सबसे नीचा
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सबसे नीचा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
गुरु रविदास जी की वाणी की एक प्रसिद्ध पंक्ति 'सबसे नीच जाति मेरी जोगी' से, जिसमें वे अपनी सामाजिक स्थिति को स्वीकार करते हुए भी परमात्मा के साथ निकटता की घोषणा करते हैं।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह पंक्ति विद्रोह है, शिकायत नहीं — गुरु रविदास जी समाज के निर्णय को उलट देते हैं, यह दिखाते हुए कि सामाजिक स्थिति ईश्वर की दृष्टि में कोई मायने नहीं रखती।