पंचास्तिकाय
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पाँच विस्तृत द्रव्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'पंच' और 'अस्तिकाय' (अंतरिक्ष में विस्तृत) से बना; जीव, पुद्गल (द्रव्य), धर्म (गति का माध्यम), अधर्म (स्थिरता का माध्यम) तथा आकाश (अंतरिक्ष) — ब्रह्मांड रचने वाले पाँच मूलभूत द्रव्य।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
'धर्म' और 'अधर्म' यहाँ नैतिकता का उल्लेख नहीं करते, बल्कि भौतिकशास्त्रीय माध्यमों का — एक गति को संभव बनाता है, दूसरा स्थिरता को, जैन भौतिकशास्त्र की अनूठी शब्दावली प्रस्तुत करते हुए।