निज घर
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
अपना सच्चा घर
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'निज' (अपना) और 'घर' से बना; गुरु रविदास जी की वाणी में, आत्मा का वास्तविक निवास — बाह्य भटकाव के बजाय भीतर ही खोजा जाने वाला स्थान।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
निज घर में टिकना भटकाव के अंत को दर्शाता है — गुरु रविदास जी सिखाते हैं कि शांति हेतु किसी दूर तीर्थ की नहीं, बल्कि अपने ही भीतर की यात्रा की आवश्यकता है।