स्थावरलिंग
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
स्थिर लिंग
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'स्थावर' (स्थिर, अचल) और 'लिंग' से बना; मंदिरों में स्थापित स्थिर शिवलिंग, प्रत्येक शरण द्वारा सदैव धारण किए जाने वाले चल इष्टलिंग के विपरीत।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
बसवण्ण की प्रसिद्ध वचन 'स्थावर का नाश होता है, जंगम का नहीं' स्थावरलिंग को अस्वीकार नहीं करती, बल्कि इष्टलिंग तथा जंगम की जीवंत, चलती पवित्रता को स्थिर पत्थर से ऊपर रखती है।