भगत बाणी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
भगतों की वाणी
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'भगत' (भक्ति संत) + 'बाणी' (वचन) से — गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित गुरु रविदास जी, कबीर, तथा अन्य भक्ति संतों की दैवीय वाणी।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरु ग्रंथ साहिब में भगत बाणी का सम्मिलित होना दर्शाता है कि सत्य जाति, धर्म, या मूल की सीमा नहीं जानता — गुरु रविदास जी की वाणी गुरुओं की अपनी वाणी के समान सम्मानित है।