Bharat Devotion
कबीर पंथ

दोहे

संत कबीर, रहीम, तुलसीदास एवं सूरदास के पावन दोहे — मूल पाठ, सरल उच्चारण और संपूर्ण हिंदी भावार्थ सहित।

व्युत्पत्ति एवं आध्यात्मिक अर्थ
दोहा (द्विपदी, दो पंक्तियों का छंद)अपभ्रंश एवं मध्यकालीन संत भाषा

दो पंक्तियों का नीतिपरक एवं आध्यात्मिक छंद — मात्र दो पंक्तियों में जीवन का सार और गूढ़ ब्रह्मज्ञान समेटने वाला छंद। कबीर, रहीम और तुलसी जैसे संतों ने इसके द्वारा सांसारिक पाखंडों पर चोट की और सहज ज्ञान का प्रकाश फैलाया।

छंद एवं शास्त्रीय संरचना
मात्रिक छंद: प्रथम व तृतीय चरण में १३-१३ मात्राएँ, द्वितीय व चतुर्थ में ११-११ मात्राएँ

दो तुकबंद पंक्तियाँ: पहली पंक्ति में दैनिक जीवन का कोई सजीव दृष्टांत और दूसरी पंक्ति में उसका गहरा आध्यात्मिक या नैतिक निष्कर्ष।

वैश्विक साहित्यिक तुलना
नीति-कथन (Proverbs) एवं फारसी रुबाई (Rubaiyat)

स्मृतिगम्य ज्ञान-सूक्ति

बाइबिल के नीतिवचनों (Book of Proverbs) अथवा उमर खय्याम की रुबाइयों के सदृश, जो गागर में सागर भरकर अमर जीवन-दर्शन प्रस्तुत करते हैं।

साधना एवं व्यावहारिक पाठ:जीवन के नैतिक पथ-प्रदर्शन, आत्म-निरीक्षण और व्यावहारिक जीवन में सहज मार्गदर्शन हेतु कंठस्थ किए जाने वाले सूत्र।

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