लिंगांग सामरस्य
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
लिंग व अंग का सामंजस्य
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'लिंग' (शिव), 'अंग' (व्यक्तिगत आत्मा-शरीर), और 'सामरस्य' (सम्मिश्रण) से बना; शिव तथा व्यक्ति के आत्मा-शरीर के बीच पूर्ण सम्मिश्रण को वर्णित करने वाला लिंगायत दर्शन का केंद्रीय सिद्धांत।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
यह सिद्धांत षट्स्थल का अंतिम लक्ष्य है, यह समझाता है कि इष्टलिंग मात्र प्रतीक नहीं बल्कि उस संपूर्ण सम्मिश्रण हेतु प्रतिदिन के अभ्यास का साधन क्यों है।