सुप्रभातम्
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
शुभ प्रभात
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
संस्कृत "सु" (अच्छा, शुभ) और "प्रभात" (भोर) से — एक स्तोत्र जो परंपरागत रूप से सूर्योदय से पहले देवता को दिव्य निद्रा से कोमलता से जगाने हेतु गाया जाता है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
तिरुमला में प्रतिदिन भोर से पहले गाया जाने वाला वेंकटेश्वर सुप्रभातम् माना जाता है कि देवता के प्रातः सुनने वाली पहली ध्वनि है — इसे गाने वाले भक्त देवता के जागने के क्षण में उपस्थित होने का अनुभव करते हैं।