Bharat Devotion

वानप्रस्थ

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

वन की ओर प्रस्थान

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'वन' (जंगल) और 'प्रस्थ' (की ओर जाना) से बना; तीसरा आश्रम, जब व्यक्ति सक्रिय गृहस्थ कर्तव्यों से क्रमशः पीछे हटता है — परंपरागत रूप से जिम्मेदारियाँ वयस्क संतानों को सौंपकर तथा तेजी से चिंतन की ओर मुड़ते हुए।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

वानप्रस्थ अचानक विराम के बजाय एक सुंदर, क्रमिक सेवानिवृत्ति का प्रतिरूप प्रस्तुत करता है — यह सिखाते हुए कि आध्यात्मिक विरक्ति आसक्ति को ढीला करने की एक प्रक्रिया है, एक ही नाटकीय त्याग नहीं।

वानप्रस्थ का उल्लेख इन लेखों में