Bharat Devotion

तप

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

तपस्या, आध्यात्मिक ताप

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'तप्' से — गर्म करना या जलाना — इतनी तीव्र आत्म-अनुशासन तथा तपस्या कि वह अशुद्धियों को 'जला' दे तथा आध्यात्मिक शक्ति उत्पन्न करे।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

अनेक पौराणिक कथाएं ऋषियों तथा असुरों तक को देवताओं से वरदान अर्जित करने हेतु तीव्र तप करते हुए वर्णित करती हैं, यह दर्शाते हुए कि यह शक्ति केवल अनुशासित प्रयास से किसी को भी उपलब्ध है।