Bharat Devotion

कीर्तन

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

गुणगान

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

संस्कृत 'कीर्ति' (प्रशंसा) से; गुरबाणी शब्दों को रागों में गाने की परंपरा।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

गुरुद्वारे में प्रतिदिन कीर्तन गुरबाणी को संगीत के माध्यम से हृदय तक पहुँचाता है, ध्यान और शांति का मार्ग बनता है।

कीर्तन का उल्लेख इन लेखों में

निरंकार परमात्मा का ध्यान और स्वरूप

गायन शैली, रागों का महत्व और आत्मिक शांति

पावन पदों का मर्मस्पर्शी गायन

संत कबीर के दोहे, गुरु ग्रंथ साहिब में संरक्षित उनके 541 पदों सहित, आग्रह करते हैं कि ईश्वर मंदिर या मस्जिद में नहीं, करुणा तथा सत्य में मिलते हैं।

कबीर पंथ के भक्त चदरिया झीनी रे झीनी जैसे भजन गाने हेतु सत्संग में एकत्रित होते हैं, साझा भक्ति गायन के माध्यम से जीवन की नश्वरता पर चिंतन करते हुए।

अर्थ, धार्मिक महत्व और पवित्र परंपराएं