जाति-पांति निवारण
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
जाति व्यवस्था का उन्मूलन
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'जाति-पांति' (जातिगत विभाजन) + 'निवारण' (उन्मूलन) से — गुरु रविदास जी की शिक्षा का केंद्रीय सामाजिक लक्ष्य, जातिगत भेदभाव को पूर्णतः जड़ से उखाड़ना।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु रविदास जी, स्वयं एक चर्मकार परिवार में जन्मे, ने अपनी सरल किंतु गहन वाणी के माध्यम से जाति-पांति निवारण को मूर्त रूप दिया, बाद के सामाजिक सुधार आंदोलनों हेतु प्रेरणा बने।