अवधूत
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
जिसने सांसारिक बंधन झटक दिए हों
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'अवधू' (झटकना, त्याग देना) से; किसी संप्रदाय, जाति या स्थायी निवास से न बँधा स्वतंत्र आध्यात्मिक पथिक, एक आदर्श जिसे कबीर ने स्वयं हिंदू या मुस्लिम रूढ़िवाद द्वारा दावा किए जाने से इनकार करके साकार किया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कबीर की घोषणा 'मैं न हिंदू, न मुसलमान' अवधूत भावना का शुद्धतम रूप है — यह धर्म से नहीं, बल्कि पहचान के पिंजरे के रूप में धर्म से मुक्ति है।