Bharat Devotion

अनहद शब्द

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

बिना बजाए गूँजने वाला शब्द

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'अनहद' (बिना आघात के) और 'शब्द' (ध्वनि) से बना; गुरु रविदास जी की वाणी में, बाह्य साधन के बिना भीतर गूँजने वाली परमात्मा की ध्वनि, गहरे सिमरन में सुनाई देने वाली।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

गुरु रविदास जी के लिए, अनहद शब्द सुनना इस बात का प्रमाण था कि भगवान बाहर नहीं, बल्कि हर हृदय के भीतर ही गूँजते हैं, चाहे जाति या हैसियत कुछ भी हो।