त्रिमूर्ति
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
तीन रूप
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
'त्रि' (तीन) + 'मूर्ति' (रूप) से — ब्रह्मा, विष्णु, तथा शिव की त्रिमूर्ति जो सृजन, पालन, तथा संहार को दर्शाती है।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
त्रिमूर्ति जगत को एक ही रैखिक कृत्य के बजाय सृजन, पालन, तथा संहार के निरंतर चक्र के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें प्रत्येक देवता उस चक्र के एक चरण को नियंत्रित करता है।