संध्या वंदनम्
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
संधि-काल की वंदना
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'संध्या' (दिन तथा रात्रि का संधि-स्थल) और 'वंदनम्' (वंदना) से बना; द्विज हिंदुओं द्वारा प्रातः, मध्याह्न, तथा सांयकाल किया जाने वाला दैनिक अनुष्ठान, गायत्री मंत्र पाठ को अनुष्ठानिक शुद्धिकरण के साथ जोड़ता हुआ।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
पूजा को निश्चित घड़ी के समय के बजाय सूर्य के संक्रमण से जोड़कर, संध्या वंदनम् साधक को शुद्ध यांत्रिक समय-सारणी के बजाय प्राकृतिक लय के साथ तालमेल बनाए रखता है।