उलटबाँसी
शाब्दिक अर्थ (Shabdartha)
उलटी बातें, विरोधाभासी भाषा
व्युत्पत्ति एवं धातु मूल (Vyutpatti)
हिंदी 'उलट' (विपरीत) तथा 'बाँसी' (वाणी) से निर्मित।
आध्यात्मिक भावार्थ व संदर्भ
कबीर की काव्य-शैली जिसमें जानबूझकर विरोधाभासी, पहेली-जैसे पद्य ('मछली प्यासी जल में' जैसे) रचे गए, जो श्रोता को शाब्दिक, अभ्यस्त चिंतन से हटाकर प्रत्यक्ष आध्यात्मिक बोध की ओर ले जाते हैं।