Bharat Devotion

त्रिविध दासोह

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

त्रिविध सेवा-अर्पण

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'त्रि' (तीन), 'विध' (प्रकार), और 'दासोह' (सेवा-अर्पण) से बना; शरीर से (कायक), मन से (मनोदासोह), धन से (अर्थदासोह) — समाज को दी जाने वाली तीन प्रकार की सेवा।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

यह सिद्धांत सेवा को मात्र शारीरिक श्रम तक सीमित नहीं करता, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि धनहीन व्यक्ति भी मानसिक या शारीरिक सेवा द्वारा समान मूल्य का योगदान दे सकता है।