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Embroidered artwork for अमृत वेला: प्रातकाल का पावन ध्यान और ध्यान-साधना: Embroidered Khanda emblem with a saffron Nishan Sahib flag and marigolds at sunrise

अमृत वेला

प्रातकाल का पावन ध्यान और ध्यान-साधना

अमृत वेला

प्रातकाल का पावन ध्यान और ध्यान-साधना

अमृत वेला सूर्योदय से पूर्व का वह समय है जब वातावरण शांत होता है और ईश्वर ध्यान सबसे गहरा होता है।

अमृत वेला सचु नाउ वडिआई विचारु — सुबह के इस शांत वातावरण में परमात्मा के नाम का चिंतन करना सबसे फलदायी है।

क्या आप जानते हैं?

समय

अमृत वेला सूर्योदय से लगभग ढाई से तीन घंटे पहले शुरू होता है, जब वातावरण सबसे शांत और शुद्ध होता है। इसे 'अमृत' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समय ईश्वर का नाम जपना अमृत (अमरता देने वाले रस) के समान फलदायी माना जाता है।

गुरु वाणी

गुरु नानक देव जी ने जपुजी साहिब की पहली पंक्ति में फरमाया: 'अमृत वेला सचु नाउ वडिआई विचारु' – अर्थात इस पावन समय में सत्य नाम का चिंतन और परमात्मा की महिमा का विचार करना सबसे उत्तम है।

महत्व

सिख धर्म में अमृत वेला की साधना को दिनचर्या का आधार माना गया है। सिख सुबह-सुबह उठकर स्नान करते हैं और फिर गुरबाणी का पाठ करते हैं, जिसमें जपुजी साहिब, जाप साहिब, तथा चौपई साहिब आदि शामिल होते हैं।

लाभ

इस समय मन और वातावरण दोनों शांत होते हैं, जिससे ध्यान गहरा और एकाग्र होता है। नियमित अमृत वेला की साधना से आत्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और ईश्वर से गहरा जुड़ाव होता है।

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