भारतका चार धाम
चारै दिशामा स्थित सनातन संस्कृतिका पावन महातीर्थ
आदि शङ्कराचार्यद्वारा स्थापित भारतका चार पावन धाम: बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी र रामेश्वरम।
भारत की आध्यात्मिक एकता का दर्शन
आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने संपूर्ण भारत की पदयात्रा कर सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अखंडता को सुदृढ़ करने हेतु चारों दिशाओं में चार महाधामों की प्रतिष्ठा की।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार, भगवान नारायण दक्षिण में रामेश्वरम में स्नान करते हैं, उत्तर में बद्रीनाथ में ध्यान करते हैं, पूर्व में जगन्नाथ पुरी में भोजन ग्रहण करते हैं और पश्चिम में द्वारका में विश्राम करते हैं।
भारत के चार पावन महाधाम
चतुर्मठ एवं वैदिक परंपरा
आदि शंकराचार्य जी ने चारों धामों के साथ चार प्रमुख मठों की स्थापना कर चारों वेदों के संरक्षण का दायित्व सौंपा:
- •ज्योतिर्मठ (उत्तर, बद्रीनाथ) — अथर्ववेद
- •गोवर्धन मठ (पूर्व, पुरी) — ऋग्वेद
- •शारदा पीठ (पश्चिम, द्वारका) — सामवेद
- •शृंगेरी पीठ (दक्षिण, रामेश्वरम/शृंगेरी) — यजुर्वेद
पावन अच्युताष्टकम्
भगवान श्रीहरि की पावन स्तुति:
अच्युतं केशवं रामनारायणं
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥
के तपाईं जान्नुहुन्छ?
Four Mathas Established
Adi Shankaracharya established four monastic centers across the four corners of India, assigning each the preservation of one of the four Vedas.
Mahaprasad of Puri
The sacred food offering cooked in earthen pots at Jagannath Puri is prepared in an earthen oven where the top pot cooks first.
Consecrated by Shri Rama
Rameshwaram is the only Dham among the four dedicated to Bhagwan Shiva, consecrated by Bhagwan Rama before crossing to Lanka.
Badrinath Idol from Narada Kund
The black Saligram stone idol of Badri Vishal was retrieved from the icy depths of Narada Kund in the Alaknanda river by Adi Shankaracharya.
Vishnu
हिन्दु धर्म बाट थप
सम्बन्धित शिक्षाहरू
उही शिक्षा, विभिन्न परम्पराहरूमा प्रतिध्वनित
