जुगत
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
कुशल उपाय; सही मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'युक्ति' (उपाय, विधि) से; कबीर द्वारा सिखाई गई संतुलित, गृहस्थ-अनुकूल साधना हेतु शब्द — जो संसार-त्याग की माँग करने के बजाय आंतरिक स्मरण को सामान्य जीवन तथा कार्य के साथ जोड़ती है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कबीर स्वयं जीवनभर कपड़ा बुनकर जीविका चलाते रहे — जुगत का अर्थ है कि साक्षात्कार करघे तथा बाज़ार में मिलता है, केवल पर्वत शिखर पर नहीं।