सतलोक
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
सत्य का लोक
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'सत्' (सत्य, सत्ता) और 'लोक' (क्षेत्र) से बना; काल के अधिकार क्षेत्र से परे आत्मा के मूल, शाश्वत घर हेतु कबीर का नाम, जहाँ से प्रत्येक आत्मा उतरी मानी जाती है तथा जहाँ जागृत आत्मा अंततः लौटती है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
सतलोक अमरलोक से मुख्यतः बल के आधार पर भिन्न है — अमरलोक मृत्युहीनता पर बल देता है, जबकि सतलोक उस लोक की अटूट सत्यता पर बल देता है, जो काल के क्षेत्र को परिभाषित करने वाले भ्रम (माया) के विपरीत है।