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Embroidered artwork for ५१ शक्तिपीठ: प्राकट्य कथा, पावन अङ्ग-आभूषण र प्रमुख तीर्थहरूको दर्शन: Embroidered Om symbol above a brass diya, marigolds and a temple spire at sunrise

५१ शक्तिपीठ

प्राकट्य कथा, पावन अङ्ग-आभूषण र प्रमुख तीर्थहरूको दर्शन

५१ शक्तिपीठ

प्राकट्य कथा, पावन अङ्ग-आभूषण र प्रमुख तीर्थहरूको दर्शन

सती देवीका पावन अङ्गहरू खसेका ५१ शक्तिपीठहरू जसले आदि पराशक्तिको प्रतिनिधित्व गर्दछन्।

शक्तिपीठों की पावन प्राकट्य कथा

शिव पुराण, देवी भागवत और कालिका पुराण के अनुसार, जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ में अपने पति महादेव के अपमान से व्यथित होकर माता सती ने योगाग्नि में देह त्याग दी, तब भगवान शिव अत्यंत विरक्त होकर सती के पार्थिव शरीर को लेकर संपूर्ण ब्रह्मांड में तांडव करने लगे।

सृष्टि के संतुलन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र द्वारा सती की देह को ५१ भागों में विभक्त कर दिया। भारत भूमि पर जहाँ-जहाँ माता सती के पावन अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान महाशक्तिपीठ कहलाए। प्रत्येक शक्तिपीठ में माता के स्वरूप के साथ भगवान शिव भैरव रूप में विराजमान होकर शक्ति की रक्षा करते हैं।

भारत के प्रमुख पावन शक्तिपीठ

१
कामाख्या मंदिर
नीलाचल पर्वत, गुवाहाटी, असम
योनि मंडल (सृजन शक्ति)
देवी कामाख्या व उमानंद भैरव
२
कालीघाट
कोलकाता, पश्चिम बंगाल
दाहिने पैर का अँगूठा
देवी कालिका व नकुलेश्वर भैरव
३
ज्वालाजी
कांगड़ा घाटी, हिमाचल प्रदेश
जिह्वा (अखंड दिव्य ज्योति)
देवी सिद्धदा व उन्मत्त भैरव
४
तारापीठ
बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल
तृतीय नेत्र
देवी तारा व चंद्रचूड़ भैरव
५
अंबाजी धाम
बनासकांठा, गुजरात
हृदय मंडल (विशाल यंत्र)
देवी अंबा व बटुक भैरव
६
विशालाक्षी
मीर घाट, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
कर्ण कुंडल व नेत्र
देवी विशालाक्षी व काल भैरव
७
हिंगलाज माता
लासबेला, बलूचिस्तान
ब्रह्मरंध्र (शीर्ष)
देवी कोट्टरी व भीमलोचन भैरव
८
महालक्ष्मी
कोल्हापुर, महाराष्ट्र
करकमल (नेत्र व शक्ति)
देवी महालक्ष्मी व क्रोधीश भैरव

शक्ति उपासना व साधना का मर्म

शक्तिपीठों की यात्रा साधक के अंतर्मन में दिव्य ऊर्जा का संचार करती है:

  • •
    भक्तजन मातृ शक्ति के प्रति कृतज्ञता और अनन्य समर्पण भाव से वंदना करते हैं।
  • •
    यहाँ वैदिक एवं तांत्रिक दोनों पद्धतियों से मंत्र जप, कुमकुम अर्चन एवं ध्यान संपन्न होता है।
  • •
    शक्ति और शिव (भैरव) की युगल उपासना अद्वैत चेतना और अखंड सामंजस्य का साक्षात्कार कराती है।

पावन महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

आदि पराशक्ति की पावन स्तुति:

अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि

विश्वविनोदिनि नन्दिनुते

गिरिवरविन्ध्यशिरोधिनिवासिनि

विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।

सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि

दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते

जय जय हे महिषासुरमर्दिनि

रम्यकपर्दिनि शैलसुते॥

के तपाईं जान्नुहुन्छ?

No Physical Idol at Kamakhya

Inside the sanctum sanctorum of Kamakhya in Assam, there is no stone idol; worship is offered to a natural underground spring flowing through a cleft in the bedrock.

Eternal Natural Flame

At Jwalamukhi in Himachal Pradesh, the goddess is worshipped as eternal blue flames emanating naturally from rock crevices without any artificial fuel.

Shiva-Shakti Pairings

Every one of the 51 Shakti Peethas houses an associated Bhairava shrine, emphasizing that Shakti and Shiva are inseparable.

Geographic Span

Lists of the 51 Peethas span the cultural footprint of ancient Bharat, including modern India, Nepal, Bangladesh, Sri Lanka, Pakistan, and Tibet.

Devi का सम्पूर्ण स्तुति र पाठ

Devi

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