कीर्तन
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गुणगान
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'कीर्ति' (प्रशंसा) से; गुरबाणी शब्दों को रागों में गाने की परंपरा।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
गुरुद्वारे में प्रतिदिन कीर्तन गुरबाणी को संगीत के माध्यम से हृदय तक पहुँचाता है, ध्यान और शांति का मार्ग बनता है।