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बीजक

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

बीज, सूची

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'बीज' से — कबीर पंथ का प्रमुख ग्रंथ, जो कबीर के दोहों, साखियों, तथा पदों को उनकी शिक्षा के सार को समाहित करने वाले 'बीज' के रूप में संकलित करता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

किसी व्यवस्थित ग्रंथ के विपरीत, बीजक संक्षिप्त, प्रायः विरोधाभासी छंदों का संग्रह है जिसका उद्देश्य श्रोता को आत्मसंतुष्ट विश्वास से झकझोरना है, न कि रैखिक तर्क निर्मित करना।

बीजक का उल्लेख इन लेखों में

कबीर की साखी, शब्द, तथा रमैनी

कबीर पंथ सिखाता है कि तीन लोकों से परे सत्य का लोक सतलोक सतपुरुष का शाश्वत धाम है, जो केवल दीक्षित भक्ति द्वारा प्राप्य है।

कबीर पंथ के भक्त चदरिया झीनी रे झीनी जैसे भजन गाने हेतु सत्संग में एकत्रित होते हैं, साझा भक्ति गायन के माध्यम से जीवन की नश्वरता पर चिंतन करते हुए।

संत कबीर के दो-पंक्ति दोहों तथा साखियों का जाप तथा चिंतन दैनिक जीवन में तत्काल आत्म-अवलोकन, विनम्रता, तथा शांति प्रदान करता है।

निराकार दिव्य की उपासना

वाराणसी में संत कबीर का निवास तथा उपदेश स्थल