा-कक्ष
#261Sacca

पदुम जातक

कमल-पुष्प और सत्यवादी भ्राता

चाटुकारिता से परे रहकर अखंड सत्य और स्वाभिमान की रक्षा करने वाले श्रेष्ठि-पुत्र बोधिसत्ववाराणसी नगर के परकोटे के बाहर स्थित राजकीय कमल-सरोवर
#370Paññā

पलास जातक

स्वर्ण हंस और बरगद का आक्रमण

पलाश वृक्ष पर विश्राम करने वाले स्वर्ण-हंस राजवाराणसी के वन प्रांतर में पलाश का विशाल वृक्ष
#490Sīla

पंच-उपोसथ जातक

पाँच वनवासी और उपोसथ व्रत

वनवासी मुनिहिमालय का आश्रम
#508Paññā

पञ्च-पण्डित जातक

क्रमांक 508, नाद के नीचे छिपा रहस्य

मिथिला के मुख्य पण्डितविदेह का मिथिला राजदरबार
#132Sīla

पञ्चगरु जातक

बुद्धिमत्तापूर्ण परामर्श मानने वाला राजकुमार

प्रत्येकबुद्धों के परामर्श का पालन करने वाला कनिष्ठ राजकुमारवाराणसी से तक्षशिला तक का यक्षिणी-ग्रस्त मार्ग
#55Viriya

पञ्चावुध जातक

क्रमांक 55, वह राक्षस जो अंगुलिमाल बना

राजकुमार पंचावुध (पंच-आयुध धारी)रोमश राक्षस का भयावह वन
#518Sīla

पण्डर जातक

श्वेत नागराज और धोखेबाज तपस्वी

पण्डर (श्वेत नागराज)नागलोक की नदी तलहटी एवं समुद्र तट का आश्रम
#459Paññā

पानीय जातक

पांच मुनि और सूक्ष्म विकारों का दमन

जल की एक घूंट से तृष्णा पहचान कर प्रबुद्ध हुए प्रत्येकबुद्धग्राम के खलिहान, कमल सरोवर और वाराणसी का राज प्रमदवन
#102Paññā

पण्णिक जातक

सब्जी विक्रेता और शीलवती कन्या

वटवृक्ष के अधिष्ठाता देवतावाराणसी के बाहर सघन वन
#416Paññā

परन्तप जातक

पशु-भाषा वेत्ता राजकुमार और विश्वासघात का पर्दाफाश

पशु-पक्षियों की वाणी के ज्ञाता धर्मपरायण राजकुमारवाराणसी का राजमहल, गहन बांस का वन और हिमालय का तपोवन
#92Paññā

परोसहस्स जातक

क्रमांक 99, जिस तपस्वी ने कुछ नहीं जीता

१००० तापसों के कुलपति महर्षिहिमालय का तपोवन
#101Paññā

परोसत जातक

सौ मूर्ख, एक ज्ञानी

पञ्चाभिज्ञ व अष्टासमापत्ति सिद्ध महर्षिउत्तर हिमालय का आश्रम
#54Paññā

फल जातक

विषैला किम्पाक फल और चतुर सार्थवाह

तीक्ष्णबुद्धि सार्थवाहजंगल की सीमा व किंफल वृक्ष
#475Paññā

फन्दन जातक

कम्पित वृक्ष-देवता और वैर का संहार

विशाल फन्दन वृक्ष के प्रबुद्ध वृक्ष-देवताहिमालय की तलहटी का वन-सरोवर और फन्दन वृक्ष-कुंज
#337Khanti

पीठ जातक

सहनशील तपस्वी और पश्चातापी सेठ

अपमान और सत्कार दोनों में समान रहने वाले वीतराग मुनिवाराणसी का मुख्य नगर-पथ और सुरम्य राजोद्यान
#311Paññā

पुचिमंद जातक

नीम वृक्ष के देवता और चोर का पलायन

नीम के वृक्ष के अधिष्ठाता देवतावाराणसी के बाहर श्मशान और वन का संधि-स्थल
#214Paññā

पुण्णनदी जातक

निर्वासित पुरोहित और कौवे की पहेली

राजा के गूढ़ संदेशों को सुलझाने वाले परम विद्वान प्रधान अमात्यशांतिपूर्ण पैतृक ग्रामीण जागीर और वाराणसी का भव्य सिंहासन-कक्ष
#53Paññā

पुण्णपाति जातक

कोषाध्यक्ष तथा भरे हुए प्याले

सचेत व्यापारी सार्थवाहराजमार्ग की सुराशाला
#147Nekkhamma

पुप्फरत्त जातक

केसरिया वस्त्र तथा सूली चढ़ाया गया पुरुष

वध-स्थल के समीप वटवृक्ष का ज्ञानी वृक्ष-देवतावाराणसी का बाह्य वध-स्थल और राजोद्यान
#280Paññā

पुट-दूषक जातक

पत्तों के दोने फाड़ने वाला मूर्ख वानर

न्यायनिष्ठ और प्रज्ञावान शाही अमात्य (मंत्री)वाराणसी की राजधानी में स्थित राजकीय उपवन और पौधशाला
#223Paññā

पुटभत्त जातक

भात की पोटली और अभिमानी पति

पारिवारिक मर्यादा और कृतज्ञता की पुनः प्रतिष्ठा करने वाले विद्वान प्रधान अमात्यकाशी का निर्जन मरुस्थल और वाराणसी के राजमहल के संगमरमरी झरोखे
#437Paññā

पूतिमांस जातक

चतुर बकरी और ढोंगी मृत सियार का रहस्य

घास के मैदान का साक्षी प्रबुद्ध वृक्ष-देवताकंटीली झाड़ियों से घिरा घास का मैदान और गुहा-द्वार
#198Paññā

राधा जातक (द्वितीय)

विवेकशील तोता और कुलटा स्त्री

पोत्थपाद, विवेकशील और धैर्यवान ज्येष्ठ शुकवाराणसी में एक संपन्न ब्राह्मण का आवास और प्रांगण
#145Paññā

राधा जातक

तोते जो उसकी रक्षा नहीं कर सके

ज्ञानी ज्येष्ठ तोता पोट्ठपादवाराणसी का समृद्ध व्यापारी गृह
#334Sīla

राज़ोवाद जातक (द्वितीय)

धर्मपरायण राजा और मीठे गूलर

राजा के धर्म और प्रकृति के संबंध को उजागर करने वाले वनवासी मुनिहिमालय की तलहटी में शांत पर्णकुटीर
#151Sīla

राजोवाद जातक

संकरे मार्ग पर दो राजा

धर्मराज ब्रह्मदत्त (काशी नरेश)काशी-कोसल सीमा पर्वतीय संकीर्ण मार्ग
#332Paññā

रथलट्ठि जातक

चाबुक की चोट और अहंकारी पुरोहित

वाराणसी के निष्पक्ष और सत्यनिष्ठ मुख्य न्यायाधीशवाराणसी का संकरा नगर-द्वार और राजसभा न्यायालय
#501Sīla

रोहन्त-मिग जातक

स्वर्ण मृग और अंधे माता-पिता

रोहन्त (सुवर्ण मृगराज)हिमालय का चित्तकूट पर्वत एवं वाराणसी राजसभा
#44Paññā

मूर्ख दासी और मक्खियाँ

रोहिणी जातक

वाराणसी के प्रज्ञावान श्रेष्ठीवाराणसी उपनगरीय भवन
#277Paññā

रोमक जातक

ढोंगी तपस्वी और कबूतरों का राजा

पक्षीराज कपोत (हजारों कबूतरों के संरक्षक स्वामी)काशी के सीमांत गाँव के पास स्थित गुफा और तपस्वी का आश्रम
#275Paññā

रुचिर जातक

कौए के घोंसले में सुंदर सारस

विवेकशील और अनासक्त कबूतरवाराणसी के एक समृद्ध भवन का आंगन और रसोई का छज्जा
#191Paññā

रुहक जातक

साज पहनने वाला पुरोहित

वाराणसी के धर्मप्रिय राजा जिन्होंने अपने राज-पुरोहित को अज्ञानता के जाल से निकाला और कपटी पत्नी का बहिष्कार कियावाराणसी का मुख्य राजपथ और राजमहल का भव्य दरबार
#74Sīla

रुक्खधम्म जातक

वृक्षों का धर्म जो तूफान में भी अटल रहा

शाल वन के संरक्षक वृक्षदेवताहिमालय का सघन शाल वन
#482Sīla

रुरु जातक

स्वर्ण मृग और कृतघ्न मनुष्य का विश्वासघात

डूबते जुआरी को बचाकर विश्वासघाती को भी क्षमा करने वाले दिव्य स्वर्ण मृग रुरुगंगा नदी के तट पर सुगंधित कमल-वन और वाराणसी का राजदरबार
#241Paññā

सब्बदाठ जातक

सियार राजा और वशीकरण मंत्र

सिंह-गर्जना की रणनीतिक युक्ति से हिंसक पशु-सेना को परास्त करने वाले प्रखर राज-परामर्शदाताघिरी हुई वाराणसी नगर की प्राचीरें
#110Paññā

सब्बसंहारक जातक

वह गंध जो झूठ नहीं बोल सकी

प्रधान राज-परामर्शदातावाराणसी, राजसभा के मध्य
#73Mettā

सच्चंकिर जातक

कृतघ्न राजकुमार और निष्ठावान पशु-पक्षी

दयालु वनवासी तपस्वी / धर्मराजगंगा तट और वाराणसी राजधानी
#494Dāna

साधीन जातक

राजा साधीन और तावतिंस स्वर्ग का आरोहण

राजा साधीनमिथिला और तावतिंस स्वर्ग
#200Sīla

साधुसील जातक

चार वर और शील का चयन

तक्षशिला के आचार्य के प्रधान मेधावी शिष्य और नीति-निर्धारकतक्षशिला की वैदिक विद्यापीठ और उसका उपदेश-मंडप
#237Mettā

साकेत जातक

बुद्ध के पूर्वजन्मों के माता-पिता

पूर्वजन्मों के माता-पिता के सहज वात्सल्य को करुणापूर्वक स्वीकार करने वाले शाक्यमुनि बुद्धसाकेत का नगर-द्वार और निर्धन ब्राह्मण का गृह
#36Paññā

शकुण जातक

आग पकड़ने वाला वृक्ष

पक्षी समुदाय का प्रज्ञावान प्रमुखवन का विशाल घर्षणशील वृक्ष
#168Paññā

सकुणग्घि जातक

बटेर और बाज का द्वंद्व

स्मृति-उपस्थान के सुरक्षित क्षेत्र का रहस्य बताने वाले सिद्ध मुनिवाराणसी के जुते हुए खेत के ढेले और वन की सीमा
#249Paññā

साळक जातक

वह बंदर जो दोबारा धोखा नहीं खाया

कपट और चापलूसी को भेदकर आत्म-मुक्ति की प्रशंसा करने वाले धान्य-श्रेष्ठिवाराणसी के निकट एक समृद्ध व्यापारिक ग्राम और आम्रवन
#484Sīla

सालिकेदार जातक

पितृभक्त शुकराज और धान का खेत

तोता राजकोसल के धान के खेत
#107Paññā

सालित्तक जातक

बातूनी को ठीक करने वाला निशानेबाज

विद्वान राज-सलाहकारवाराणसी, राजा ब्रह्मदत्त का शासनकाल
#367Paññā

शालिय जातक

ग्राम-वैद्य और विषैला सर्प

प्रज्ञावान ग्रामवासीवटवृक्ष के नीचे का गाँव
#286Paññā

सालूक जातक

लाड़ला सुअर और संतोषी बैल

महालोहित (सदाचारी और विवेकवान ज्येष्ठ बैल)काशी के एक कृषि प्रधान गाँव का किसान का घर और बाड़ा
#515Paññā

सम्भव जातक

क्रमांक 515, राजा को उत्तर देने वाला बालक

बाल मुनि सम्भवउत्तर-पांचाल नगर (मार्ग प्रांगण)
#519Sacca

सम्बुला जातक

पतिव्रता रानी और कुष्ठरोगी राजकुमार

महारानी सम्बुलापर्वतीय जलधारा के निकट वन-कुटी एवं राजप्रासाद
#167Nekkhamma

समिद्धि जातक

अप्सरा और युवा तपस्वी

अप्सरा के प्रलोभन को जीतने वाले दृढ़-प्रतिज्ञ युवा तपस्वीहिमालय का कमल-सरोवर और सुगंधित वन-आश्रम
#33Sīla

सम्मोदमान जातक

संगठित बटेर तथा बहेलिया

एकताबद्ध बटेरों का नेताझाड़ीदार वन व बहेलिए का जाल
#296Paññā

समुद्द जातक

लोभी कौवा जो समुद्र का रक्षक बना

अगाध रत्नाकर के अधिपति प्रतापी 'समुद्र-देवता'अथाह महासागर और प्राचीन समुद्री नौका-मार्ग
#466Paññā

समुद्द-वाणिज जातक

बढ़ई और चढ़ता समुद्र

पांच सौ परिवारों को विनाश से बचाने वाले दूरदर्शी प्रधान बढ़ईगंगा तट, अज्ञात फलदार उष्णकटिबंधीय द्वीप और तूफानी समुद्र
#436Paññā

समुग्ग जातक

असुर और निगला गया पिटारा

राक्षस का मोहभंग करने वाले सिद्ध तपस्वीहिमालय का सघन वनमार्ग और घाटी
#462Mettā

संवर जातक

विनीत राजकुमार और शील का सामर्थ्य

विनीत राजकुमार को शील व धर्म की शक्ति सिखाने वाले विद्वान राजपुरोहितवाराणसी के राजमहल के प्रांगण और बाहर लगे सैन्य छावनी शिविर
#349Paññā

संधिभेद जातक

टूटी हुई मित्रता

वटवृक्ष के देवतापर्वतीय गुफा और वन घाटी
#150Paññā

संजीव जातक

मृत बाघ को जीवित करने वाला शिष्य

तक्षशिला के दिशाप्रमुख आचार्यतक्षशिला गुरुकुल व अरण्य
#251Nekkhamma

संकप्प जातक

वह विचार जो कोई बाण नहीं था

भटके हुए साथी मुनि को उद्बुद्ध कर ब्रह्मचर्य में पुनः प्रतिष्ठित करने वाले निष्कलंक बोधिसत्वहिमालय की शांत तपोभूमि और वाराणसी का राजप्रासाद
#442Dāna

शंख जातक

ब्राह्मण शंख और समुद्र-देवी मणिमेखला

दानवीर शंख ब्राह्मणवाराणसी, तप्त बालू का मार्ग और तूफानी हिंद महासागर
#60Paññā

शंखधमन जातक

संयम की सलाह देने वाला पुत्र

कुशल शंख-वादकवाराणसी से लौटते वनमार्ग
#524Sīla

प्रतिघात न करने वाला नाग राजा

संखपाल जातक

नागराज शंखपालकण्णपेण्णा नदी
#530Paññā

संकिच्च जातक

क्रमांक 530, ऋषि और पश्चात्तापी राजा

महर्षि संकिच्चउत्तर-पांचाल का काम्पिल्ल नगर एवं अष्टमहानरक
#162Paññā

सन्थव जातक

तपस्वी, अग्नि और हरिणी

असंगत मित्रता का मर्म जानने वाले ज्ञानी हिमालयी महर्षिहिमालयी आश्रम और भस्म-आच्छादित तपोभूमि
#483Mettā

सरभमृग जातक

शिकारी को क्षमा करने वाला मृग

साठ हाथ गहरी खाई से अपने ही शिकारी राजा को पीठ पर लादकर निकालने वाले शरभ मृगहिमालय की तलहटी में साठ हाथ गहरी पथरीली खाई और खुला मैदान
#522Nekkhamma

ऋषि बनने वाला धनुर्धर

सरभंग जातक

शरभंग मुनिगोदावरी तट (दक्षिण भारत)
#88Sacca

सारम्भ जातक

बैल, बाजी और मधुर वचन

सारंभ (प्रियवादी शक्तिशाली वृषभ)तक्षशिला का ग्राम्य अंचल
#179Paññā

सतधम्म जातक

अभिमानी ब्राह्मण का कटु भोजन

सदाचारी चांडाल यात्री जिन्होंने भूखे अहंकारी ब्राह्मण को भोजन का प्रस्ताव दिया और देखा कि जन्मगत अहंकार कैसे स्वयं का विनाश करता हैदो दूरस्थ राज्यों के मध्य फैला भीषण तप्त निर्जन वन-मार्ग
#279Paññā

शतपत्त जातक

पक्षी, सियार, तथा विवेकी डाकू

प्रज्ञावान और दयालु शतपत्र (कठफोड़वा) पक्षीवाराणसी से सीमांत गाँव की ओर जाने वाला बीहड़ वन-मार्ग
#503Paññā

सत्तिगुम्ब जातक

सड़ी मछली और मधुर लोबान

पुप्फक (विनीत शुक)पांचाल का वन (डाकू शिविर एवं ऋष्याश्रम)
#402Paññā

सत्तुभस्त जातक

सेनक और थैली का सर्प

मिथिला के प्रधान महापंडित एवं धर्मवेत्ता सेनकविदेह की राजधानी मिथिला का राजभवन
#310Nekkhamma

सय्ह जातक

पद अस्वीकार करने वाला पुरोहित-पुत्र

पर्णाहारी संतुष्ट वन तपस्वी / ब्रह्मचर्य के आदर्शहिमालय का एकांत कुंज और वाराणसी का राजदरबार
#217Sīla

सेग्गु जातक

हंसती कन्या तथा पिता का संदेह

कन्या के शील की रक्षा करने वाले तेजस्वी शाल-वृक्ष देवताकाशी के सीमांत वन का एक सघन, एकांत और छायादार कुंज
#3Sīla

सेरिववाणिज जातक

सत्यनिष्ठ फेरीवाले का स्वर्ण-कटोरा

सत्यनिष्ठ सेरिववाणिजअंधपुर नगर व नदी तट
#377Paññā

सेतकेतु जातक

सत्य से झुका अहंकारी ब्राह्मण

ज्ञानी और विनम्र मातंग महर्षिवाराणसी के नगर द्वार और राजप्रासाद
#282Khanti

सेय्य जातक

बंदी राजा की उत्कृष्ट क्षमा और तितिक्षा

अहिंसाव्रती धर्मराज (वाराणसी के परम क्षमाशील नरेश)वाराणसी का गहरा भूमिगत कारागार और राजमहल
#152Paññā

सिगाल जातक

सियार और स्फटिक की गुफा

स्फटिक गुहा के सिंहराज (बोधिसत्व सिंह)रजतगुहा (स्फटिक गुहा) और हिमालय की तलहटी
#148Nekkhamma

सिगाल जातक

शव के भीतर फंसा सियार

शव में फंसा सियारबनारस के निकट गंगा तट पर हाथी का शव
#189Paññā

सिंहचम्म जातक

सिंह की खाल में गधा

बुद्धिमान किसान जिन्होंने शोर मचाकर सिंह की खाल में छिपे गधे को रेंकने पर विवश किया और सच्चाई उजागर कीवाराणसी के निकट एक ग्रामीण बस्ती के लहलहाते हरे-भरे जौ के खेत
#188Paññā

सिंहकोट्ठुक जातक

सिंह-सियार शावक की पोल खोलती आवाज

सिंहराज जिन्होंने सियारिन से जन्मे अपने शावक को सिखाया कि जब वाणी अयोग्य हो तो मौन ही लज्जा से बचने का एकमात्र साधन हैहिमालय की स्वर्ण गुफा और गर्जना करने वाली ऊँची ग्रेनाइट चट्टान
#290Sīla

शील-वीमंस जातक

शील की परीक्षा और चुराया हुआ सिक्का

शास्त्रज्ञ राजपुरोहित व मुख्य न्यायाधीश (शील की परीक्षा लेने वाले)वाराणसी के राजमहल का शाही खजाना और न्याय-कक्ष
#190Sīla

शीलानिसंस जातक

सदाचारी नाई और समुद्र का नागराज

समुद्र के रक्षक देवता (नागराज) जिन्होंने पंचशील का पालन करने वाले निर्दोष नाई को रत्नों के जहाज से बचाया और पापी स्वामी को दंड दियातूफान में धधकती समुद्र की गहराइयाँ और वाराणसी का सुरक्षित बंदरगाह
#72Sīla

शीलवनाग जातक

गजराज और देवदत्त का शिकारी

शीलवान श्वेत हस्ती प्रमुखहिमालय की हरी-भरी उपत्यका
#330Nekkhamma

शीलवीमंस जातक

शांति की खोज तथा मांस लिए बाज

त्याग और अनासक्ति के परमानंद को जानने वाले ज्ञानी राजपुरोहितराजोद्यान और बाद में घने जंगल का शांत आश्रम
#362Sīla

शीलवीमंस जातक

शील परखने वाला राजपुरोहित

काशी नरेश के धर्माचार्य पुरोहितवाराणसी राजकोष व प्रासाद
#284Paññā

सिरी जातक

सौभाग्यशाली कुक्कुट और भाग्यवान राजा

दिव्यदर्शी परिव्राजक (पुण्य के ज्ञाता महर्षि)वाराणसी का नदी तट और राजसभा का प्रांगण
#192Paññā

सिरी-कालकण्णी जातक

श्री और कालकर्णी (लक्ष्मी और अलक्ष्मी) का संवाद

श्रेष्ठि सुचिपारिवार जिन्होंने अलक्ष्मी और लक्ष्मी से साक्षात संवाद कर जाना कि शील और धैर्य ही वास्तविक समृद्धि के आधार हैंमध्यरात्रि के समय वाराणसी में व्यापारी के भव्य प्रासाद की खुली छत
#382Sīla

सिरिकालकण्णि जातक

श्रेष्ठी ने देवियों का न्याय किया

धर्मात्मा श्रेष्ठी शुचिपरिवारवाराणसी में शुचिपरिवार श्रेष्ठी का भव्य प्रासाद
#500Paññā

सिरिमन्द जातक

निर्धन बुद्धिमान तथा धनी मूर्ख

सिरिमन्द (प्रधान परामर्शदाता)विदेह की राजधानी मिथिला का राजप्रासाद
#499Dāna

अपने नेत्र देने वाला राजा

शिवि जातक

महाराजा शिविअरिष्टपुर (शिवि राज्य)
#211Sacca

दो बैलों का उपहार

सोमदत्त जातक

पंडित सोमदत्त (राजकीय विद्वान अमात्य)वाराणसी राजसभा व श्मशान भूमि
#410Upekkha

सोमदत्त जातक

तपस्वी और उसका पालित हाथी

शोकविनाशक देवराज शक्रतावतिंस स्वर्ग और हिमालय की एकांत घाटी का आश्रम
#505Paññā

सोमनस्स जातक

धर्मनिष्ठ राजकुमार और पाखंडी संन्यासी

राजकुमार सोमनस्सउत्तर पांचाल राजदरबार एवं हिमालय
#532Mettā

सोण-नन्द जातक

दो भाई और उनके वृद्ध माता-पिता

तपस्वी सोणहिमालय का आश्रम एवं कोसल राजदरबार
#529Nekkhamma

सोणक जातक

राजा और मौन प्रत्येकबुद्ध मित्र

राजा अरिन्दमराजगृह (मगध) एवं हिमालय का नन्दमूल पर्वत
#387Viriya

सूचि जातक

वह सुई जिसने वधू जिती

अतुल्य परिश्रमी एवं सूक्ष्म शिल्पी लोहार युवककाशी में एक हजार लोहार परिवारों की विशाल बस्ती
#535Dāna

सुधाभोजन जातक

कोसिय और अमृत का पात्र

सक्क (देवेन्द्र शक्र)राजगृह नगर (श्रेष्ठी का सात मंजिला प्रासाद)
#158Paññā

सुहनु जातक

दो उग्र घोड़े और उचित दाम

वाराणसी के बुद्धिमान राजपुरोहित / नीति-विशारद अमात्यवाराणसी की अश्वशाला और राजदरबार
#352Paññā

सुजात जातक

मृत बैल और शोकाकुल पिता

बुद्धिमान सुजात कुमारवाराणसी नगरी और मार्ग का किनारा
#306Paññā

सुजाता जातक

बेर बेचने वाली कन्या और रानी सुजाता का मान-मर्दन

सुलभ-बुद्धि राजमंत्री / राजपरिवार के शांति-दूतवाराणसी राजप्रासाद का भव्य भोजन कक्ष
#269Paññā

सुजात जातक

ज्ञानी बालक और मृत बैल

मृत बैल को घास खिलाने के अद्भुत दृष्टांत से अपने पिता के शोक के दावानल को बुझाने वाले सुजात बोधिसत्ववाराणसी की गलियां और पारिवारिक उपवन में बनी चिता-समाधि
#255Paññā

शुक जातक

लोलुप तोता जिसने माता-पिता को भी खोया

स्वाद-लोलुपता और अनिर्धारित अति-आहार के प्राणघातक खतरे से सचेत करने वाले शुकराजहिमालय का विशाल सेमल वन और सुदूर विषवृक्ष-द्वीप
#153Upekkha

सूकर जातक

मल में लोटने वाला सूकर

गंभीर एवं समताधारी वनराज सिंहवन का सरोवर तट और मलमूत्र का ढेर
#10Nekkhamma

सुखविहारी जातक

त्यागी राजा का आनंद

हिमालय के तपस्वी गुरुहिमालय आश्रम व राजोद्यान
#419Paññā

सुलसा जातक

चतुर सुलसा तथा डाकू सत्तुक

वृक्ष-देवता / स्त्री-बुद्धि के साक्षी देववाराणसी महानगर और चोर-पर्वत की चोटी
#420Khanti

सुमंगल जातक

उपवन-रक्षक और धैर्यवान राजा

धैर्यवान व क्षमाशील राजा ब्रह्मदत्तवाराणसी का राजोद्यान, राजमहल और वन की शरणस्थली
#292Sacca

सुपत्त जातक

निष्ठावान काकराज सुपत्त और सुफस्सा का दोहद

काकराज सुपत्त / अस्सी सहस्र कौओं के धर्मनिष्ठ स्वामीवाराणसी का महा-न्यग्रोध वन और राजप्रासाद की पाकशाला
#463Sacca

सुप्पारक जातक

नेत्रहीन महानाविक और संकटमय सागर

सत्यक्रिया से प्रलयंकारी भंवर को मोड़ने वाले दृष्टिहीन महानाविक सुप्पारकभरुकच्छ का प्राचीन बंदरगाह और वलभामुख भंवर तक फैले रहस्यमय समुद्र
#81Sīla

सुरापान जातक

तपस्वी, मदिरा-पान और शील का पतन

५०० तापसों के कुलपति महर्षिहिमालय व वाराणसी का राजोद्यान
#489Dāna

सुरुचि जातक

राजा सुरुचि और मणिमय प्रासाद

कुमार महापनादविदेह की मिथिला
#411Nekkhamma

सुसीम जातक

सफेद बाल और लौटाया गया ताज

वेद-वेदांग पारंगत तेजस्वी एवं जितेंद्रिय युवा राजपुरोहिततक्षशिला विद्यापीठ और वाराणसी का अंतःपुर
#163Nekkhamma

सुसीम जातक

पुरोहित-पुत्र और हाथी-उत्सव का अधिकार

विद्वान युवा सुसीम (शास्त्र-पारंगत एवं राजवैभव-त्यागी)तक्षशिला विद्यापीठ और वाराणसी का राजसिंहासन-कक्ष
#360Nekkhamma

सुस्सोन्दी जातक

गरुड़राज और रूपवती रानी

राजगायक एवं वीणा-वादक सग्गवाराणसी राज्य और पौराणिक सेरुम द्वीप
#208Paññā

सुसुमार जातक

चतुर वानर और कपटी मगरमच्छ

कुशाग्रबुद्धि वानरराज, जलीय हिंसक को मात देने वालेगंगा का सुरम्य तट और पके फलों से लदा गूलर का वृक्ष
#398Mettā

सुतन जातक

मातृभक्त युवक और नरभक्षी यक्ष का उद्धार

मातृभक्त एवं प्रज्ञावान युवा सुतनयक्ष-अधिष्ठित न्यग्रोध वृक्ष और वाराणसी राजभवन
#537Sacca

अपने वचन का पालन करने वाला राजा

सुतसोम जातक

महाराजा महासुतसोमइंद्रप्रस्थ (कुरु राज्य)
#302Viriya

भोजजानीय जातक

युद्ध-अश्व जो रुका नहीं

सुवाहनह / सैंधव कुल का पराक्रमी युद्ध-अश्ववाराणसी के दुर्ग प्राचीरों के बाहर रणभूमि
#136Sīla

स्वर्णहंस और लोभी माता

सुवर्णहंस जातक

सुवर्णहंस (दिव्य स्वर्ण पक्षी)वाराणसी निकटवर्ती गृह
#389Mettā

सुवर्णकर्कट जातक

सुवर्ण केकड़ा और निष्ठावान ब्राह्मण

हिमालयी सरोवर का पराक्रमी सुवर्ण कर्कटहिमालय का कुलीरदह (केकड़ा कमल-सरोवर) और सीमांत खेत
#359Sacca

सुवर्णमृग जातक

स्वर्ण मृग और शिकारी का पाश

स्वर्णमृग राज सुवर्णमिगमगध में राजगृह के निकटवर्ती वन
#540Mettā✨ Mahānipāta

सुवण्णसाम जातक

कर्तव्यनिष्ठ पुत्र

सुवर्णसामहिमालय वन एवं मिगसम्मता नदी
#492Viriya

तच्छ-सूकर जातक

बढ़ई का वराह और व्याघ्र-संग्राम

तच्छ-सूकर वराहवाराणसी के निकट का वन
#63Upekkha

तक्क जातक

खजूर-तापस का पतन और पुनरुत्थान

खजूर वृक्ष के नीचे ध्यानस्थ वनवासी मुनिहिमालय की नदी का तट व खजूर वन
#446Sīla

तक्कल जातक

वसिट्ठक का पुत्र और कब्र का गड्ढा

पितृभक्त और उपाय-कुशल कृषक तक्कलकाशी का कृषि गांव और वीरान श्मशान भूमि
#481Paññā

तक्करिय जातक

वह पुरोहित जिसने स्वयं को नष्ट किया

विवेकी वाणी द्वारा नर-बलि रुकवाकर गुरु की रक्षा करने वाले शिष्य तक्करियवाराणसी के दक्षिणी नगर-द्वार का निर्माण स्थल और राजमंत्रणा कक्ष
#5Paññā

चावल की एक नाली और लालची राजा

तण्डुलनाळि जातक

वाराणसी के धर्मात्मा अर्घकारकवाराणसी राजदरबार
#58Paññā

तयोम्म जातक

वानरराज और नेतृत्व के तीन सद्गुण

युवा वानरराजहिमालय के वन और कमल-सरोवर
#96Sīla

वह राजकुमार जिसने दृष्टि नहीं हटाई

तेलपत्त जातक

कनिष्ठ राजकुमारवाराणसी से तक्षशिला
#246Paññā

तेलोवाद जातक

मछली का भोजन और दोष का प्रश्न

दोष को उसके वास्तविक स्थान पर रखने वाले वनवासी तपस्वीवाराणसी में एक धनी गृहस्थ का घर
#538Nekkhamma✨ Mahānipāta

गूँगा बनने वाला राजकुमार

तेमिय जातक

राजकुमार तेमियकाशी राज्य (वाराणसी)
#521Paññā

तेसकुण जातक

क्रमांक 521, राजा को परामर्श देने वाले तीन पक्षी

जम्बुक बुद्धिमान तीतरवाराणसी का राजमहल एवं राजोद्यान
#338Paññā

थुस जातक

वे गाथाएं जो चार घातों से बचीं

रहस्यमय रक्षा-गाथाओं से अनहोनी टालने वाले दूरदर्शी राजगुरुवाराणसी का राज-शयनकक्ष, स्नानगृह और विशाल सभा-मंडप
#252Khanti

तिल-मुट्ठी जातक

तिल की मुट्ठी और दूरदर्शी गुरु का दंड

अहंकारी राजकुमार को न्यायपूर्ण अनुशासन व क्षमा का पाठ पढ़ाने वाले तक्षशिला के दिशाप्रमुख आचार्यतक्षशिला की विद्यापीठ और वाराणसी की राजसभा
#177Paññā

तिन्दुक जातक

वानरराज और तिन्दुक वृक्ष की रक्षा

बुद्धिमान वानरराज जिन्होंने मीठे तिंदुक वृक्ष को घेरने वाले धनुर्धरों से अपने अस्सी हज़ार वानरों को बचाने हेतु गाँव में आग लगाने की चतुर युक्ति सोचीगाँव के बीचों-बीच स्थित मीठा तिंदुक (तेंदू) वृक्ष और उसके आसपास का क्षेत्र
#16Paññā

तिपल्लत्थ जातक

वह मृग जिसने मृत्यु का अभिनय किया

माया-विद्या विशारद ज्येष्ठ मृगमगध अरण्य व व्याध का पाश
#259Mettā

तिरीट-वच्छ जातक

कूप से राजा का उद्धार और कृतज्ञता का उपहार

अंधकूप में गिरे पराजित राजा को प्राणपण से बचाकर निष्काम सेवा का आदर्श प्रस्तुत करने वाले मुनि तिरीटवच्छघने जंगल का कूप और वाराणसी के राजकीय उपवन
#25Paññā

तित्थ जातक

कुलीन अश्व और स्वच्छ घाट

सूक्ष्मदर्शी राज अमात्यवाराणसी नदी घाट
#319Paññā

तित्तिर जातक (द्वितीय)

बंदी तीतर और शुद्ध चेतना का कर्म-सिद्धांत

वनवासी मुनि / 'चेतना ही कर्म है' के उद्गाताहिमालय के आश्रम के बाहर चमेली की कुंज
#438Sīla

तित्तिर जातक

वेदपाठी तीतर और पाखंडी संन्यासी

वेदवेत्ता व शीलवान तीतर मुनिहिमालय की शांत वनस्थली, पर्णकुटी और वल्मीक (बांबी)
#37Sīla

तित्तिर जातक

तीतर, वानर और गज का वरिष्ठता-सम्मान

वरिष्ठ प्रज्ञावान तीतरहिमालय तलहटी का न्यग्रोध वृक्ष
#388Sīla

तुण्डिल जातक

धर्मात्मा वराह और मृत्यु पर विजय

महातुण्डिल (ज्ञानवान एवं शीलवान शूकरराज)ग्रामीण वृद्धा का बाड़ा और वाराणसी का राजदरबार
#139Nekkhamma

उभोभट्ठ जातक

दोनों ओर से भ्रष्ट लोभी मछुआरा

सरोवर तट के धर्मनिष्ठ वृक्ष-देवतावाराणसी के निकट एक वन-सरोवर और मछुआरों की बस्ती
#67Paññā

उच्छङ्ग जातक

अपने भाई को चुनने वाली बुद्धिमती स्त्री

न्यायप्रिय काशी नरेशवाराणसी राज न्यायालय
#212Paññā

उच्छिट्ठभत्त जातक

बासी भात और कुलटा पत्नी

तक्षशिला के आचार्य, गूढ़ श्लोक से छल को उजागर करने वालेतक्षशिला का आवासीय छात्रालय और समीपवर्ती ब्राह्मण गांव
#106Khanti

उदञ्चनी जातक

युवा तपस्वी और जल भरने वाली मायावी स्त्री

तपस्वी पिता / ब्रह्मचर्य के रक्षक महर्षिहिमालय का आश्रम और वाराणसी नगर
#271Sīla

उदपान-दूसक जातक

क्रमांक 271, सियार और कुआँ

तपोवन के ज्येष्ठ महर्षि और वन-प्रमुखहिमालय की तलहटी में स्थित तपोवन का पवित्र कूप
#458Nekkhamma

उदय जातक

राजा उदयभद्द और शक्र के तीन कटोरे

ब्रह्मचर्य की परीक्षा लेने वाले शक्र बने राजा उदयसुरट्ठ के राजमहल का सप्तम तल और तावतिंस स्वर्ग
#487Paññā

उद्दालक जातक

क्रमांक 487, दिखावटी तपस्वी और अँगूठी

राजपुरोहितवाराणसी
#298Paññā

उदुम्बर जातक

वह वानर जिसने अपनी गुफा खो दी

पांच सौ वानरों के धैर्यवान, बुद्धिमान और दयालु यूथपतिउत्तरी भारत के पर्वतीय वन में गूलर के वृक्ष से घिरी घाटी
#270Paññā

उलूक जातक

कौआ, उल्लू और राजा का निर्वाचन

क्रूर उल्लू के स्थान पर समस्त पक्षियों द्वारा प्रेम और धर्मपूर्वक शासन के लिए चुने गए स्वर्ण-हंसराज बोधिसत्वहिमालय की विशाल और सुरम्य पर्वत-पठार
#527Sīla

उम्मदान्ती जातक

रूपवती मोहिनी और धर्मनिष्ठ राजा

राजा शिविअरिठ्ठपुर नगर (शिवि राज्य की राजधानी)
#231Paññā

उपानह जातक

कृतघ्न शिष्य और काटने वाले जूते

अपने अद्वितीय कौशल से कृतघ्न शिष्य के अहंकार को चूर करने वाले महा-हस्त्याचार्यवाराणसी का राजकीय गज-परीक्षण प्रांगण
#166Paññā

उपसाळ्ह जातक

शुद्ध श्मशान की खोज

संसार की अनित्यता प्रकट करने वाले त्रिकालदर्शी सिद्ध मुनिगृध्रकूट पर्वत का पावन शैल-शिखर
#154Mettā

उरग जातक

तपस्वी और मणि बना सर्प

परम मैत्रीभावी वनवासी सिद्ध तपस्वीहिमालयी नदी तट का पावन आश्रम
#354Upekkha

किसी के लिए शोक न मनाने वाला घराना

उरग जातक

गृहपति (सच्चा किसान)वाराणसी का समीपवर्ती ग्राम
#354Upekkha

उरग जातक

चिता के समक्ष शांत परिवार

धर्मनिष्ठ कृषक ब्राह्मण (पिता)वाराणसी के बाहर कृषक खेत
#235Nekkhamma

वच्छनख जातक

धन आधा बांटने का व्यापारी का प्रस्ताव

गृहस्थ जीवन के बंधनों पर आंतरिक शांति की श्रेष्ठता का उपदेश देने वाले वानप्रस्थीवाराणसी के बाहर एक शांत आम्रकुंज
#283Paññā

वड्ढकि-सूकर जातक

बढ़ई का वराह

युद्ध-व्यूह के साक्षी ज्ञानी वन-वृक्ष देवतावाराणसी के समीप पहाड़ी घाटी और सुअरों द्वारा निर्मित खाई
#300Sīla

वक जातक

भेड़िये का क्षणिक उपोसथ व्रत

देवराज इंद्र (सक्क) / कपटी शील के परीक्षक भगवानवाराणसी के समीप गंगा नदी में बाढ़ से घिरी चट्टान
#196Viriya

वलाहस्स जातक

करुणा का उड़ता घोड़ा

वलाहस्स (दिव्य उड़ने वाला अश्व)सिरीसवत्थु द्वीप (श्रीलंका)
#57Paññā

मगरमच्छ को मात देने वाला बंदर

वानरिंद जातक

वानरराजगंगा तट
#361Mettā

वण्णारोह जातक

वह सियार जो दो मित्रों को अलग नहीं कर सका

वृक्ष-देवताशांत पर्वतीय वन
#2Viriya

वण्णुपथ जातक

रेगिस्तान में जल खोजने वाला कारवाँ

धैर्यवान सार्थवाहवण्णुपथ मरुस्थल
#71Viriya

वरण जातक

वरण-वृक्ष और आलसी शिष्य

तक्षशिला के दिशापामुख आचार्यतक्षशिला गुरुकुल व वन
#47Paññā

वारुणी जातक

मद्य में नमक मिलाने वाला शिष्य

विवेकी महा व्यापारीवाराणसी का व्यापारिक बाज़ार
#266Paññā

वातग्ग-सिन्धव जातक

अश्व तथा शोकाकुल गर्दभी

धिक्कार और विवेकभरी वाणी से कुलीन अश्व के स्वाभिमान को जगाने वाले राज-अश्वपाल बोधिसत्ववाराणसी की मखमली राज-अश्वशाला और पवित्र नदी का कछार
#14Paññā

वातमृग जातक

मधुयुक्त घास से फंसा मृग

राजा ब्रह्मदत्त (विवेकी नरेश)वाराणसी राजोद्यान
#118Paññā

वट्टक जातक

मोटा होने से इनकार करने वाला बटेर

संयम और उपवास से मुक्ति पाने वाले ज्ञानी बटेरराजबहेलिये का बांस का पिंजरा और वाराणसी के वनों का खुला आकाश
#35Sacca

बटेर चूजे का सत्य-कर्म

वट्टक जातक

बटेर का नवजात शिशुमगध का वन
#48Paññā

हजारों का संहार करने वाला खजाना-मंत्र

वेदब्भ जातक

प्रज्ञावान युवा विद्वान शिष्यवाराणसी-चेतिय वनमार्ग
#43Paññā

वेळुक जातक

तपस्वी और पालतू विषधर

पाँच सौ तपस्वियों के गुरुहिमालय तपोवन
#103Paññā

वेरी जातक

व्यापारी और वन के लुटेरे

दूरदर्शी न्यायप्रिय व्यापारीवाराणसी के निकट चोर-घाटी वनमार्ग
#545Sacca✨ Mahānipāta

विधुरपण्डित जातक

बुद्धिमान मंत्री की शर्त

विदुरपंडितइंद्रप्रस्थ (कुरु राज्य)
#393Nekkhamma

विघास जातक

भोगी तपस्वी और उच्छिष्ट-भोजी की सीख

प्रमादी साधकों को जगाने वाले ज्ञानवान आचार्यवाराणसी के बाहर तपोवन और धनिकों के भोजन कक्ष
#233Paññā

विकण्णक जातक

कंटीला बाण और चारे का लोभ

चारे के प्रलोभन और तृष्णा रूपी कंटीले बाण के विनाशकारी प्रभाव को समझाने वाले तपस्वी मुनिउत्तर भारत में नदी तट पर स्थित ऋषि-आश्रम
#232Paññā

वीणाथूण जातक

मूर्ख कन्या और कुबड़ा पुरुष

भागकर आई मुग्ध कन्या के भ्रम को दूर करने वाले ज्ञानी सार्थवाहवाराणसी नगर के बाहर धूल भरी मुख्य सड़क
#160Paññā

विनीलक जातक

हंसों की पीठ पर सवार घमंडी कौआ

चित्तकूट पर्वत के सुवर्ण हंसराजचित्तकूट पर्वत और मिथिला नगरी का कूड़ाघर
#204Paññā

वीरक जातक

जल-काग की नकल करता मूर्ख कौआ

वीरक, गोता लगाने में निपुण और उदार जल-कागहिमालय के झरनों से पोषित एक निर्मल कमल-सरोवर
#143Paññā

विरोचन जातक

सिंह का स्वांग रचने वाला घमंडी सियार

स्फटिक शिला पर रहने वाला पराक्रमी सिंहराजहिमालय की गगनचुंबी चट्टानें और स्फटिक गुफा
#69Sacca

विषवंत जातक

विषधर सर्प और सत्य का संकल्प

वाराणसी के विश्रुत महावैद्यवाराणसी के समीप ग्रामीण वनक्षेत्र
#340Dāna

विसयह जातक

सत्यनिष्ठ श्रेष्ठी और शक्र की परीक्षा

विसयह श्रेष्ठी / स्वर्ग को हिला देने वाले अखंड दानवीरवाराणसी की छह विशाल दानशालाएं और धूप से तपते घास के मैदान
#272Paññā

व्याघ्र जातक

बाघों को भगाने की मूर्खता

वृक्ष-राज के ज्ञानी अधिष्ठाता देववाराणसी के समीप बाघों और सिंहों से युक्त घना अरण्य
#460Nekkhamma

युवञ्जय जातक

प्रातःकालीन ओस में अनित्यता का दर्शन करने वाले राजकुमार

प्रातःकालीन ओस से संसार की नश्वरता जानने वाले युवराज युवञ्जयरम्मानगरी के उद्यानमार्ग और हिमालय के शांत शैलवन
शास्त्रीय पृष्ठभूमि व जीवंत परंपरा

शास्त्रीय पृष्ठभूमि व जीवंत परंपरा

प्रत्येक जातक कथा की त्रि-आयामी शास्त्रीय संरचना

पालि तिपिटक की जातक कथाएँ 'जातकट्ठवण्णना' के अनुसार एक निश्चित तीन-स्तरीय शास्त्रीय प्रारूप में संरचित हैं:

१. पच्चुप्पन्नवत्थु (वर्तमान कथा): जेतवन अनाथपिंडिक आराम (श्रावस्ती) अथवा राजगृह की वह वास्तविक घटना, जहाँ भिक्षुओं के प्रश्न या परिस्थिति को देखकर बुद्ध कथा का आरंभ करते हैं। २. अतीतवत्थु (अतीत कथा): मूल जन्मकथा, जो प्रायः 'अतीत में जब वाराणसी में राजा ब्रह्मदत्त राज्य करते थे...' से प्रारंभ होकर बोधिसत्व द्वारा पारमिताओं की साधना को उजागर करती है। ३. समोधान (समवधान / संबंध संयोजन): कथा का अंतिम रहस्योद्घाटन, जहाँ बुद्ध बताते हैं कि उस प्राचीन काल के पात्र वर्तमान संघ में कौन हैं — जैसे देवदत्त विरोधी था, आनंद निष्ठावान सारथी थे, और वह बोधिसत्व स्वयं बुद्ध थे।

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