Bharat Devotion

दास भाव

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

सेवक की भावना

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'दास' (सेवक) और 'भाव' (रवैया, भावना) से बना; गुरु रविदास जी की वाणी की विशेषता, जिसमें वे बार-बार स्वयं को परमात्मा के विनम्र दास के रूप में पहचानते हैं, अहंकार के स्थान पर पूर्ण समर्पण रखते हैं।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

दास भाव विरोधाभासी रूप से गुरु रविदास जी की सबसे बड़ी शक्ति बनता है — सामाजिक स्वामित्व का दावा करने के बजाय, वे स्वयं को केवल परमात्मा का दास घोषित कर प्रत्येक सांसारिक पदानुक्रम से ऊपर उठते हैं।