Bharat Devotion

लेश्या

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

कषायों का रंग

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'लिश्' (चिपकना, रंगना) से; आत्मा की भावनात्मक तथा नैतिक स्थिति, जो छह रंगों में वर्गीकृत होती है — कृष्ण (काली) जैसी हानिकारक से शुक्ल (सफेद) जैसी शुद्ध तक।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

लेश्या सिद्धांत यह याद दिलाता है कि क्रिया से कहीं अधिक मन की भावना महत्वपूर्ण है — समान कार्य क्रोधपूर्वक किया जाए तो कृष्ण लेश्या तथा शांतिपूर्वक किया जाए तो शुक्ल लेश्या बन सकता है।