निर्मल पंथ
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पवित्र, निष्कलंक मार्ग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'निर्मल' (निष्कलंक, शुद्ध) और 'पंथ' (मार्ग) से बना; गुरु रविदास जी द्वारा अपनी ही शिक्षा को दिया गया नाम, जाति-भेद या बाह्य शुद्धता के नियमों से परे, हृदय की शुद्धता पर टिका मार्ग।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
अपने मार्ग को 'निर्मल' नाम देकर, गुरु रविदास जी ने सीधे उस जातीय भेदभाव को चुनौती दी जिसने उनके पेशे को 'अशुद्ध' करार दिया था — सच्ची शुद्धता आचरण में है, जन्म में नहीं।