Bharat Devotion

ऋण (तीन ऋण)

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

जन्म से चुकाया जाने वाला ऋण

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'ऋण' (कर्ज) से; पारंपरिक शिक्षा कि प्रत्येक व्यक्ति जन्म से तीन ऋणों को धारण करता है — देवताओं का (देव-ऋण, पूजा द्वारा चुकाया गया), पितरों का (पितृ-ऋण, संतान व संस्कारों द्वारा चुकाया गया), तथा ऋषियों का (ऋषि-ऋण, अध्ययन द्वारा चुकाया गया)।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

तीन ऋण मानव अस्तित्व को जन्म से ही अंतर्निहित रूप से संबंधात्मक तथा ऋणी के रूप में प्रस्तुत करते हैं — व्यक्ति कभी भी स्व-निर्मित नहीं होता बल्कि सदैव दिव्य, पैतृक, तथा बौद्धिक वंशावलियों के प्रति बाध्य होता है।