कर्ता पुरुष
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
करने वाला, मूल सृष्टिकर्ता
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'कर्ता' (करने वाला) और 'पुरुष' (सत्ता) से बना; कबीर का उस निराकार परम सत्ता हेतु शब्द जो अकेला ही वास्तव में कार्य करता है, इस भ्रम के विपरीत कि व्यक्तिगत आत्माएँ स्वतंत्र कर्ता हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कर्ता पुरुष को प्रत्येक कार्य के पीछे सच्चा कर्ता मानना अहंकार के कर्तृत्व-दावे को मिटा देता है — 'मैं करता हूँ' से 'यह मेरे माध्यम से होता है' की ओर एक मुक्तिदायक परिवर्तन।