Bharat Devotion

शून्यसंपादने

शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)

शून्यता की प्राप्ति

व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)

'शून्य' (रिक्तता, परम चेतना) और 'संपादने' (उपलब्धि) से बना; 15वीं-16वीं सदी में संकलित ग्रंथ, अल्लमप्रभु तथा अन्य शरणों के बीच के आध्यात्मिक संवादों द्वारा षट्स्थल दर्शन को विस्तृत करता है।

आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ

इस ग्रंथ में अक्क महादेवी जैसी महिला शरणों की आवाज़ें अल्लमप्रभु जैसे पुरुष शरणों के साथ समान अधिकार से चर्चा करती हैं, जो 12वीं सदी के शरण आंदोलन की लैंगिक समानता को प्रतिबिंबित करता है।

शून्यसंपादने का उल्लेख इन लेखों में