सिख धर्म
बाणी
नित्नेम की सिख बाणियाँ — जपुजी साहिब, जाप साहिब, चौपई साहिब एवं आनंद साहिब — गुरमुखी लिपि, उच्चारण और अर्थ सहित 28 भाषाओं में।
व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
बाणी (संस्कृत 'वाणी' = पावन वचन, दिव्य वाणी)गुरमुखी / संत भाषा (पंजाबी, ब्रज, फारसी)
सद्गुरुओं की साक्षात दिव्य वाणी — श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में प्रतिष्ठित दस पातशाहियों एवं संतों की वह अमर वाणी, जो 'इक ओंकार' (एक ईश्वर) के प्रेम, सत्य आचरण, नाम-सिमरन और निष्काम सेवा का मार्ग प्रशस्त करती है।
छंद एवं शास्त्रीय संरचना
३१ रागों में निबद्ध शास्त्रीय एवं लोक छंद
पौड़ी (कदम-दर-कदम पद), श्लोक, और 'रहाउ' (ठहराव/विश्राम) — जो उस शब्द का केंद्रीय भाव होता है जिस पर मन को बार-बार लौटना होता है।
वैश्विक साहित्यिक तुलना
बाइबिल के आध्यात्मिक गीत एवं सूफी कव्वालीरागबद्ध ईश्वरीय वचन
बाइबिल के पवित्र गीतों और सूफी संतों की कव्वाली की भांति, जहाँ संगीत केवल कला नहीं बल्कि वह पावन वाहन है जो परमात्मा के वचन को सीधे अंतःकरण में उतार देता है।
साधना एवं व्यावहारिक पाठ:अमृत वेले के नितनेम (जपुजी साहिब, जाप साहिब आदि) और कीर्तन में नित्य गायन, जो अहंकार को मिटाकर आत्मा को परमात्मा से मिलाता है।