कड़ाह प्रसाद
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
कड़ाही में बना प्रसाद
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'कड़ाह' (लोहे की कड़ाही) और 'प्रशाद' (ईश्वर की कृपा) से बना; समान भाग आटा, घी व चीनी से तैयार होता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
हर गुरुद्वारे में सभी को बिना भेदभाव बाँटा जाता है, सिख धर्म की समानता की शिक्षा का जीवंत प्रतीक।