मिच्छामि दुक्कडम्
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
मेरे सभी दोष तथा अपराध क्षमा हों और निष्फल हो जाएँ
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
प्राकृत 'मिच्छामि' (निष्फल हो/क्षमा हो) तथा 'दुक्कडम्' (बुरे कर्म) से।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
संवत्सरी पर आदान-प्रदान किया जाता है, समस्त द्वेष मिटाकर सभी आत्माओं को बिना शर्त क्षमा प्रदान करते हुए।