समापनम्
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
पूर्णता, समापन
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत 'सम्' और 'आपन' ('प्राप्त करना', 'समाप्त करना') से — पाठ की विधिवत समापन-क्रिया।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
पाठ को विधिवत पूर्ण करने वाले समापन पद्य — जो अक्सर अभ्यास का पुण्य ईश्वर को समर्पित करते हैं और भक्त की भक्ति के अविरल बने रहने की प्रार्थना करते हैं।