पंचाचार
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पाँच नैतिक आचार
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'पंच' (पाँच) और 'आचार' (आचरण) से बना; लिंगाचार, सदाचार, शिवाचार, गणाचार, भृत्याचार — प्रत्येक शरण द्वारा पाले जाने वाले आचरण के पाँच स्तंभ।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
ये पाँच आचार व्यक्तिगत पवित्रता (लिंगाचार) से लेकर सामुदायिक सेवा (गणाचार, भृत्याचार) तक फैले हैं, यह दर्शाते हुए कि आध्यात्मिकता कभी भी सामाजिक जिम्मेदारी से अलग नहीं की गई।