बुधकौशिक का ३८ श्लोकों का रक्षा-स्तोत्र, जो सम्पूर्ण शरीर को राम की रक्षा में सौंपता है और राम नाम को सहस्रनाम के तुल्य बताकर समाप्त होता है।