Bharat Devotion

चित्त शुद्धि

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

मन की शुद्धता

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'चित्त' (मन, चेतना) और 'शुद्धि' (शुद्धता) से बना; गुरु रविदास जी द्वारा सिखाई गई शुद्धता का प्रकार, जाति-आधारित शारीरिक शुद्धता से बिल्कुल भिन्न, जो केवल मन की आंतरिक स्थिति से संबंधित है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

गुरु रविदास जी हेतु, कोई भी पेशा चित्त शुद्धि में बाधा नहीं बन सकता — शुद्ध हृदय वाला चमार उतना ही पवित्र है जितना कोई ब्राह्मण, यदि उससे अधिक नहीं।

चित्त शुद्धि का उल्लेख इन लेखों में