निर्गुण ब्रह्म
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
गुणों से रहित परब्रह्म
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'निर्' (रहित) और 'गुण' (लक्षण) तथा 'ब्रह्म' (परमतत्व) से बना; अद्वैत वेदांत में परम सत्य की वह अवधारणा जो समस्त गुणों, नामों तथा वर्णनों से परे शुद्ध, निराकार चेतना है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
निर्गुण ब्रह्म की सीधे मूर्तियों या कर्मकांडों द्वारा पूजा नहीं की जा सकती — इसे केवल गहन ध्यान तथा 'नेति नेति' (यह नहीं, यह नहीं) के निषेध द्वारा जाना जाता है।