अमर देस
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अमर देश
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'अमर' (मृत्युहीन) और 'देस' (देश) से बना; गुरु रविदास जी द्वारा बेगमपुरा की सामाजिक कल्पना के साथ-साथ प्रयुक्त वाक्यांश, दुःख तथा मृत्यु दोनों से परे शाश्वत अवस्था हेतु।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अमर देस यह दर्शाता है कि गुरु रविदास जी की दृष्टि में आध्यात्मिक मुक्ति तथा सामाजिक न्याय पृथक नहीं थे — दोनों दुःख-रहित अस्तित्व की एक ही दृष्टि के भाग थे।